Tag Archives: दिल छू लेने वाली कविता

Hindi Poems on Emotions-अनजान


पक्के मकान और कच्ची ईंटे ,
सच्चे मोती और झूठे  बोल ,
ख्वाहिशों के धागे को दिखावे की सुई से सीकर चल रहे है।
घर शमशान की राख पर नहीं बनना चाहिए ,
मगर उसी मिट्ठी के बन रहे है।
बड़े आँगन की चाह में झोपड़ी उखाड़ी ,
धूप से परदों की ओंठ में छिप रहे है।
चला जा रहा है कारवाँ रामायण का पाठ करवा कर ,
मगर खुद अपने रावण के दहन से बच रहे है।

-प्रभ पूरी

Pakke Makan Or Kacchi Inte ,
Sacche Moti Or Juthe Bol ,
Khawahiso Ke Dhage Ko Dikhave Ki Sui Se Sikar Chal Rhe Hai …
Ghar Samsaan Ki Raakh Par Nhi Banna Chahiye ,
Magar Usi Mitthi Ke Ban Rhe Hai .
Bade Aagan Ki Chah me Jopadi Ukhaadi ,
Dhoop Se Pardo ki Onth me Chip Rhe Hai .
Chala Ja Rha Hai Karwa Ramayan Ka Paath Karwa Kar ,
Magar Khud Apne Ravan Ke Dehan Se Bach Rhe Hai ..

-Prabh Purii

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Hindi Poems on Love-अभी तो मिली है बस


चली है हवा इश्क़ की, आंधी-तूफान वाकी हैं, छा गए हैं
बादल दिलों पर, बरसात अभी वाकी है,
मुश्कुरा लिया देखकर उनको युहीं, अभी उनका मुश्कुराना वाकी है,
अभी तो मिली है बस..नज़र से नज़र, जान-पहचान अभी वाकी है।
होने लगी है गुफ्तगू ख्वावों में, तलाश अभी वाकी हैं, दिखने लगा है
चेहरा ख्वावों में उनका, ख्वाव फिर भी वाकी हैं,
आज देखा उन्होंने कातिल निगाहों से, मगर मुश्कुराना अभी वाकी है,
अभी तो मिली है बस..नज़र से नज़र, जान-पहचान अभी वाकी है।
आज नहीं देखा है चेहरा ख्वावों में उनका, आश अभी वाकी है,
गुज़र चूका है दिन तलाश में उनके, शाम अभी वाकी है, गुज़र चूका है
समय अब उनके आने का, इंतज़ार फिर भी वाकी है, अभी तो मिली है
बस..नज़र से नज़र, जान-पहचान अभी वाकी है। हो गई है
मुलाकात फर्श पर गिरी उनकी किताबों से, मगर उनसे अभी वाकी है,
मिल गया है वहाना मुकम्मल दोस्ती करने का उनसे, बस..
उनका मुश्कुराना वाकी है,कह दिया है आज
हंसकर उन्होंने पागल मुझको, बस.. और पागलपन वाकी है,
अभी तो मिली है बस..नज़र से नज़र, जान-पहचान अभी वाकी है।

– अतुल कुमार

Chali hai hwa ishq ki, aandhi-tufan waki hai, chha gye hai
Badal dilon par, barsaatabhi waki hai,
Mushkura lia dekhkar unko yuhin,
Abhi unka mushkurana waki hai,
Abhi to mili hai bss…nazar se nazar, jaan-pehchan abhi waki hai.
Hone lagi hai guftagu khwawon me, talash abhi waki hai, dikhne lga hai
Chehra khwawon me unka, khwaw fir bhi waki hai,
Aaj dekha unhone quatil nigahon se, magar mushkurana abhi waki hai,
Abhi to mili hai bss…nazar se nazar, jaan-pehchan abhi waki hai.
Aaj nahi dekha hai chehra khwawon me unka, aash abhi waki hai,
Guzar chuka hai din talash me unke, sham abhi waki hai, guzar chuka hai
Samay ab unke aane ka, intezar fir bhi waki hai, abhi to mili hai
Bss…nazar se nazar, jaan-pehchan abhi waki hai. Ho gai hai
Mulakat farsh par giri unki kitawon se, magar unse abhi waki hai,
Mil gya hai bahana mukammal dosti karne ka unse, bss..
Unka mushkurana waki hai, keh dia hai aaj
Hunskar unhone pagal mujhko, bss…or pagalpan waki hai,
Abhi to mili hai bss…nazar se nazar, jaan-pehchan abhi waki hai. –

-Atul Kumar

Hindi Poems on Emotions- कायर जिसे समझा


कायर जिसे समझा जाँबाज निकला
उसका अलग ही अंदाज निकला

बेचता रहा जो उम्र भर दवाइयाँ
बुढ़ापे में दवा को मोहताज निकला

ईमानदारी का ढिंढोरा पीटने वाला
खुद बेईमानों का सरताज निकला

जिसे हमने जहर समझकर फेंक दिया
हमारी बीमारी का इलाज निकला

मारे जाओगे अगर सत्ता के विरुद्ध
मुख से एक भी अल्फाज निकला

गैर को बदनाम मत कर ‘राहुल’
अपना ही अक्सर दगावाज निकला

  • राहुल रेड

Hindi Poems on Emotions- छोड़ आए


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बहुत पुराना घर छोड़ आए,
हम उन आँखों को तन्हा अकेला छोड़ आए,
गलियों से निकले कूचे छोड़ आए,
आँखों से निकले आंसू छोड़ आए,
दोस्ती के पुराने दोस्त छोड़ आए,
शहर क्या आ गए गाँव छोड़ आए,
चलते चलते ये किधर चले आए,
अकेले रह गए सब छोड़ आए,
समुन्दर में कितने भवंर छोड़ आए,
मोहबत के हसीं सफर छोड़ आए,
शामों में चुलबुली राते छोड़ आए,
सुबह की वो पहली किरण छोड़ आए,
कोयल की कूकती कूक छोड़ आए,
वो वारिस की पहली फूआर छोड़ आए,
ये कैसे पल आये की सब छोड़ आए,
क्यों तन्हा अकेला तुम्हे छोड़ आए,
क्यों बहुत पुराना वो घर छोड़ आए।

-गौरव

Bahut purana ghar chhod aaye
hum un aankhon ko tanha akela chhod aaye
galiyon se nikle kuche chhod aaye
aankhon se nikle aansu chhod aaye
dosti k purane dost chhod aaye
shar kya aa gye gaon chhod aaye
chalte chalte ye kidhar chle aaye
akele reh gye sab chhod aaye
smunder me kitne bhbar chhod aaye
mhhobbat k hasi sfr chhod aaye
shamo me chul buli raatein chhod aaye
subh ki wo phli kiran chhod aaye
koyal ki kukti kuk chhod aaye
wo barish ki phali faar chhod aaye
ye kese pal aaye ki sab chhod aaye
kyon tanha akela tumhe chhod aaye
kyon purana ghr chhod aaye

-Gurav