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Hindi Poem by Abandoned Daughter to Her Biological Mother – Beti Ki Pukar

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क्यो छोड़ गयी माँ मुझे अकेली,
क्यो डाल गयी अनाथ की झोलीी,
ठोकर खा-खा कर चलना सिखी,
नफरत की दुनिया मे जलना सिखी,
काँटो से भरे इन रस्तो पर मैं,
गिर-गिर कर सँभलना सिखी,
नन्हे कदम कभी ये ना जाने,
मुश्किल है जीवन की पहली,
क्यो छोड़ गयी माँ मुझे अकेली,
क्यो डाल गयी अनाथ की झोली,
उठते है थामे हाथ कटोरा,
क्यूँ बेबस हूँ इतनी,
क्या दोष है मेरा,
इन आँखो मे तब आँसू भर आए,
जब दरिन्दो के हाथो बेचा जाए,
ये दुनिया समझे मुझे खिलौना,
पर खेल है इनका कितना घिनौना ,
फिरती हूँ रखकर मैं जान हथेली,
क्यो छोड़ गयी माँ मुझे अकेली,
क्यो डाल गयी अनाथ की झोली,
ऐ खुदा क्या। नसीब है मेरा,
ये कैसा इन्साफ है तेरा,
घूम रहे हैं खुले आम दरिन्दे,
लगा दिया क्यूँ मुझ पर पहरा,
कानून के हाथ बँधे रिश्वत से,
पड़ गयी हूँ मैं आज अकेली,
क्यो छोड़ गयी माँ मुझे अकेली,
क्यो डाल गयी अनाथ की झोली।

-गरीना बिशनोई

Kyon chhod gayi maa mujhe akeli
Kyon daal gayi anath ki jholi
Thokar kha kha kar chalna sikhi
Nafrat ki duniya me jalna sikhi
Kanton se bhare en raston par main
Gir gir kar sambhlna sikhi
Nanhe kadam kabhi ye na jane
Mushkil hai jivan ki pheli
Kyon chhod gayi maa muje akeli
Kyon daal gayi anath ki jholi
Uthte hai thame hath ktora
Kyun bbebas hoon etni
Kya dosh hai mera
En aankhon me tab aansu bahr aaye
Jab darindo ke hath bhecha jaye
Ye duniya samjhe muje khilona
Par khel hai enka kitna ghinona
Firti hu rakhkar main jaan hatheli
Kyon chhod gayi maa muje akeli
Kyon dal gayi anath ki jholi
Aei khuda kya nasib hai mera
Ye kesa hai insaaf tera
Ghum rhe hai khule aam drinde
Lga diya kyon mujh par pehra
Kanun k hath bande risbat se
Pad gayi hu main aaj akeli
Kyon chod gayi maa muje akeli
Kyon daal gayi anath ki jholi

-Gareena Bishnoi

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Hindi Poem on Child who Broke his Toy: Khilauna Kaanch Ka

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नन्हे-नन्हे हाथो से ,
खिलौना हाथ से छूट गया,
खिलौना था ये काँच का,
गिरा ज़मींं पे टूट गया,
रोने लगा सुबक-सुबक कर,
और ज़मीं पर लेट गया,
लेकर खिलौने के टूकडो को,
जोडने आपस मे बैठ गया,
मासूम सी आँखो से,
आँसू ना रुक पाए,
सोच रहा है ये खिलौना,
शायद फिर से जुड जाए,
बार-बार आँसूऔ को पौंछे,
पर खिलौना ना छोडे,
उल्टे-पूल्टे लगा जोडने,
भला काँच कैसे जुडे,
ये तो था एक खिलौना काँच का,
गिरते ही ज़मीं पर टूट गया,
नन्हे-नन्हे हाथो से,
खिलौना हाथ से छूट गया,
खिलौना था ये काँच का,
गिरा ज़मीं पे टूट गया।

-गरीना बिशनोई

How to read

Nanhe nanhe hatho se
Khilona hath se chhut gaya
Khilona tha ye kanch ka
Gira zameen pe tut gaya
Rone laga subak subak kar
Aur Zameen par leit gaya
Le kar khilone ke tukde ko
Jodne aapas mei baith gaya
Masoom si aankhon se
Aansu na ruk paye
Soch raha hai ye khilona
Shayad fir se jud jaye
Bar bar aansuon ko ponche
Par khilona na chode
Ulte pulte laga jodne
Bhala kanch kaise jude
Ye to tha ek khilona kanch ka
Girte hi zameen par tut gya
Nanhe nanhe hathon se
Khilona hath se chhut gaya
Khilona tha ye kanch ka
Gira zameen pe tut gaya

-Gareena Bishnoi

Hindi Poems on Motivation – कुछ बात हो अपनी

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नई दिशा बहार हो अपनी
कुछ सोचे, कुछ बात हो अपनी
हो समय कुछ भी
अच्छा या बुरा
पर नई शुरुआत हो अपनी
भूत परछाइ से सीखे, हम
आगे न दोहराना होगा
हो ग़लती कुछ भी
अब ना भटकना होगा
सपने हो अछे अछे
कल्पनाओं के रंग हो सच्चे
कोशिश भी हो पक्की पक्की
एक नहीं सो हो सच्ची
फ़लक तो देखो अपना होगा
मन में पहले गड़ना होगा
स्वप्न रंग जिस दिशा में बहते
उस दिशा तो बड़ना होगा
हो परिवर्तन”अभी की अभी”
नहीं तो सुनते खूब सभी
क्या हो तुम “कुछ नहीं”
थे जो पहले हो अभी,
पर देख सोच बदलनी होगी
नई दिशा अब, चुननी होगी

चलो सोचे इक बार जरा “हम”
नई दिशा बहार हो अपनी
कुछ सोचे कुछ बात हो अपनी

-मनोज कुमार बदलानी

Hindi Poem on Objects-हाँ हूँ मैं

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हाँ हूँ मैं
नया अभी
कवि नहीं
कवि कभी
जो चाहे कह लो,
जो सोचो
वही सही
हा पर मैं
हूँ कही
था सही
हूँ सही
मन की बात
कहुँ कभी
पर माने मेरी
कोन सही
पागल हूँ मैं
यही सही
क्यो भाई
“हाँ सही”
समाज अभी
क्या कहे
पल में बदले
देखो सभी
जाने कहाँ
मुझे अभी,
अभी कुछ भी
ना सही,
हा कहे
सो कहे
बेकार मुझे
ना कहे
अभी शुरू
हूँ ही,
क्या कहूँ
क्या कहूँ
नया रूप
देख मेरा
मुझसे पूछे
सब अभी
ना कहूँ
क्या कहूँ
“अभी बस शुरूआत सही”
अभी नहीं
अभी नहीं,
हाँ कुछ हूँ
पर अभी नही
याद करेगे
कभी कभी,
इक पागल था
यही कही
हाँ हूँ. मैं
नया अभी
कवि नहीं
कवि कभी
– मनोज कुमार बदलानी

Hindi Poem on Delhi Smog-Kohre Ka Kahar

delhi-smog
आज दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार में है हाहाकार
हाँ भैया हुआ है वायु प्रदुषण का यह तेज़ प्रहार
चारों तरफ छाया है घने कोहरे का कहर
हवा में मिला है कार्बन तत्त्व का ज़हर
बच्चों के विद्यालय कर दिए बंद
पर ऑफिस कैसे हो जाना बंद?
मुँह पर लगा के सब मास्क
दिल्ली वाले करने चले टास्क
रहेगी प्रदुषण एवं हर समस्या बरक़रार
जब तक नहीं होगा शिक्षित हर परिवार
शिक्षा, स्वास्थ्य को बनाओ प्राथमिकता
फिर देखो न होगी कोई समस्या
-अनुष्का सूरी