Hindi Poem on Nature

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Hindi Poem on Flower – हे फूल

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मिट्टी से जनमा हे फूल तू कहाँ जा रहा है
हे मित्र ,मै पृभु के चरणो मे सजने जा रहा हूँ
कभी मै किसी सुन्दरी के गजरे मे सजने जा रहा हूँ
तो कभी मै किसी नेता आ सत्कार करने जा रहा हूँ
तो कभी मृत्युशैया मे षृद़ान्जली बनने जा रहा हूँ
मेरा जीवन तो यही है मित्र
मिट्टी  से जनमा हूँ और मिट्टी मे ही मिलने जा रहा हूँ।

-आरती रस्तोगी 

Mitti se janma hei phool tu khan ja rha hai
Hei miter main parbhu k chrno me sajne ja rha hoon
Kabhi main kisi sundri ke gazrei mein sajne ja rha hoon
To kabhi main kisi neta aa satkaar krne ja rha hoon
To kabhi mirtyushya mein prsadnjali banne ja rha hoon
Mera jivan t yhi hai mitar
Mitti se jnma hoon aur mitti mein hi milne ja rha hoon

-Aarti Rastogi

Hindi Poem on Water- मैं पानी की बूँद हूँ छोटी

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मैं पानी की बूँद हूँ छोटी,
मैं तेरी प्यास बुझाऊँ।
पी लेगा यदि तू मुझको ,
मैं तुझको तृप्त कराऊँ।
मैं छोटी सी बूँद हूँ,
फ़िर क्यों न पहचाने?
तू जाने न सही मग़र,
किस्मत मेरी ऊपर वाला जाने।
मैं पानी की बूँद हूँ छोटी,
फ़िर क्यों खोटी मुझको माने?
भटकता फ़िर रहा है तू,
और क्यों अनजान है तू?
तेरी महिमा मैं तो समझूँ न,
जाने तो ऊपर वाला जाने।
मैं पानी की तुच्छ बूँद हूँ,
फ़िर मेरी महत्ता क्यों न जाने?
ज़ीवन रूपी इस पथ पर ,
तुझे अकेले चलना है।
मैं भी चलूँ तेरे साथ -साथ,
और मुझे क्या करना है?
तू पी अपनी प्यास बुझा,
हमें ग़म नहीं है कुछ भी।
काम ही मेरा और क्या है ?,
केवल मुझे सिमट कर चलना है।
अस्तित्व ही यह मेरा है,
मुझे तुझमें रह जाना है।
मैं पानी की बूँद हूँ छोटी,
फ़िर हालातों को क्यों न तुम पहचानो?
तेरे सहार मुझसे है,
और मेरा सहारा तुझसे।
तू तो मुझ पर आश्रित है,
और सब मेरे दीवाने।
तू मर जाएगा मेरे बिन ,
फ़िर क्यों न मुझको पहचाने?
मैं पानी की बूँद हूँ छोटी,
फ़िर क्यों तुम व्यर्थ बितराओ?
बूँद -बूँद से घड़ा भरा है,
क्यों तुम ऐसा न कर पाओ?
यदि रखोगे सुरक्षित तुम मुझको,
मैं तो सागर बन जाऊँ।
अग़र करोगे न तुम ऐसा,
तो मैं तुच्छ बूँद भी न रह पाऊँ।
मैं पानी की बूँद हूँ छोटी,
मैं तेरी प्यास बुझाऊँ।
-सर्वेश कुमार मारुत

Main pani ki boond hoon choti
Main teri pyas bhujau
Pi lega yadi tu mujko
Main tujko trapat kraaun
Main choti si boond hoon
Fir kyon na phuchane
Tu jane na shi magar
Kismat meri upr wala jane
Main pani ki boond hoon choti
Fir kyon khoti mujko mane
Bhatkta fir rha hai tu
Aur kyon anjaan hai tu
Teri mahima main to smjhu na
Jane to upr wala jana
Main pani ki tuchh boond hoon
Fir meri mhanta kyon na jane
Jivan rupi es path par
Tuje akele chlna hai
Main bhi chalu tere sath sath
Aur muje kya karna hai
Tu pi apni pyas bhujha
Hme gam nai hai kuch bhi
Kaam hi mera aur kya hai
Kewal mujse simat kr chalna
Aastitav hi mera hai
Muje tujh me rhna hai
Main pani ki boond hu choti
Fir halaton ko kyon n tum phuchano
Tere shara h mujse
Mera shara h tujhse
To to mujh pr aarshit h
Aur sab mere diwane
Tu mar jayega mere bin
Fir kyon na mujko phuchane
Main ki boond hu choti
Fir kyon tum vyarth bitaro
Boond boond se ghda bhra hai
Kyon tum esa na kr pao
Yadi rkho ge surashit tum mujhko
Main to sagar ban jau
Agr kroge na tum esa
To main tuchh boond bhi na rh pau
Main pani ki boond hu choti
Main teri pyas bujhau

– Servesh Kumar Marut