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जो मां ना होती, तो क्या होता? 
सबसे पहले ये संसार ना होता
ममता की बरसात ना होती,  
प्यार की कोई बात ना होती
मां से बढ़ कर धीरज किसका?  
है सारे जग में तेज़ उसका 
उसके तन से काया ढलती है
ममता की छाया में औलाद पलती  है  
मां की छवी कैसी न्यारी 
सब बातें उसकी प्यारी प्यारी,  
दर्द सभी वो सह लेती है,    
दान जीवन का वो देती है,  
वो जननी है दुख हरणी है,
आँखों में आँसूं जब आते हैं,  
हाथ मां के सहलाते हैं,   
भगवान का एक वरदान है मां,  
हमारी ही पहचान है मां,
कभी दिल उसका जो रो उठता है,    
धीरज भी जब खो उठता है,    
मन को वो समझा लेती है, 
ममता की चादर में आँसूं सारे छुपा लेती है,  
आज ज़माना बदल गया है,  
चमक  दमक में सब ढल गया है,   
कभी बचपन खुद का याद करो,     
कुछ बीती बातें याद करो,  
मां की खुश्बू आयेगी, 
बहा तुम्हें ले जायेगी,   
होती है क्या प्यार की बारिश,   
सब कुछ हमें बतायेगी,    
ना दुखे कभी किसी मां का दिल,   
ये वादा ही तो करना है, 
अपनी मां के चरणों में,  
सर को ही तो धरना है, 
ममता का कोई मोल नहीं,    
बिन मांगे मिल जाती है,  
मां का भी कोई तोल नही,   
पीछे दुनिया रह जाती है|
-किरण गुलाटी 
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