Category Archives: Hindi Poem for Daughter

Hindi Poem by Daughter to her Father on her Marriage-Beti Ka Dard

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बेटी का दर्द
पापा मुझे यूँ ओझल न कर अपनी नज़रों से…
पापा मुझे यूँ ओझल न कर अपनी नज़रों से…
माना दुनिया की रीत है ..
माना दुनिया की रीत है..
फिर भी
पापा मुझे यूँ ओझल न कर अपनी नज़रों से…
पापा मेरे तुम कहते थे मैं तुम्हारी बेटी नहीं बेटा हूं
तो क्या कोई बेटे को विदा करता है ..
पापा मुझे यूँ ओझल न कर अपनी नज़रों से..
पापा मुझे यूँ ओझल न कर अपनी नज़रों से..
-मयूरी श्रीवास्तव

Hindi Poem on Sad Girl – एक लड़की

आँखों को मूँदे
बैठी हैं कोने में  “वो”
कभी आंसू आए
तो कभी मुस्कुराये  “वो”
रिश्तों को निभाए
अपने आप में मस्त
दिल की परतों को खोले
पर राज़ गहरे छुपाएं हैं  “वो”
एकान्त में अकेली नहीं हैं  “वो”
दोस्त हैं गहरे अंधेरे में
जिसे देख न सके कोई
भीड़ में खड़ी
पर अकेली हैं आज भी  “वो”
– सुमिता कँवर

Aankhon ko mundein
Bethi kone mein wo
Kabhi aansu aaye
To kabhi muskuraye wo
Riston ko nibhaye
Apne aap mein mast
Dil ki parton ko khole
Par raaz gahre chupaye hai wo
Ekant me akeli nahi hai wo
Dost hai gahre andhere mein
Jise dekh na sake koi
Bheed mein khadi
Par akeli hai aaj bhi wo
-Sumita Kanwar