Hindi Poem on Rape Crime- कितनी मासूम है

कितनी मासूम है तेरी एक वो आवाज़ जी चाहता है मासूमियत से सुनती जाऊँ तेरी वो आवाज़ तेरी आवाज़ में आग महसूस किया है मैंने जो लाखों बेजान दिलों में एक आस जगा देगी तेरी आवाज़ में वो चिंगारी है जो निकलती तो मासूमियत से है पर एक तबदील हो जाती है जब मैंने तेरी […]

Hindi Poem on Rape- आदम खोर दरिन्दें

कब खूनी खेल खत्म होगा, इन आदम खोर दरिन्दों का, बचपन छीन न जाए इनका, नन्हें इन परिन्दों का, अगला शिकार कौन हो इनका, पता नहीं इन छरिन्दों का, हँसनें से भी डर लगता है, सहम जाती हूँ ये देख कर, कब शिकार होना पड़े, इन आदम खोर दरिन्दों का, कब खूनी खेल खत्म होगा, […]

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