शिक्षा व्यवस्था पर कविता

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Hindi Poem on Changing Education System-Guruji

माना कि समय बहुत बदल गया है,
गूगल नॉलेज में अहम चल गया है,
हम भाग-दौड़ की जिन्दगियों में मशगूल है,
दिल का कोना मंजिलों की निगाह पर सिकुड़ गया है,
कौन देता है तवज्जो अब उन्हें भी,
जिनके वास्ते मुकाम लिखा गया है,
गुरुजी!!!!!! यूं तो पुराने ज़माने का अहसास होगा,
गुरु की समझाईश से हर मुश्किल का सरल आभास होगा,
जिनकी निगाहों में सख्ती और दिल में नरमी,
गुरु बिन ज्ञान नहीं, कालान्तर में गर्व गुरु से प्रकाश उजास होगा ,
ना जाने हम सोने को छोडकर लोहा क्यों चुनते हैं,
गुरु -शिष्य परम्परा है अनोखी, परन्तु
ऑनलाइन स्टडी मैटेरियल ढूंढने का प्रयास होगा
शिक्षा किताबी मौजू को हल करना नहीं है साहेब,
गुरु के चरणों में सीखा सर्वस्व ज्ञान ही जीवन आधार होगा,
न बांधो पाश्चात्य की दिखावी बेड़ियों से खुद को,
न रहेंगे मूल्य सुरक्षित, विकास तो होगा
पर गुरु बिन अर्जुन एकलव्य सा इतिहास नहीं होगा!!!!!!!!!!!!!!
डॉ .अवन्तिका शेखावत