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Hindi Poem on BJP Government – नई सरकार आयी है

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नई सरकार आयी है, भई नई सरकार आयी है
जब से है ये आयी ,बस सुर्खियों में छायी,
दुनिया के हर कोने में बस तालिया बजवाई
अंतरिक्ष में भी अपनी कौशलता दिखलाई है
नई सरकार आयी है, भई नई सरकार आयी है

अब नोट हुए रद्दी ,बाकियों की गई गद्दी
जहाँ छाप नहीं थी इनकी, वहां दोस्ती फैलाई है
नई सरकार आयी है, भई नई सरकार आयी है

नेता है इनके ऐसे ,जो कुछ भी हैं कह सकते
जो ज्यादा हैं कह देते ,उनको ये बदलते
डिजिटल और मेक इन इंडिया ने भी इनकी ख्याति बढ़ाई है
नई सरकार आयी है, भई नई सरकार आयी है

अब ट्विटर हो या फेसबुक ,बस इनका ही ज़माना
जाओ चाहें कहीं भी बस सेल्फी ही लगाना
बेटी बचाओ सेल्फी, घर की सफाई सेल्फी
अब तो टॉयलेट तक की सेल्फी ,लोगों ने लगायी है
नई सरकार आयी है, भई नई सरकार आयी है

अब तो भगवा ही रंगा है औरो का भी मज़ा है
कला धन वालों को मिलनी, अब सजा है
जियो और जीसटी ने तो सबकी वाट ही लगाई है
नई सरकार आयी है, भई नई सरकार आयी है
– सुमित

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Hindi Poem for Woman- नारी

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तोड़ के पिंजरा
जाने कब उड़ जाऊँगी मैं
लाख बिछा दो बंदिशे
फिर भी आसमान मैं जगह बनाऊंगी मैं
हाँ गर्व है मुझे मैं नारी हूँ
भले ही रूढ़िवादी जंजीरों सेबांधे है दुनिया ने पैर मेरे
फिर भी इसे तोड़ जाऊँगी
मैं किसी से कम नहीं सारी दुनिया को दिखाऊंगी
जो हालत से हारे ऐसी नहीं मैं लाचारी हूँ
हाँ गर्व है मुझे मैं नारी हूँ

-सोनी कुमारी

Tod ke pinjra
Jane kab ur jaungi mai,
Lakhh bichha do bandise
Phir bhi aasman mai jagah banaungi mai,
Ha garv hai mujhe mai nari hu.
Bhale Hi rudhiwadi janjiro se bandhe hai duniya ne pair mere,
Phir bhi ise tor jaungi
Mai kisi se kam nahi sari duniya ko dikhhaungi,
Jo halat se hare aisi nahi mai lachari hu,
Mai to solo pe bhi chalkar apni rah bana lu mai aisi nari hu.
Mera apna astitva hai nahi mai lachari hu
Ha garv hai mujhe mai nari hu.

-Soni Kumari

Hindi Poem for Women – समानता

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अंदर से रोती फिर भी बाहर से हँसती है
बार-बार जूड़े से बिखरे बालों को कसती है
शादी होती है उसकी या वो बिक जाती है
शौक,सहेली,आजादी मायके में छुट जाती है
फटी हुई एड़ियों को साड़ी से ढँकती है
खुद से ज्यादा वो दुसरो का ख्याल रखती है
सब उस पर अधिकार जमाते वो सबसे डरती है
क्योंकि बिकी हुई औरत बगावत नही करती है।

शादी हकोर लड़की जब ससुराल में जाती है
भूलकर वो मायका घर अपना बसाती है
घर आँगन खुशियो से भरते जब वो घर में आती है
सबको खाना खिलाकर फिर खुद खाती है
जो घर संभाले तो सबकी जिंदगी सम्भल जाती है
लड़की शादी के बाद कितनी बदल जाती है।
गले में गुलामी का मंगलसूत्र लटक जाता है
सिर से उसका पल्लू गिरे तो सबको खटक जाता है
अक्सर वो ससुराल की बदहाली में सड़ती है
क्योंकि बिकी हुई औरत बगावत नही करती है।

आखिर क्यों बिक जाती, औरत इस समाज में?
क्यों डर-डर के बोलती, गुलामी की आवाज में?
गुलामी में जागती हैं, गुलामी में सोती हैं
दहेज़ की वजह से हत्याएँ जिनकी होती हैं
जीना उसका चार दीवारो में उसी में वो मरती है
क्योंकि बिकी हुई औरत बगावत नही करती है।

जिस दिन सीख जायेगी वो हक़ की आवाज उठाना
उस दिन मिल जायेगा उसे सपनो का ठिकाना
खुद बदलो समाज बदलेगा वो दिन भी आएगा
जब पूरा ससुराल तुम्हारे साथ बैठकर खाना खायेगा
लेकिन आजादी का मतलब भी तुम भूल मत जाना
आजादी समानता है ना की शासन चलाना
असमानता के चुंगल में नारी जो फँस जाती है
तानाशाही का शासन वो घर में चलाती है
समानता से खाओ समानता से पियो
समानता के रहो समानता से जियो
असमानता वाले घरों की, एक ही पहचान होती है
या तो पुरुष प्रधान होता या महिला प्रधान होती है
रूढ़िवादी घर की नारी आज भी गुलाम है
दिन भर मशीन की तरह पड़ता उन पे काम है
दुःखों के पहाड़ से वो झरने की तरह झरती है
क्योंकि बिकी हुई औरत बगावत नही करती है।

-राहुल रेड

Hindi Poem on Jhansi Ki Rani – Wo Jhansi Wali Rani Thi

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हाथ में तलवार जिसने ठानी थी
हाँ वो झाँसी वाली रानी थी
जिसके खून में मर्द सी रवानी थी
हाँ वो झाँसी वाली रानी थी
अंग्रेज़ो को जिसने याद दिलाई नानी थी
हाँ वो झाँसी वाली रानी थी
झाँसी के शहर की जो महारानी थी
हाँ वो झाँसी वाली रानी थी
-अनुष्का सूरी

How to read:

Hath mein talwar jisne thani thi

Haan wo Jhansi wali rani thi

Jiske jhoon mein mard si ravani thi

Haan wo Jhansi wali rani thi

Angrezo ko jisne yad dilayi nani thi

Haan wo Jhansi wali rani thi

Jhansi ke shahar ki jo maharani thi

Haan wo Jhansi wali rani thi

-Anushka Suri

English translation:

The lady who held a sword in her arms

Yes, she was the queen of Jhansi

The lady who had manly bravery in her blood

Yes, she was the queen of Jhansi

The lady who had taught a lesson to the Britishers

Yes, she was the queen of Jhansi

The lady who ruled the city of Jhansi

Yes, she was the queen of Jhansi

Hindi Poem on Rape – बेटी की अस्मत

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कुण्डी ना खड़काओ चुप रहो आज महीनो बाद मेरी बच्ची सोई है
आँखे सूजी और गायब है हाँसी उसकी सारी बिना गुन्हा के रोई है

धीमी करवा दो पड़ोस के टीवी में चल रहे समाचारो की आवाज
काँप उठेगी फिर से वो सुना अगर फिर किसी ने आज अस्मत खोई है

बड़ी चर्चाओं को सहना है , बड़े दुखो को कहना है अभी फैसला तो दूर है
की कैसे और कब लूटी है अस्मत सिर्फ यही चर्चा हो रही है !!

चंद भेडियों की गलती पर इन्सनियत ने चुप्पी सादी है
अगर शेरो ने खाल पहन ली है डरकी तो शेरनियां भी क्यों सोई है

कौन क्या करेगा यही डर है सबको इसी सोच पर कितनी बेटियां रोई है
अरे कुण्डी ना खड़काओ चुप रहो आज महीनो बाद मेरी बच्ची सोई है !!

-अश्वनी कुमार