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Hindi Poem on Child who Broke his Toy: Khilauna Kaanch Ka

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नन्हे-नन्हे हाथो से ,
खिलौना हाथ से छूट गया,
खिलौना था ये काँच का,
गिरा ज़मींं पे टूट गया,
रोने लगा सुबक-सुबक कर,
और ज़मीं पर लेट गया,
लेकर खिलौने के टूकडो को,
जोडने आपस मे बैठ गया,
मासूम सी आँखो से,
आँसू ना रुक पाए,
सोच रहा है ये खिलौना,
शायद फिर से जुड जाए,
बार-बार आँसूऔ को पौंछे,
पर खिलौना ना छोडे,
उल्टे-पूल्टे लगा जोडने,
भला काँच कैसे जुडे,
ये तो था एक खिलौना काँच का,
गिरते ही ज़मीं पर टूट गया,
नन्हे-नन्हे हाथो से,
खिलौना हाथ से छूट गया,
खिलौना था ये काँच का,
गिरा ज़मीं पे टूट गया।

-गरीना बिशनोई

How to read

Nanhe nanhe hatho se
Khilona hath se chhut gaya
Khilona tha ye kanch ka
Gira zameen pe tut gaya
Rone laga subak subak kar
Aur Zameen par leit gaya
Le kar khilone ke tukde ko
Jodne aapas mei baith gaya
Masoom si aankhon se
Aansu na ruk paye
Soch raha hai ye khilona
Shayad fir se jud jaye
Bar bar aansuon ko ponche
Par khilona na chode
Ulte pulte laga jodne
Bhala kanch kaise jude
Ye to tha ek khilona kanch ka
Girte hi zameen par tut gya
Nanhe nanhe hathon se
Khilona hath se chhut gaya
Khilona tha ye kanch ka
Gira zameen pe tut gaya

-Gareena Bishnoi

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Hindi Poems on Motivation – कुछ बात हो अपनी

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नई दिशा बहार हो अपनी
कुछ सोचे, कुछ बात हो अपनी
हो समय कुछ भी
अच्छा या बुरा
पर नई शुरुआत हो अपनी
भूत परछाइ से सीखे, हम
आगे न दोहराना होगा
हो ग़लती कुछ भी
अब ना भटकना होगा
सपने हो अछे अछे
कल्पनाओं के रंग हो सच्चे
कोशिश भी हो पक्की पक्की
एक नहीं सो हो सच्ची
फ़लक तो देखो अपना होगा
मन में पहले गड़ना होगा
स्वप्न रंग जिस दिशा में बहते
उस दिशा तो बड़ना होगा
हो परिवर्तन”अभी की अभी”
नहीं तो सुनते खूब सभी
क्या हो तुम “कुछ नहीं”
थे जो पहले हो अभी,
पर देख सोच बदलनी होगी
नई दिशा अब, चुननी होगी

चलो सोचे इक बार जरा “हम”
नई दिशा बहार हो अपनी
कुछ सोचे कुछ बात हो अपनी

-मनोज कुमार बदलानी

Hindi Poem on Objects-हाँ हूँ मैं

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हाँ हूँ मैं
नया अभी
कवि नहीं
कवि कभी
जो चाहे कह लो,
जो सोचो
वही सही
हा पर मैं
हूँ कही
था सही
हूँ सही
मन की बात
कहुँ कभी
पर माने मेरी
कोन सही
पागल हूँ मैं
यही सही
क्यो भाई
“हाँ सही”
समाज अभी
क्या कहे
पल में बदले
देखो सभी
जाने कहाँ
मुझे अभी,
अभी कुछ भी
ना सही,
हा कहे
सो कहे
बेकार मुझे
ना कहे
अभी शुरू
हूँ ही,
क्या कहूँ
क्या कहूँ
नया रूप
देख मेरा
मुझसे पूछे
सब अभी
ना कहूँ
क्या कहूँ
“अभी बस शुरूआत सही”
अभी नहीं
अभी नहीं,
हाँ कुछ हूँ
पर अभी नही
याद करेगे
कभी कभी,
इक पागल था
यही कही
हाँ हूँ. मैं
नया अभी
कवि नहीं
कवि कभी
– मनोज कुमार बदलानी

Hindi Poem on Delhi Smog-Kohre Ka Kahar

delhi-smog
आज दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार में है हाहाकार
हाँ भैया हुआ है वायु प्रदुषण का यह तेज़ प्रहार
चारों तरफ छाया है घने कोहरे का कहर
हवा में मिला है कार्बन तत्त्व का ज़हर
बच्चों के विद्यालय कर दिए बंद
पर ऑफिस कैसे हो जाना बंद?
मुँह पर लगा के सब मास्क
दिल्ली वाले करने चले टास्क
रहेगी प्रदुषण एवं हर समस्या बरक़रार
जब तक नहीं होगा शिक्षित हर परिवार
शिक्षा, स्वास्थ्य को बनाओ प्राथमिकता
फिर देखो न होगी कोई समस्या
-अनुष्का सूरी

Hindi Poem on Elections – Main Vote Hu

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छोटे से कागज़ में लिप्त हूँ
या मशीन में चिन्ह हूँ
प्रजातंत्र का नोट हूँ
मैं वही वोट हूँ
जब भी हैं चुनाव आते
मेरे लिए हैं सब दौड़ लगाते
कभी कोई पार्टी कभी कोई नेता
मेरे बहुमत बिना न कोई कुछ बनता
सियासत की कुर्सी का मैं ही रखवाला
हाँ मैं ही हूँ सरकार बनाने वाला
-अनुष्का सूरी

How to read:

Chote se kagaz mein lipt hu

Ya machine mein chinha hu

Prajatantra ka note hu 

Main wahi vote hu

Jab bhi hain chunav aate

Mere liye hain sab daud lagate

Kabhi koi party kabhi koi neta

Mere bahumat bina na koi kuch banta 

Siyasat ki kursi ka main hu rakhwala

Haan, main hi hu sarkaar banane wala 

-Anushka Suri

English Translation:

I am in the form of a piece of paper

Or a symbol in an electronic machine

I am the currency of democracy

Yes, I am the same vote

Whenever the elections are about to take place

Every politician is after me

No political party or politician

Can resume power without my majority

I am the one who can safeguard a political party in power

I bring parties to governance