Category Archives: Hindi Poems on Food

Hindi Poem on Roti – रोटी

हूँ सबकी चाहत Roti

हूँ सबकी ज़रूरत

सबका पेट भरती हूँ

हाँ मैं रोटी हूँ

गोल गोल है मेरा आकर

सब्जी के साथ बनाऊँ पौष्टिक आहार

चाहे हो बच्चा, बूढ़ा या हो जवान

रोटी खाकर ही आती हा तन में जान

Hindi Poem On Potato- मैं आलू हूँ

दिखने में भूरा हूँ Potato
शकल से भालू हूँ
हाँ मैं आलू हूँ
मुझे समोसे में है भरते
कभी कट्लेट बना के तलते
कभी मैं हूँ बैंगन का साथी
कभी मटर का साथ निभाता
कोई मुझे उबाल के खुश है
कोई है तलकर फ्रेंच फ्राइस बनाता
मेरे साथ पूरी कचौड़ी खाओ
मेरे परांठे लस्सी के साथ चबाओ
सब सब्जियों के साथ निभालूँ
हाँ मैं हूँ वही आलू