धन पर कविता

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Hindi Poem on Bank – बैंक पर कविता

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सबके धन का जमा खाता
मेरे पास है हर कोई पाता
कोई डी डी कोई चेक भरता
मैं सबको हूँ आदर करता
मेरे पास करवाओ फ डी
या तुम करवालो र डी
अब मैं बेचता हूँ म्यूच्यूअल फण्ड
मैं ऑनलाइन हूँ कभी न बंद
हाँ भाई हाँ तुमने सही जाना
मैं हूँ बैंक तुम्हारा साथी पुराना
-अनुष्का सूरी

English Translation:

I hold records of everyone’s wealth

Anyone can access that from me

Some people request a demand draft, some write a cheque

I always honor them

You can get a fixed deposit done

Or you may request for a recurring deposit

I also sell mutual funds now

I am always online, and never closed

Yes, you guessed it right

I am bank, your old friend.

Hindi Poem on Money – मैं हूँ धन

काग़ज़ का एक छोटा सा टुकड़ा हूँ मैं  Money
पर दुनिया पर राज करता हूँ
कभी किसी की मुठ्ठी में
कभी किसी की जेब में मैं बसता हूँ
कभी मंदिर में चढ़ाया जाता
कभी बैंक में मैं जमा हो जाता
कभी सेठ की तिजोरी मैं भरता
कभी गरीब की रोटी का इंतज़ाम हूँ करता
हाँ सही सोचा तूने ओ मन
मैं हूँ वही – धन

-अनुष्का सूरी