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कुछ जूनून जगाना था
दिल का ज़रा एहसास करवाना था
वो रात गुजर जाती है
फिर से एक नई सुबह आती है
कुछ जूनून लगता है
दिल मैं फिर से हलचल होती है
सोचता हूँ सोचता हूँ अच्छा कुछ कर दूँ
मम्मी पापा का सपना पूरा कर दूँ
उनकी आँखें भरी है
बोझ उतार कर उन्हें हल्का कर दूँ
फिर धीरे धीरे दिन गुजरता है
दोपर का टाइम होता है
यहाँ वहाँ के चक्कर खा के
दिल का मोरल डाउन हो जाता है
दिल उदास हो के थक सा जाता हूँ
अपने को ले कर डर सा जाता हूँ
पूरा हो गया या नहीं
ये सोच में पड़ जाता हूँ
शाम का टाइम आ गया यारो
बड़ा सुहाना सा होता है
अंदर सा एक अज़ीब सा एहसास होता है
छोड़ दूँ सब क़ुछ दुनिया भी ये
पर कायरता का एहसास होता है दोस्तों से मिलता हूँ
जीने की इच्छा जग जाती है
और अंदर से एक फील आती है
की कुछ भी मानूँगा
सफलता का हाथ पकड़कर ही मानूँगा
चलेगा योगेश फिर से कल सुबह
और मैं दिल को एहसास करवा डालूँगा

-योगेश जामदागनी

Kuch junoon jgana tha ,
Dil ko jra ehsas krwana tha,
Wo rat gujr jati h,
Fir s ek nyi subah ati h,
Kuch junoon jagta h,
Dil m phir s hlchl hoti h,
Sochta hu
Sochta hu acha kuch krdu ,
Mummy papa ka spna pura krdu,
Unki ankhen bhaari h ,
Bhoj utarkr unko hlki krdu,
Fir dheere dheere din gujrta h,
Dophar ka time hota h,
Yha vha k chakkar khake ,
Dil ka moral down ho jata h,
Dil uddas hoke m thak sa jata hu,
Apne spne ko lekr dar sa jata hu,
Pura hoga ya nhi,
Ye soch m pd jata hu,
sham ka time aa gya yaaro,
Bda suhana sa hota h,
Andar s ek ajeeb sa ehsas hota h,
Chod du sb kuch duniya bhi ye,
Pr kayrta ka ehsas hota h,
Dosto s milta hu,
Jine ki ichaaa jag jati h,
Aur andar s ek feel aati h,
Ki kuch bhi ho har na manunga,
Safalta ka hath pkdkar hi manunga,
Chlega Yogesh fir s kal subah,
Aur m dil ko ehsaas krwa dalunga…

-Yogesh jamdagni

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