दशहरा पर कविता

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Hindi Poem on Story of Dussehra – रावण दहन

 

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नौ सर वाला रावण
आज है उसका दहन
रावण ने किया सीता हरण
किया सीता से विवाह प्रयोजन
राम-लक्ष्मण हए अचंभित
सर काटें और लगे सर वापिस
विभीषण बना राम हमराज़
बताया नाभि का राज़
राम बाण ने हरे प्राण
बोलो जय सिया राम
रावण था बड़ा विद्वान
दिया अंतिम प्रवचन महान
अच्छे काज को करो तुरंत
बुरा काज को टालो कल पर
इन्ही अनमोल वचन का ध्यान
करेगा जो बनेगा महान

-अनुष्का सूरी