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इतनी आबादी में रहना आज़ादी से,
मैं क्यूँ न चाहूँ
पंछियों सी उडक़र बादलों को चूना
मैं क्यूँ न चाहूँ
लड़कों सा मैं भी हर जगह घूमना
तारों से अलग चाँद की तरह चमकना
पर्वतों का आरोहण सपना बने मेरा
विदेशों में जा कर पढ़ना मैं क्यों न चाहूँ
इन सारे सवालों के जबाब मैं क्यों न चाहूँ
जनता है आसमान और ज़मीन
हमें नहीं है कोई कमी
फिर क्यों इतनी आबादी में रहना आजादी से
मैं क्यू न चाहूँ

– अनुष्का सूरी

 

Itni aabadi me rahna aajadi se,
Mai q na chahun.
Panchiyon si udkar badlon ko chuna
Mai q na chahun.
Ladkon sa mai bhi har jagah ghumna,
Taron se alag chand ki tarah chamakana,
Mai q na chahun.
Parwaton ka aarohan sapna bane mera,
Videshon me jakar padhna mai q na chahun.
In sare sawalon ke jawab mai q na chahun.
Janta hai aasman aur jamin
Hamme nahi hai koi kami,
Phir q itni aabadi me rahna aajadi se,
Mai q na chahun.

– Anushka suri

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