Category Archives: Hindi Poem on Rape

Hindi Poem on Girl Abuse – Main Janam Lu Bhi Ki Nahi


मैं जन्म लू भी कि नहीं? (कविता का शीर्षक)
मैं क्या पहनूं,
जो तेरी नज़र मेरे आँचल पर ना पड़े?
मैं किस समय घर से निकलूं,
जो तेरी नौका मेरे बांध से ना सटे?
मैं किस तरह चलूँ,
कि मेरी चाल तुझे न्योता ना लगे?
मैं कैसे बोलूं
जो तेरा खून का दौर सही दिशा में ही बहे?
मैं जन्म लूँ भी कि नहीं,
मैंने तुझे बहला दिया,
कभी तू बाद में कहे।
मैं ये सवाल पूछने बचूंगी ही नहीं
जो शोषण के बाद,
तेरे हाथ तेल और माचिस आ लगे।
-प्रज्ञा मित्तल (कवयित्री )

English Translation:

Main janam loo bhi ki nahin (Should I take birth or not?) (Title of the Poem)
Main kya pehnu (What should I wear)
Jo teri nazar mere anchal par na pade? (So that you do not have a bad eye on my body)
Main kis samay ghar se niklu (At what time should I leave my home)
Jo teri nauka mere bandh se na sate? (So that we do not cross paths with each other)
Main kis tarha chalu (How should I walk)
Ki meri chaal tujhe nyauta na lage? (So that you do not find my gait inviting for abuse)
Main kaise bolu (How should I speak)
Jo tera khoon ka daur sahi disha mein bahe? (So that you spend your energy in the right manner)
Main janam lu bhi ki nahi (Should I take birth or not)
Main tujhe behla diya (It was I who distracted you)
Kabhi tu baad mein kahe (You may bring this later sometime as an excuse)
Main ye sawal puchne bachungi hi nahi (I will not survive to ask these questions)
Jo shoshan ke baad (If after abuse)
Tere hath tel aur machis aa lage (If you get access to oil and matchstick)
-Pragya Mittal (Poetess)

Hindi Poem on Crime Against Women – Choti Si Gudiya


छोटी सी गुड़िया
माँ और बाबुल की
खुशियों की पुड़िया

नाज़ों से उसको था पाला
ज़माने की बुरी नज़र से
सदा उसको संभाला

लेकिन विधाता को
था कुछ और ही मंज़ूर
दरिंदों राक्षसों के हाथों
हुई वो चकना चूर

न हैवानियत की कोई हद्द है
और अगर कोई थी भी
तो वो सब अब रद्द है

आज तो समाज में
क्रूरता और छल का
है नंगा नाच

दूसरे का सर कुचल दो
पर खुद की हवस
पर न आये आंच

ये कैसा भारत है
मैं देख कर हूँ हैरान
क्या ये वही भूमि है जहाँ
सीता राम की है अभिमान

कुछ करो देशवासियों
भगवन से ज़रा तो डरो
ऐसे भयंकर पाप
करने से पहले तुम डरो

अगर नहीं माना तुमने
और फिर भी किया मन-माना
तो फिर नरक में रह कर होगा
कल्पों तक बस पछताना

  • अनुष्का सूरी

Hindi Poem on Save Girl Child-बचाऊं कैसे


आंखों के ख्वाब मिटा दूं रात भर जागकर,
पर दिल के ख्वाब मिटाऊं कैसे।
आहट पाते ही जिसकी मातम छा गया,
उसके जीवन की आश लगाऊं कैसे।
बड़ी जहमत से जवां हुआ ये फूल,
दुनियां की नजर इस से हटाऊं कैसे,
दरिंदों की नीयत तो कहीं भी डोल जाती है,
चेहरा नकाब से छुपाऊं कैसे।
खुदा का सौदा कर लिया धर्म के इजारेदारों ने
खिदमत की गुहार उससे लगाऊं कैसे ।
जोश चाहिए जिगर में ये दौर बदलने की खातिर,
बगावत के लिए उन्हें उकसाऊं कैसे।
आवाज उठाने की खातिर दिल बेताब है मेरा,
पर समाज से दामन छुड़ाऊ कैसे।
उसकी जंग का एक लम्हा सब कुछ बदल देगा ,
बेटी के दुश्मनों को ये समझाऊं कैसे।
बेटी ही साथ देने चली बेटी के कातिलों का,
फिर रोज मरती बेटियां बचाऊं कैसे।

Aankhon ke khwab mita doon raat bhar jaagkar
Par dil ke khwab mitau kaise
Aahat pate hi jiski maatam chha gaya
Uske jivan ki aash lagaun kaise
Badi zehmat se jawa hua ye phool
Duniya ki nazar es se hatau kaise
Darindon ki niyat to kahi bhi dol jati hai
Chehra nakab se chupaun kaise
Khuda ka sauda kar liya dharm ke ijaredaron ne
Khidmat ki ghuhaar usse lgaun kaise
Josh chahiye jigar mein ye dour badlne ke khatir
Bgavat ke liye unhe uksaun kaise
Aawaj uthane ke khatir dil betab hai mera
Par samaj se daman chudau kaise
Uski jang ka ek lamha sab kuch badal dega
Beti ke dushmano ko ye samjhaun kaise
Beti hi sath dene chali beti ke katilon ka
Fir roz marti betiyaan bachaun kaise

-Monika 

Hindi Poem on Rape Crime- कितनी मासूम है


कितनी मासूम है तेरी एक वो आवाज़
जी चाहता है मासूमियत से सुनती जाऊँ तेरी वो आवाज़
तेरी आवाज़ में आग महसूस किया है मैंने
जो लाखों बेजान दिलों में एक आस जगा देगी
तेरी आवाज़ में वो चिंगारी है जो निकलती तो मासूमियत से है
पर एक तबदील हो जाती है जब मैंने तेरी आवाज़ में
वो जज्वा महसूस किया तो समझा ये नारी में ही है और नारी में ही हो सकता है
तू तैयार है इसमें भी तेरी मासूमियत झलकती है
जिस दरंदगी से उन दरिन्दो ने तेरी मासूमियत बहरी आवाज़ को कुचल कर तार तार किया
देश की एक बेटी का नहीं नारी के हर रूप का बलत्कार हुआ है
मासूम सी थी इस की सिर्फ एक खाव्हिश ज़िन्दगी जीने की छिन ली
उन दरिंदो उसकी वो आवाज़ जो उसकी ताकत थी
जो लाखों दिलों पे राज़ करने के लिये पागल थी
ये हर उसकी लड़की के लिये है जिसकी आवाज़ को हमेशा दबाया जाता है

नेहा

 

Kitni masoom hai teri ek wo awaz
Jee chahta h masoomiyat se sunti jaau teri wo awaz
Teri awaz me wo aag mehsus kiya hai maine
Jo laakho bejaan dilo me ek aas jaga degi
Teri awaz me wo chingari hai Jo nikalti to masumiyat se hai
Par ek jwalamukhi me tabdeel ho jaati hai Jb maine teri awaz me
wo jazbaa mehsoos kiya to samjha ye naari me hi hai or narri me hi ho skta hai
Tu tayar hai es me bhi teri masumiyat jahlakti hai
jis darindagi se un darindon ne teri masoomiyat bheri
Awaz ko kuchal kar ke taar taar kiya..
Desh ki ek beti ka nhi naari ke har roop ka balatkar hua hai
Masoom si thi es ki sirf ek khawhish zindgi Jeene ki chhin li
Un darindo uski wo awaz Jo uski taakat thi
Jo laakho dilon pe raaj karne ke liye pagal thi
Ye har uski ladki ke liye hai jiski awaz ko hmesha dbaaya jaata hai

Neha

 

Hindi Poem on Rape- आदम खोर दरिन्दें


कब खूनी खेल खत्म होगा,
इन आदम खोर दरिन्दों का,
बचपन छीन न जाए इनका,
नन्हें इन परिन्दों का,
अगला शिकार कौन हो इनका,
पता नहीं इन छरिन्दों का,
हँसनें से भी डर लगता है,
सहम जाती हूँ ये देख कर,
कब शिकार होना पड़े,
इन आदम खोर दरिन्दों का,
कब खूनी खेल खत्म होगा,
इन आदम खोर दरिन्दों का।

गरीना बिश्नोई

Kab khuni khel khtam hoga
En aadam khor darindo ka
Bachpan chin na jaye enka
Nanhe en parindo ka
Agla shikar kon ho inka
Pta nahi en charchindo ka
Hasne se bhi dar lagta hai
Sham jati hoon ye dekh kar
Kab shikar hona pade
En aadamkhor darindo ka
Kab khuni khel khtam hoga
En aadam khor darindo ka

-Garina Bishnoi