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चले जाएंगे अखिर वादे करके चले जाएंगे
अब नहीं लौट के आएँगे। चले जाएंगे…
छोटी सी तकरार कर चले जाएंगे
मेरे ऊपर ‘बईमान’ का दाग लगा। चले जाएंगे…
सांस के साथ सांस लेने वाले चले जाएंगे
‘संदीप’ रोग हिज्र का लगा।
चले जाएंगे… छोड़ सात समुद्र से पार चले जाएंगे
मेरे ‘पर’ काट, जख्मी कर। चले जाएंगे…
मेरे पिछे से वार कर चले जाएंगे ना लोटने का वादा कर। चले जाएंगे…
मेरे पीछे मत आना, यह ‘कह’ चले जाएंगे
चारों तरफ से रास्ते बंद कर। चले जाएंगे…
जान मेरी से जान निकल, चले जाएंगे
शहद सा मिठा मैं, कड़वा कर। चले जाएंगे…
मैं मतलबी हूं, ये समझा, चले जाएंगे
मेरी हड्डियों को पिघला। चले जाएंगे…
मुझे अधजला हुआ छोड़, चले जाएंगे
अपना बना, पराया कर। चले जाएंगे…
सच्चा ‘संत’ कहे – कोई किसी का इंतजार न करे।
चले जाएंगे…चले जाएंगे…!!

-संदीप कुमार नर

Chale jayenge akhir vade karke chale jayenge
Ab nahi laut ke aayege chale jayenge
Choti si takrar kar chale jayenge
Mere upr bemaan ka daag lga chale jayenge
Sans ke sath sans lene waale chale jayenge
‘Sandeep’ raug hijr ka laga chale jayenge
Chod saat smundar se paar chale jayege
Mere ‘par’ kaat, jhkami kar chale jayenge
Mere piche se baar kar chale jayenge
Na lautne ka vada kar chale jayenge
Mere piche mat aana, yeh keh chale jayenge
Charon taraf se raste band kar chale jayenge
Chale jayenge jaan meri se jaan nikal,chale jayenge
Shad sa mitha main, kadwa kar chale jayenge
Main matlabi hoon, ye samjha, chale jayenge
Meri hadiyon ko pighla chale jayenge.
Mujhe adhjala hua chod chale jayenge
Apna bna paraya kar chale jayenge..
Sucha sant kahe- koi kisi ka intzar na kare
Chale jayenge chale jayenge

– Sandeep Kumar Nar

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