Tag Archives: आत्मविश्वास पर कविता

Hindi Poem on Courage-Sahas


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साहस
जीने को मिल जाये सहारा,
जीवन में कोई कभी न हारा।
बन जाता है, संवर जाता है,
प्यारा न्यारा वक्त हमारा।।
हाथ बढ़े तो बढ़ गये साथ किसी के।
जानो ज़रा,समझो जग मे जज़्बात किसी के।।
बढ़ते जाएँ हम आगे,
आगे से मुश्किल अपने भागे।
जान गए,पहचान गये
दिल में अपने अरमान जागे।।
-संजय

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Hindi Poem on Motivation-Chalta Chal


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चलता चल

ग़म छूपा हँसता चल
खुद को ही छलता चल ।

कदमों में है मंजिल
बस उम्मीदें करता चल ।

राहें तो हैं मुश्किल
हिम्मत कर बढ़ता चल ।

रो मत कायर बनकर
आँसू पी लड़ता चल ।

रौशन कर दिल की लौ
अन्दर से जलता चल ।
-अजय प्रसाद

टी जी टी इंग्लिश
डीऐवी पीएस पीजीसी बिहारशरीफ़
नालंदा, बिहार-८०३२१६

Hindi Poems on Motivation-तू लड़ तो सही मेरे यार


तू लड़ तो सही मेरे यार
तू होगा सफल मेरे यार
खुद पर भरोसा रख
तू होगा सफल मेरे यार
ये जुनून जो बीतर है,
उसको बहार तो ला मेरे यार
सब कुछ फतेह करेगा तू
बस लड़ तो सही मेरे यार
किस बात का डर है यार
तू भाहर तो निकल यार
तू फौलादी सीना है
सब को दिखा दे यार
तू लड़ तो सही मेरे यार
अब पीछे नहीं जाना है
बस आगे बढ़ना है
मंजिल पाकर अब वापस आना है यार
बस तू लड़ तो सही मेरे यार

-अनुभव मिश्रा

Tu lad to sahi mere yaar
Tu hoga safal mere yaar
Khud pa bharosa rakh
Tu hoga safal mere yaar
Ye janoon jo bhitar hai
Usko bahar to laa mere yaar
Sab kuch fatah karega tu
Bas lad to sahi mere yaar
Kis baat ka dar hai yaar
Tu bahar to nikal yaar
Tu fauladi sina hai
Sab ko dikha de yaar
Tu lad to sahi mere yaar
Ab piche nahi jana hai
Bas aage badna hai
Manjil pa kar ab bapis aana hai yaar
Bas u lad to sahi mere yaar

-Anubhav Mishra

Hindi Poem On Confidence – मैं बातें बनाता नहीं


फिसल जाती जुबान, निकल जाते लफ्ज़।
ह्रदय के किसी छोर से।
मैं बातें बनाता नहीं, बस बन जाती है।

मिट्टी से सृजित काया इसी में मिल जाएगी।
तो अहं कैसा,किस बात का।
मैं बातें बनाता नहीं, बस बन जाती है।

ना बड़ा,ना श्रेष्ठ, अभी तो अबोध हूँ।
बालक हूँ,ह्रदय भी बालक तुच्छ-सा,र्निविकार।
मैं बातें बनाता नहीं, बस बन जाती है।

सिध्दांत से अनभिज्ञ हूँ.
अन्तःमन की हर व्यथा व्यक्त कर देता हूँ।
शब्द जरुर कम होँगे, मगर भाव नहीं।
मैं बातें बनाता नहीं, बस बन जाती है।

जीवन ने इम्तिहान लिया,
बदले में अनुभव दिया।
उसी अनुभव के सहारे, चल पडा हूँ।
मैं बातें बनाता नहीं, बस बन जाती है।

-हितेश कुमार गर्ग

Fisal jati hai zubaan, nikal jati hai lafz
Hriday ke kisi chhor se
Main baatein banata nahi, bas ban jati hai

Mitti se sarjit kaya esi mein mil jayegi
To ahan kesa kis baat ka
Main baatein banata nahi, bas ban jati hai

Na bada, na shreshth, abhi to abodh hoon
Balak hoon hriday bhi balak tuchh-sa nirvikaar
Main baatein banata nahi, bas ban jati hai

Sidhant se anbhigy hoon
Anat:man ki har vyatha vyakat kar deta hoon
Shabad jarur kam honge magar bhav nahi
Main baatein banata nahi, bas ban jati hai

Jivan ne imtihaan liya
Badle me anubhav diya
Usi anubhav ke share chal pda hoon
Main baatein banata nahi, bas ban jati hai

-Hitesh Kumar Garg