Hindi Poem on Home- छोटा सा घर


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लम्बी सी सड़क के किनारे मेरा एक छोटा सा घर है,
लौटना है अपनी ही आदतों से, बहुत दूर का सफ़र है
जहां ये टूटता है मन मेरा, बातों में घुला कुछ ज़हर है,
आंगन में लगे एक तरु की छाया से थोड़ी शीत लहर है,
भीतर तो जलती हूं पर देख जग को थोड़ा ठहर है,
हर किसी की सोच का हर किसी पर आता कहर है,
जीवन का सुखद पड़ाव भीड़ की बस्ती में मेरा घर है
लम्बी सी सड़क के किनारे मेरा एक छोटा सा घर है
-डॉ अवंतिका
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32 thoughts on “Hindi Poem on Home- छोटा सा घर”

  1. great one dear….. ये तो कुछ पंक्तियों से शुरूआत की है,,,, कविताएँ तो अभी लिखना भी और पढना भी… बाकी है……. keep it up…… 👍

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  2. Nice thoughts compiled in an innovative manner to create
    A live pic in the mind of many……….. Great words selected for the progression to modulate integration of unspoken thoughts in an attractive manner……. As poetry is the art of making a bridal makeup……. As it depends
    Upon the beautician how she decorates a living body……

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  3. जो लौटकर जिदंगी कुछ करने को कहेगी,
    कलम मेरी शब्दों की आहट से बहेगी,
    ये जो हम सबका हिन्दुस्तान है ना तब और महकेगा,
    तेरी मेरी सबकी जुबां हिन्दी कहेगी।।
    Thanks to all of u

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    1. आज भारत के ग्रामीण क्षेत्र के लगभग बीस फ़ीसदी लोंगों को अपना घर खोने का डर है,लगता है मानों जैसे तुमने उनके जज्बात छाप दिए हों ।।।।।। बहुत दिलचस्प, अति सुंदर कविता,मुजे बहूत पसंद आई।

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