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मिट्टी से जनमा हे फूल तू कहाँ जा रहा है
हे मित्र ,मै पृभु के चरणो मे सजने जा रहा हूँ
कभी मै किसी सुन्दरी के गजरे मे सजने जा रहा हूँ
तो कभी मै किसी नेता आ सत्कार करने जा रहा हूँ
तो कभी मृत्युशैया मे षृद़ान्जली बनने जा रहा हूँ
मेरा जीवन तो यही है मित्र
मिट्टी  से जनमा हूँ और मिट्टी मे ही मिलने जा रहा हूँ।

-आरती रस्तोगी 

Mitti se janma hei phool tu khan ja rha hai
Hei miter main parbhu k chrno me sajne ja rha hoon
Kabhi main kisi sundri ke gazrei mein sajne ja rha hoon
To kabhi main kisi neta aa satkaar krne ja rha hoon
To kabhi mirtyushya mein prsadnjali banne ja rha hoon
Mera jivan t yhi hai mitar
Mitti se jnma hoon aur mitti mein hi milne ja rha hoon

-Aarti Rastogi