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Hindi Poem on Identity Crisis-Kaun Hoon Main


कौन हूँ मैं
आग हूँ आगाज़ हूँ खुद की गलती छुपाने वाला राज़ हूँ
झूठा हूँ फ़रेबी हूँ कल से डरने वाला आज हूँ
ज़िंदा हूँ मैं ज़िन्दगी में खुद में ही बेतहशा हूँ
सपना हूँ मैं आगे का आज का ज़िंदा लाश हूँ
लम्हा हूँ में बीते कल का आज का बुरा ख्वाब हूँ
गर्मी की धुप सर्दी की छाँव अपने मंज़िल के विपरीत पाव हूँ मैं
उत्तर हूँ मैं आगे का आज का प्रश्न चिन्ह हूँ
धीमा हूँ ज़िन्दगी मैं कल के धावक के लिए तैयार हूँ
गलती हूँ मैं पीछे का आज का नया इंसान हूँ
आग हूँ आगाज़ हूँ खुद की गलती मिटाने वाला आज हूँ !

-बबलू नाथ

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