Category Archives: Abstract Poems

Hindi Poem on Girl’s Life after Marriage-मायका


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आंगन वही है
बचपन कहीं खो गया
घर वही है
बस मायका खो गया
बगियाँ वही है
वो मेरा सुमन खो गया
अपने वही है
अपनापन कहीं खो गया
आना वही जाना वही
बस वो इंतज़ार खो गया
जो मेरा,सिर्फ मेरा था
वो किसी और का हो गया
बचपन की गलियों में
सबकुछ मेहमाँ सा हो गया
रूठना, हक़ जताना
अब ये सब अतीत हो गया
बट गया हिस्सों में
प्यार वीर का खो गया
माँ की रसोई में
माँ का हक़ खो गया
झूलती तख्ती नाम की
मालिक का रोब खो गया
परिवर्तन की आंधी में
वास्तविक कही खो गया
मिलता ब्याज पे ब्याज
वो मूलधन कही खो गया
कोपल हुआ करते थे
पीले पत्तो सा अस्तित्त्व हो गया
-किरण पांचाल
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Hindi Poem on Water – जल पर कविता


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जल ही है जीवन
जल ही है कारण
जल में ही पृथ्वी समाई
जल में ही जीवन की सच्चाई
जल के बिन मीन का ना जीवन
जल के बिन प्यासा जल उपवन
जल से ही होती है खेती खलियारी
जल से ही ही बनी है देह हमारी
जल ही है जो बरसता बन सावन
जल ही है जो देता है बंजर को जीवन
जल ही है पावन
जल ही है मंगल
जल ही है जन धन
जल ही है जन धन

– अनुष्का सूरी

Hindi Poem-आज का कलियुग


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आज का यह युग
जिसे कहते हम कलियुग
गांधी जैसे महात्मा
कसाब जैसे शैतान का युग
मानते है लड़की को देवी जहाँ
फिर भी गर्भ मे उनकी हत्या करने वालों का युग
करते है रात रात भर देवी जागरण
ऐसे कुछ भक्तों और दिल्ली के उन दरिंदो युग
नोकरी से पहले खाते ईमानदारी की कसमें
फिर भी १०० में ९० बेईमानों का युग
यहाँ अमीर कम खाता है
क्योंकि सुना है ज्यादा खाने से पेट बढ़ जाता है
सबका पेट भरने की खातिर जो किसान पसीना बहाता है
आखिर वही किसान भूख से मर जाता है
ये है बलवानों का युग,
राजतंत्र के पहलवानों का युग
चुनाव से पहले जो घर आते उन सज्जनों का युग,
चुनाव के बाद जो भूल जाते उन दुर्जनों का युग
यहाँ अमीर गरीब नहीं गरीबों को हटाते हैं
उनका कहना है गरबों के झोपड़े उनके महलों पे दाग लगाते हैं
एक तरफ ये ए.सी मे आराम फरमाते हैं
दूसरी तरफ वही गरीब लोग गर्मी से फड़फड़ाते हैं
राम नहीं,रहीम नहीं,ना समय अब कबीर का
भूल गए सब दोहे,वक़्त अब हनी सिंह का
भूल गए अब सब मंत्र
पूजा करता खुद अब संगीत यंत्र
हे भगवन आया केसा युग है
मित्रों जरा संभल के, घोर कलियुग है

-नितेश गौर

Hindi Poem for Indian Music -संगीत के सात स्वर


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आओ मिलकर सीखें आज
संगीत के सात स्वर सरताज
पहला स्वर है सा
इस से शुरू होता है साज़
दूसरा स्वर है रे
इस से बढ़ते हैं आगे आज
तीसरा स्वर है ग
इस से होता है गाना आगाज़
चौथा स्वर है म
इस से बढ़ता है आगे साज़
पांचवा स्वर है प
इस से आगे ऊंचा रियाज़
छठा स्वर है ध
इसे गायें बेहतर आज
सातवा स्वर है नि
इस पर खत्म हुआ स्वरों का राज़

-अनुष्का सूरी

Patriotic Hindi Poem- भारत


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है धरम भूमि ये भारत की
जहाँ वीर जवान सर झुकाते हैं
कितना खून पसीना बहाकर
आज हम आज़ादी का दिन  मनाते हैं
जिनके माथे जनम भूमि का तिलक को
वो वीर भारत माता की शान बन जाते हैं
जिसने दुश्मनों को मार गिराया
आज उस वीर को भारत ने सलाम किया
जिस भारत ने दिया हमें जनम
जहाँ से अपनी पहचान बनी
आज उसी  संविधान को
हम बार बार नमन  करते हैं
पूरे देश में आज हम
गणतंत्र दिवस मनाते हैं
जय हिन्द
जय भारत
जय जवान
जय किसान
– संगीता श्रीवास्तव