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काग़ज़ का एक छोटा सा टुकड़ा हूँ मैं  Money
पर दुनिया पर राज करता हूँ
कभी किसी की मुठ्ठी में
कभी किसी की जेब में मैं बसता हूँ
कभी मंदिर में चढ़ाया जाता
कभी बैंक में मैं जमा हो जाता
कभी सेठ की तिजोरी मैं भरता
कभी गरीब की रोटी का इंतज़ाम हूँ करता
हाँ सही सोचा तूने ओ मन
मैं हूँ वही – धन

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