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आज निकल के घर से बाहर गया,
तो देखा उन दीन-दुखियारो को,
नन्हे हाथो मे खाली कटोरी,
और नयनो से निकलते अश्रु धारो को।
जिन्हे देख हृदय पसीज गया,
मन मेरा बेबस हो गया ,
उनके हाथो के सिक्को को सुन,
आज मैं तो संगीत भूल गया।
जिन्हे देख सहसा मैं ठहरा,
मानो कुछ देर अमीर मैं बन गया,
उन्हे देकर चंद सिक्के मैं,
उनकी दुआओ से गरीब मैं बन गया।

-नीरज चौरसिया

Aaj nikal k ghr se bahar gya
Too dekha un din-dukhiyon ko
Nanhe hathon me khali ktori
Aur nano se nikle ashru ki dharo ko
Jinhe dekh hirdya psij gya
Man mera bebas ho gya
Unke hatho k sikko ko sun
Aaj main to sangeet bhl gya
Jinhe dekh sahsa main thahra
Mano kuch deir amir main bn gya
Unhe de kr chand sikke main 
Unki duaao se grib main ban gya

– Niraj Chaurasiya

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