Category Archives: Abstract Poems

Hindi Poem on Life -Zindagi Tere Chehre Hazaar


 

still-life-851328_960_720.jpgए ज़िन्दगी तेरे चेहरे हज़ार
हंसाएं कभी तो कभी रुलाये ज़ार ज़ार
समझना तुझे आसान नहीं,
कहीं होती है रुक्सत,
तो कहीं लाती है बहार
दिखाती है कभी वीरानियों के आसार,
तूफानों से भी कभी करती है पार
दे देती है कभी अश्क़ बेशुमार,
लूटती है कभी प्यार ही प्यार
कभी रह जाती हैं हसरते कई,
कहाँ आता है फिर ज़िन्दगी में खुमार.
चलाते रहते हैं कश्ती,
की उतरेंगे पार
ले जाती है कहीं और
हमें उमंगों की धार.
हो जाता है खड़ा कभी बेडा मंझधार,
और खोलने को नहीं मिलता पटवार.
ए ज़िन्दगी तेरे चेहरे हज़ार
बीते पलों पर न था इख़्तियार,
आने वाले पलों का रहता इंतज़ार .
बीत जाता है जीवन, हो जैसी बहार,
नहीं आता है कभी जीवन में करार.
रहे कभी तमन्नाओं से दिल गुलज़ार,
वह खिलाये फूल फिर बेशुमार.
यह चाहतों राहतों का है बाजार,
फिर भी चैन नहीं होता शुमार.
बहारों का हर पल रहता है इंतज़ार,
पलों ही पलों में खो जाता है संसार
ए ज़िन्दगी तेरे चेहरे
कभी हंसाएं तो कभी रुलाये ज़ार ज़ार

-किरण गुलाटी

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Hindi Poem on Life – Jeevan Kram


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जीवन क्रम
हर पल हमें कुछ
सिखाती है ज़िन्दगी
भेद हर रिश्ते का
बताती है ज़िन्दगी
फँस माया के जाल में
रहते मद से चूर है हम
खुल जाती है आँख कभी तो
असलियत कई बार
दिखती है ज़िन्दगी
नहीं ज़रूरी
हर रास्ता हो गुलज़ार
कभी काँटों की चुभन भी
महसूस कराती है ज़िन्दगी
गहरा है रिश्ता बहुत
फूल और काँटों का
मेल उनका भी कभी
दर्शाती है ज़िन्दगी
जीवन के हर पहलू से
वाकिफ कराती है ज़िन्दगी
भूले रहते हैं
दिन और रातों में हम
सच्चाई जीवन की
बताती है ज़िन्दगी
सामना तूफानों से हो जाता है अक्सर
बहारों और फिज़ाओं का ही
नाम है ज़िन्दगी
फ़िज़ाएं एक सी रहती नहीं
कभी धुप तो
कभी छाँव है ज़िन्दगी
हसीं मंज़ाओं में कभी
खो जाते हैं हम
कभी पतझड़ का मौसम भी
लाती है ज़िन्दगी
इस जीवन में
हर चीज़ के पहलु हैं दो
कभी रुलाती
तो कभी हंसाती है ज़िन्दगी
समझ पाएं कभी
जो जीवन क्रम को हम
तो बस आने और जाने का
नाम है ज़िन्दगी
-किरण गुलाटी

Shaadi – Hindi Poem on Marriage


शादीhappy-wedding
सोच सोच के किसी ने सोचा
कि शादी का क्या मतलब होगा?
बहुत सोचा पर कुछ ना सुझा
फिर कागज़ पे ये शब्द लिखा
और उसको किया जब उल्टा फ़ूलटा
तो अंत में ये नतीजा निकला
कि मत कहो इसे बर्बादी
क्योंकि इसी से तो है ये आबादी
जैसे दिशाहीन नाव को राह दिखाता एक मांझी
वैसे ही जीवन रुपी इस नाव को जो कीनारे पे है लाती
असल में यही तो है शादी
-अर्पन शाह

Hindi Poem on Night-ये रात


raat

लायी है संग तारों की बारात
ये रात
जब छाया है घना अंधेरा
ये रात
जब सो चुके हैं सब लोग
ये रात
जब जाग रहे हैं कुछ लोग
ये रात
जब जलता है टिमटिमाता दिया
ये रात
जब होता है शांत समां
ये रात
जब कोई गीत गुनगुनाता है
ये रात
जब कोई किसी की याद में आंसू बहाता है
ये रात
जो लाती है नयी सुबह
ये रात
जो है जीत की तैयारी
ये रात
जब है सबको नींद प्यारी
ये रात
जब चाँद का होता है पहरा
ये रात
जब महकता है रजनीगंधा
ये रात
जब करें ह़म तुम बात
ये रात
जो आयेगी ना कल फिर
ये रात
जो निकल गयी कुछ बातों में
ये रात
सो जाओ कल करेंगे अब बाकी बात
-अनुष्का सूरी

 

Poem in Hindi on Philosophy-आवाज़ों से नहीं


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आवाज़ों से नहीं इंसानों से बात करता हूँ
आदमी हूँ आदमी से प्यार करता हूँ
खूब रहा मैं बनकर अजनबी खुद से
आज दिल-लगी करने की गुज़ारिश करता हूँ
ये ना समझो हमदर्द बहुत हैं इस शहर में
मैं आज भी दुश्मनों का इंतज़ार करता हूँ
जो पीते हैं नशीले जाम उनकी वो जाने
मैं तो आज भी गम का ज़हर पिया करता हूँ
ना जाने कब हो जाये खुदा का रहमों करम मुझ पर
दिन रात तुम्हारा सजदा किया करता हूँ
-अनुष्का सूरी