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Hindi Poem on Crime Against Women-Mujh Mein Bhi Ek Jaan Hai

क्योंकि मुझमें भी एक जान है (कविता का शीर्षक)

मैं भी श्वास लेती हूँ,

हर सुख दुःख को सहती हूँ,

मेरा भी मन कोमल है,

ममता का एक आंचल है,

फिर क्यों मेरा शोषण होता,

अधिकार छिनता, मान खोता,

मेरा भी स्वाभिमान है,

क्योंकि मुझमें भी एक जान है |

किसी की माँ, किसी की पत्नी,

किसी की बहन, बेटी हूँ मैं,

हरियाली किसी आंगन की,

घर की एक ज्योति हूँ मैं,

है मुझमें भी संवेदनाएं,

भावनाएँ है, संज्ञान है,

क्योंकि मुझमें भी एक जान है |

-प्राची साहू (कवयित्री का नाम)

Kyuki mujhme bhi ek jaan hai (Title of Poem)

Mein bhi shwaas leti hu,

Har sukh dukh ko sehti hu,

Mera bhi man komal hai,

Mamta ka ek aanchal hai,

Fir kyu mera shoshan hota,

Adhikar chhinta, man khota,

Mera bhi swabhimaan hai,

Kyuki mujhme bhi ek jaan hai.

Kisi ki maa, kisi ki patni,

Kisi ki behan, beti hu main,

Hariyali kisi aangan ki,

Ghar ki ek jyoti hu main,

Hai mujhme bhi samvednaye, ‘

Bhavnaae hai, sangyaan hai,

Kyuki mujhme bhi ek jaan hai.

-Prachi Sahu (Poetess)

Meaning of the Poem:

Prachi has expressed the pain faced by women in India because of their gender. In her poetry she questions the discrimination of women in the Indian society in the voice of a girl. The title of the poem – “Kyuki mujh mein bhi ek jaan hai” – “Because I also have a life within me” forces the readers to think about issues such as female genocide and other crimes against women.

English Translation

Because I too have a life within me (Title of Poem)

I also breathe,

Tolerate all happiness and grief,

My heart is also tender,

I have a blanket of motherhood,

Then why I am I abused,

I am devoid of my rights, my peace of mind is disturbed,

I also have a self-respect,

Because I too have a life within me.

I am somebody’s mother, somebody’s wife,

I am somebody’s sister and somebody’s daughter,

I am the prosperity of somebody’s house,

I am a part of the house,

I also have empathy, ‘

I also have emotions and cognizance,

Because I too have a life within me.

-Prachi Sahu (Poetess)

Hindi Poem on Crime Against Women – Choti Si Gudiya

छोटी सी गुड़िया
माँ और बाबुल की
खुशियों की पुड़िया

नाज़ों से उसको था पाला
ज़माने की बुरी नज़र से
सदा उसको संभाला

लेकिन विधाता को
था कुछ और ही मंज़ूर
दरिंदों राक्षसों के हाथों
हुई वो चकना चूर

न हैवानियत की कोई हद्द है
और अगर कोई थी भी
तो वो सब अब रद्द है

आज तो समाज में
क्रूरता और छल का
है नंगा नाच

दूसरे का सर कुचल दो
पर खुद की हवस
पर न आये आंच

ये कैसा भारत है
मैं देख कर हूँ हैरान
क्या ये वही भूमि है जहाँ
सीता राम की है अभिमान

कुछ करो देशवासियों
भगवन से ज़रा तो डरो
ऐसे भयंकर पाप
करने से पहले तुम डरो

अगर नहीं माना तुमने
और फिर भी किया मन-माना
तो फिर नरक में रह कर होगा
कल्पों तक बस पछताना

  • अनुष्का सूरी