Hindi Poem on Silence is Golden – Maun Aur Muskan


मौन और मुस्कान

मौन में अनंत शांति समायी है,
मुस्कान उस शांति की परछाई है,
गहरा रिश्ता है मौन का मुस्कान से
मैं सुनाता हूं सुनो ध्यान से,

मौन महल है तो मुस्कान द्वार है,
यहां पहुचने के रास्ते हज़ार हैं,
मौन भाव में स्थित होती है जब दृष्टि
तब मुस्कुराती नज़र आती है सम्पूर्ण सृष्टि

यहां हर कोई विचारों और वाक्यों में उलझा है,
मौन को जाना जिसने बस वही सुलझा है,
मौन कारण है तो मुस्कान प्रभाव है
वास्तव में यही तो हमारा स्वभाव है,

सम्पूर्ण सृष्टि मौन भाव में ही विचरती है
मुस्कुराती है अपना कार्य बखूबी करती है,
मुस्कान मौन से ही दिव्यता पाती है,
तभी तो ये मुख की शोभा बढा पाती है,

जब मन पा जाता है मौन अवस्था
तब समझ में आने लगती है सम्पूर्ण सृष्टि व्यवस्था,
मन मौन होने पर मनुष्य तब अचंभित होता है
मुस्कान बन तब उसमें मौन ही प्रतिबिंबित होता है…

-नवीन कौशिक

Hindi Poem on Income Tax – Aykar


आयकर

देश प्रगति पर लाना है ।
आयकर समय पर चुकाना है।।

कर्तव्य निभाते विशेष कार्याधिकारी ।
भारी सब पे आयकर की छापेमारी ।।

सुनो नहीं है हम बेईमान ।
आयकर जमा कर बढ़ाए मान ।।

कालाधन ना बचने पाए ।
कहीं मुजरिम ना हम बन जाए ।।

कर्तव्य प्रधान से बढ़े समाज ।
जिम्मेदारी से करे कामकाज ।।

नहीं लुटेरी है सरकार ।
आयकर; विकास की दरकार।।

रीत रितिका दांगी
मध्यप्रदेश

Hindi Poem on Grief -Pattey


पत्ते

टूट के बिखरी मैं भी हूँ
जैसे बिखरते है पत्ते शाखों से टूट कर।
रोज़ ज़माना मसल कर चला जाता है उन पत्तों को,
उन हज़ार पत्तों में एक पत्ता में भी तो हूँ।

इंतज़ार रहता है उस हवा के झोंके का
जो,कहीं दूर ले चले मुझे उसके साथ
अब मुझे यह रुसवाई चुभने लगी है।

-स्रेष्ठा

Tut ke bikhri mein bhi hoon
Jaise bikhar te hain patte sakho se tut kar.
Roz zamana masalkar chala jata hain un patto ko,
Un hazar patto mein ek patta mein bhi to hu

Intezar raheta hain us hawa ke jhooke ka
Jo, kahi dur le chale mujhe uske sath
Ab mujhe yeh ruswaa-e chubhne lagi hain.

Sreshtha