Hindi Poem on News- आज फिर मैंने अख़बार पढ़ी

आज फिर मैंने अख़बार पढ़ी थोड़ी सी तकलीफ थोड़ी उदासी बढ़ी आज फिर मैंने अख़बार पढ़ी कहीं एक नन्हा इनक्यूबेटर में जल कर स्वाहा हुआ कहीं स्कूल कहीं दुकान में बच्चियों संग अनचाहा हुआ किसी बहु ने अपनी सास की ले ली जान किसी आतंकवादी के हाथ वीर हुआ कुर्बान मैंने खुद से आखिर किया […]

Hindi Poem on Newspaper- Main Hoon Akhbar

मैं हूँ अख़बार भाई मैं हूँ अख़बार पढ़लो मुझे सुबह सुबह तो पता लगे समाचार मैं हूँ अख़बार भाई मैं हूँ अख़बार जब मैं पुरानी हो जाती तब भी मेरा है कारोबार मैं हूँ अख़बार भाई मैं हूँ अख़बार मुझपे  भेल पूरी सजती चना जोर गर्म मुझमें बिकती मैं हूँ अख़बार भाई  मैं  हूँ अख़बार मुझको […]

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