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Hindi Poem on Rain-वर्षा ऋतू पर कविता

यह बारिश की बूंदें कुछ कह रहीं हैं
इस हरियाली को नया जीवन सौंप रही हैं
आसमान से नदियों का कण-कण बन के बह रही हैं
यह बारिश की बूंदें कुछ कह रहीं हैं|
ये बिन मौसम की बारिश
अपने होने का एहसास दिला रहीं हैं|
ये बूंदें छोटी हैं पर आत्मनिर्भर पत्तों से टकरा कर
मेरे हाथों मे ठहर रहीं हैं
यह बारिश की बूंदें कुछ कह रहीं हैं|
कड़कती धूप का अस्तित्व मिटाकर
सावन के लिए खोया हुआ प्यार जगाकर
ये बंजर दिलों और ज़मीनों को तर कर रहीं हैं
यह बारिश की बूंदें कुछ कह रहीं हैं|
आओ लौट चलें उन यादों में
जी लें बचपन फिर उन बरसातों में
वो जो रह गया ज़िन्दगी की
कशमकश की फरियादों में
वो बिजली का कड़कना,
वो हम सबका डरना
कशतियाँ बनाना
और मज़े करना
हवा के साथ यह बूंदें लहर जगा रहीं हैं
यह बारिश की बूंदें कुछ कह रहीं हैं|
जया

Message from Poet:

Rain is medium of escape from anxiety and this busy world. People should embrace little joys in their life as life is too short.

All Religions are One-धर्मनिरपेक्षता पर कविता

एक हैं सब इन्सान ।
छोड़ो धर्म पर लड़ाई
छोड़ो झूठी शान
सबका मज़हब एक है
एक हैं सब इन्सान ।
जीसस, अल्लाह एक हैं
एक ही हैं हनुमान
सबका मज़हब एक है
एक हैं सब इन्सान ।
आपस की इस फूट से
अंग्रेज़ों ने लूटा था जहान
सबका मज़हब एक है
एक हैं सब इन्सान ।
-विनित जैस्वाल

Kya mandir ki ghanti

Kya masjid ki aazan

Sabka mazhab ek hai

Ek hai sab insaan

Chodo dharm par ladai

Chodo jhuthi shaan

Sabka mazhab ek hai

Ek hai sab insaan

Jesus, Allah ek hai

Ek hi hai Hanuman

Sabka mazhab ek hai

Ek hai sab insaan

Aapas ki iss phut se

Angrezo ne loota tha jahan

Sabka mazhab ek hai

Ek hain sab insaan.

-Vineet Jaiswal

Note from author:

I want to express my views on unity of all religions. I want to tell everyone that only because of this enmity existing in diversity, foreigners were able to rule on us.