Hindi Poem on Daughter – मैं बेटी हूँ

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माँ दुर्गा की शक्ति हूँ
मैं भी पढ़ लिख सकती हूँ
मात पिता की सेवा जानूँ
अपने फ़र्ज़ को मैं पहचानूँ
जब थी इस दुनिया मैं आई
सारे शहर में बँटी मिठाई
मुझको लाड प्यार से पाला
स्कूल भेज सिखाई वर्ण माला
मैं अपने घर की शान हूँ
हाँ मैं बेटी वरदान हूँ

– अनुष्का सूरी

 

Maa durga ki shakti hu
Main bhi padh likh sakti hu
Mat Pita ki sewa janu
Apne farz ko main pehchanu
Jab thi is duniya mein ayi
Sare shahar mein bati mithai
Mujhko lad pyar se pala
School bhej sikhayi varn mala
Main apne ghar ki shaan hu
Haan mein beti vardaan hu

– Anushka Suri

Hindi Poem on Woman Aspirations – मैं क्यों ना चाहूँ

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इतनी आबादी में रहना आज़ादी से,
मैं क्यूँ न चाहूँ
पंछियों सी उडक़र बादलों को चूना
मैं क्यूँ न चाहूँ
लड़कों सा मैं भी हर जगह घूमना
तारों से अलग चाँद की तरह चमकना
पर्वतों का आरोहण सपना बने मेरा
विदेशों में जा कर पढ़ना मैं क्यों न चाहूँ
इन सारे सवालों के जबाब मैं क्यों न चाहूँ
जनता है आसमान और ज़मीन
हमें नहीं है कोई कमी
फिर क्यों इतनी आबादी में रहना आजादी से
मैं क्यू न चाहूँ

– अनुष्का सूरी

 

Itni aabadi me rahna aajadi se,
Mai q na chahun.
Panchiyon si udkar badlon ko chuna
Mai q na chahun.
Ladkon sa mai bhi har jagah ghumna,
Taron se alag chand ki tarah chamakana,
Mai q na chahun.
Parwaton ka aarohan sapna bane mera,
Videshon me jakar padhna mai q na chahun.
In sare sawalon ke jawab mai q na chahun.
Janta hai aasman aur jamin
Hamme nahi hai koi kami,
Phir q itni aabadi me rahna aajadi se,
Mai q na chahun.

– Anushka suri