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खोलूँ जब पंख अपने Peacock
और बरसात में नाचूँ ज़ोर ज़ोर
हूँ मैं बड़ा चित्‍त चोर
हाँ मैं हूँ मोर
पक्षियों का मैं कहलाता हूँ राजा
मुरलीधर के मुकुट को मैं ही सजाता
हाँ मैं वही मोर हूँ