अख़बार पर कविता

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Hindi Poem on News- आज फिर मैंने अख़बार पढ़ी

आज फिर मैंने अख़बार पढ़ी
थोड़ी सी तकलीफ थोड़ी उदासी बढ़ी
आज फिर मैंने अख़बार पढ़ी
कहीं एक नन्हा इनक्यूबेटर में जल कर स्वाहा हुआ
कहीं स्कूल कहीं दुकान में बच्चियों संग अनचाहा हुआ
किसी बहु ने अपनी सास की ले ली जान
किसी आतंकवादी के हाथ वीर हुआ कुर्बान
मैंने खुद से आखिर किया अंतिम इकरार
इतने दिन बिना अख़बार कितने थे मज़ेदार
अब मैं फिर सोचती हूँ खड़ी खड़ी
अफ़सोस मैंने आज क्यों अखबार पढ़ी
-अनुष्का सूरी

(यह कविता दिनांक २ ८ सितम्बर, २०१७ की अखबार को पढ़कर रची गयी है)

Hindi Poem on Newspaper- Main Hoon Akhbar

news

मैं हूँ अख़बार
भाई मैं हूँ अख़बार
पढ़लो मुझे सुबह सुबह
तो पता लगे समाचार
मैं हूँ अख़बार
भाई मैं हूँ अख़बार
जब मैं पुरानी हो जाती
तब भी मेरा है कारोबार
मैं हूँ अख़बार
भाई मैं हूँ अख़बार
मुझपे  भेल पूरी सजती
चना जोर गर्म मुझमें बिकती
मैं हूँ अख़बार
भाई  मैं  हूँ अख़बार
मुझको पढ़ना  है अगर
तो बनो पहले साक्षर
मैं हूँ अख़बार
भाई मैं हूँ अख़बार
– अनुष्का सूरी
 
 
 
Main hoon akhbar
Bhai main hoon akhbar
Padh lo mujhe subah subah
To pata  lagey samachar
Main hoon akhbar
Bhai main hoon akhbar
Jab main purani ho jati
Tab bhi mera hai karobaar
Main hoon akhbar
Bhai main hoon akhbar
Mujhpe bhel puri sajti
Chana jor garam mujhmein bikti
Main hoon akhbar
Bhai main hoon akhbar
Mujhko padhna hai agar
To bano pehle sakshar
Main hoon akhbar
Bhai main hoon akhbar
 
– Anushka Suri