Hindi Poem on Love Conflicts-Badlaav-रिश्तों में टकराव पर कविता

बदलाव

चलो मान लिया ना मैं सही

फिर भी मन में है शोर कोई

ना समझ रहा मुझ को कोई

बस थोप रहे की तू ना सही

गलती क्या है जो गलत हूं मैं

अब तक न थी अब बुरी हूं मैं

चलो मान लिया मैं सही नही

पर यूं बतलाओ क्या तुम हो सही??

मुझको क्यों लगते बदले तुम

मैं तो हूं वही फिर क्या बदलाव आके गए

मन में क्यों न झाक सके

हां रूठी हूं इस बात से मैं

हां पहली बार ही क्रुद्ध हुई क्या रूठने से मैं बुरी बनी??

तुम त्याग अहम अपना,

अपने में भी तो ढूंढो खामी

यूं रूठी मुझको बोल गए

तुम नहीं रही हो पहली सी!!

-वंशिका

Badlav

Chalo man liya na mai sahi

Fir bhi man me hai shor koi

Na samajh raha mujhko koi

Bas thop rahe ki tu na sahi

Galti kya hai jo galat hu me

Ab tak na thi ab buri hu me

Chalo man liya mai sahi nhi

Par tu batlao kya tum ho sahi??

Mujhko kyo lagte badle tum

Mai to hun vahi

Fir kya badlav aank gye

Man me kyu na jhank sake

Ha roothi hu is bat se mai

Ha pahli bar hi krush hui

Kya roothne se mai buri bani

Tum tyag ahem apna,

apne me bhi to dhundo khaami

Yu roothi mujhko bol gye

tum nhi rhi ho phli si

-Vanshika

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