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अक्सर गुजरना होता है ,मेरा उस हवेली से
मन भर आता है मेरा , उस पहेली से !
न जाने कितने लोग इसमे मजदूर होगे
वे पेट भरने को बडे़ मजबूर होगें :
रूक जाते हैं अनायास ही मेरे कदम ,
उस हवेली के आगे दिख जाते है
वो मजदूर मुझे रातो के जागे , लगता है
वो सारा जला हुआ भात खाते है मगर ……
ज़िन्दगी में कुछ नहीं मिला तो यही मात खाते है
उन लोगो पर किया हर कर्म भारी है
उनके पीढी दर पीढी यहीं मरने का प्रयास जारी है,
निरन्तर हो रहा है उनका शोषण
नही मिलता हैं उनके बच्चो को पोषण |
उनके बच्चे शिक्षा से भी वंचित है
क्योंकि उन अन्दर भी वही मजदूरी का रक्त संचित है ,
उन बच्चों की आँखें सारी- सारी रात रोती है
गरीबी की उस चाँदनी मे चमकते मोती है |
मन भर आता है मेरा इसी पहेली से ,
अक्सर गुजरना होता है मेरा उस ” बेदर्द हवेली से “……..

-अार.कुलदीप व्यास

Aksar gujarna hota hai mera us haveli se
Man bhar aata hai mera, us haveli se
Na jane kitne log esme majdur honge
Ve peit bharne ko bade majbur honge
Ruk jate hai anayaas hi mere kadam
Us heveli ke aage dikha jate hai
Wo majdur muje raaton ke jage ,lagta hai
Lagta hai wo sara jala hua bhaat khate hai magar
Zindagi me kuch nai mila to yahi maat khate hai
Un logo par kiya har karm bhari hai
Unke pidhi dar pidhi yahi marne ka pryaas jari hai
Nirntarn ho rha hai unka shoshan
Nahi milta hai une bachon ko poshan
Unke bache shikhsha se bhi vanchit hai
Kyoki unke andar wahi majduri ka raqat sanchit hai
Un bacho ki aankhe sari sari raat roti hai
Garibi ki us chandni me chamkte moti hai
Man bhar aata hai mera esi pheli se

-R.Kuldeep Vyas

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