Hindi Poems on Issues and Concerns

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Hindi Poem Expressing Pain of Peshawar Attack

लूट के ज़िंदगी वो मासूमों की ज़िंदगी को तार तार कर गये,
हज़ारों माँ-बापों को रुला के वो ज़िंदगी बेज़ार कर गये,
हर शाम अब तन्हा है ना घर में अब कोई शोर है, पसरी है वीरानियाँ, हर आंख में आँसुओं का ज़ोर है,
कभी देखते उस माँ का दिल जो अब कभी ना मुस्कुराएगा, अब ना किसी को कोई पापा कहके बुलायेगा,
रोती रहेगी अब हर आंख जब याद उनकी आयेगी, शायद अब उनकी दुनिया फिर ना मुस्कुराएगी,
इंसानियत के दुश्मनों ने दुनिया को ज़ार ज़ार कर दिया, बहके खून मासूमों का इंसानियत को तार तार कर दिया,
कौमों को जो दिखाते हैं धर्म की एक झूठी दुनिया उनमें ना खुदा का खौफ है, इंसानियत को तबाह करने का ये चला कैसा दौर है,
हर मुल्क हर जामूरीयत ये जान ले इंसानियत के दुश्मन तो सिर्फ दुश्मन हैं, जिनको मिटाके फिर से मुस्कुराना है,
ज़िंदगी को कहना है, हर आतंकी से जंग जीत जाना है,
फिर ना झेले कोई वंश ये पेशावॉर सा, फिर ना सूनी हो गोद किसी की, ना वीराना सा आंगन हो, यही खुदा से इल्तजा है, यही हर नरम आंख का कहना है|
-गौरव

Hindi poem on sickness-मैं बीमार हूँ

आज कल कुछ तकलीफ में हूँ
हाँ मैं बीमार हूँ
काम कुछ हो नहीं पाता
सर भी है थोड़ा थोड़ा चकराता
खाना ठीक से खाया नहीं जाता
बाज़ार तक भी जाया नहीं जाता
बिस्तर पर लेटे रहने को
डाक्टर ने है कहा
खानी पड़ती है
रोज़ कड़वी कड़वी दवा
मेरी हालत को देख कर
याद सदा यह रखना
खाओ पियो स्वस्थ रहो
और हर बीमारी से बचना