Tags

, , , , , , , , ,


कितनी मासूम है तेरी एक वो आवाज़
जी चाहता है मासूमियत से सुनती जाऊँ तेरी वो आवाज़
तेरी आवाज़ में आग महसूस किया है मैंने
जो लाखों बेजान दिलों में एक आस जगा देगी
तेरी आवाज़ में वो चिंगारी है जो निकलती तो मासूमियत से है
पर एक तबदील हो जाती है जब मैंने तेरी आवाज़ में
वो जज्वा महसूस किया तो समझा ये नारी में ही है और नारी में ही हो सकता है
तू तैयार है इसमें भी तेरी मासूमियत झलकती है
जिस दरंदगी से उन दरिन्दो ने तेरी मासूमियत बहरी आवाज़ को कुचल कर तार तार किया
देश की एक बेटी का नहीं नारी के हर रूप का बलत्कार हुआ है
मासूम सी थी इस की सिर्फ एक खाव्हिश ज़िन्दगी जीने की छिन ली
उन दरिंदो उसकी वो आवाज़ जो उसकी ताकत थी
जो लाखों दिलों पे राज़ करने के लिये पागल थी
ये हर उसकी लड़की के लिये है जिसकी आवाज़ को हमेशा दबाया जाता है

नेहा

 

Kitni masoom hai teri ek wo awaz
Jee chahta h masoomiyat se sunti jaau teri wo awaz
Teri awaz me wo aag mehsus kiya hai maine
Jo laakho bejaan dilo me ek aas jaga degi
Teri awaz me wo chingari hai Jo nikalti to masumiyat se hai
Par ek jwalamukhi me tabdeel ho jaati hai Jb maine teri awaz me
wo jazbaa mehsoos kiya to samjha ye naari me hi hai or narri me hi ho skta hai
Tu tayar hai es me bhi teri masumiyat jahlakti hai
jis darindagi se un darindon ne teri masoomiyat bheri
Awaz ko kuchal kar ke taar taar kiya..
Desh ki ek beti ka nhi naari ke har roop ka balatkar hua hai
Masoom si thi es ki sirf ek khawhish zindgi Jeene ki chhin li
Un darindo uski wo awaz Jo uski taakat thi
Jo laakho dilon pe raaj karne ke liye pagal thi
Ye har uski ladki ke liye hai jiski awaz ko hmesha dbaaya jaata hai

Neha

 

Advertisements