All posts by anushkasuri

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Inspirational Hindi Poem-Sahyog


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सहयोग
करें हम सदा सहयोग सभी का ।
यही मकसद हो अपनी ज़िन्दगी का ।।
ये जिंदगी मिली बड़ी रहमतों से,
इसे हम सँवारे ,इसे हम सजाएँ।
करे खूब कोशिश, मेंहनत के बल पे इसे और बेहतर बनाएँ।।
मुश्किलें हरा दें, जहाँ को दिखा दें अपने दम पर हम ।
ना हारें कभी किसी बात से डटे रहे जीवन भर हम।।
-संजय

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Hindi Poem on Women Empowerment-Jeene Ki Adhikari Naari


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जीने की अधिकारी नारी

ये पुरूषत्व का मोहपाश,
कर नारी का अपमान,
रचता मानव अपना ही विनाश।
जीने की अधिकारी नारी जितना है पुरूष अधिकारी।
सज्जन मानव दुर्जन मानव समाज एक ही में रहते।
सज्जनता उन्नति की द्योतक,
दुर्जन पतन को लाते है।
आती है कयामत जब अपमानित होती नारी।
जीने की अधिकारी नारी,जितना है पुरूष अधिकारी।
नारी तुम हो अपनी सहाय,
दुर्गा काली बन उभरो जग में।
क्रूर दानव रूपी मनुष्य को,
खुद पे हावी मत होने दो।
जिसने तुझसे वजूद छीना,
उसे जीने का अधिकार नही।
काट ड़ालो उन क्रूर हाथों को,
जो उठे नारी तेरे अपमान में।
तुम ही हो मनु की श्रद्धा,
तुम शिव की गौरी।
महाशक्ति,जन्मदात्री तुम ब्रह्माणी,रूद्राणी।
उठो बहुत सहा अपमान
अपनी रक्षा को स्वयं प्रवृत होवो,
अपने सम्मान को लज्जित ना होने दो।
बन नई पीढ़ी की नई लहर उभरो।
सज्जन मानव का सम्मान करो,
दुर्जन को हावी ना होने दो।
अपना अधिकार ग्रहण करो,
जिसकी तुम अधिकारी हो।
जीने की अधिकारी नारी,
जितना है पुरूष अधिकारी।

-कविता यादव

Poem on Hindi Language-Hindi Matrabhasha


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हिंदी मातृभाषा

हिंदी मातृभाषा है ये अभिमान मेरा है,
इसे पंक्तिबद्ध करना ही अरमान मेरा है।
कवि का कर्म लेखन है, कवि का धर्म लेखन है,
जो दिल से समझे ये दुनिया कवि का मर्म लेखन है।
मेरा कवि हृदय भी भाव विभोर हो उठता है,
जब अपने दिल के भावों को पृष्ठों में उकेर देता है।
हिंदी मातृभाषा है……….
इसे पंक्तिबद्ध करना ही………
तुक छंद के मेरी मातृभाषा में सुरभित हैं,
अलंकारों की रमणीयता से ये शोभित है।
एक-एक शब्द एक -एक मोती की चमक देता है,जब उसका अपना एक प्यारा सा अर्थ होता है।
अर्थहीन नहीं मेरी भाषा ये सटीक सार्थक है,
इसको पढ़ना और सीखना नहीं निरर्थक है।
सम्पूर्ण विश्व में ये पैैगाम देना है,
मेरी मातृभाषा को सम्मान देना है।
हिंदी………
इसे पंक्तिबद्ध करना….
हिंदी मातृभाषा से जो ये मेरा जन्म का बंधन है,
मै तो बंध गई इसमें कितना प्यारा मेरा जीवन है।
कब कविता निकली मुख से कब स्याही से मोती सी जड़ गई पृष्ठ पर ,
ये सब मातृभाषा के कारण है।
मातृभाषा की सुन्दरता कितनी अविरल है,
हिंदी माँ मेरी कितनी निश्छल है।
हिंदी मातृभाषा है ये अभिमान मेरा है,
इसे पंक्तिबद्ध करना ही अरमान मेरा है।

-कविता यादव

Hindi Poem on Greatness of Mother-Ma Ki Mamta


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माँ की ममता

माँ तो माँ होती हैं,

माँ की ममता बड़ी निराली होती है,

सुख-दुःख में जो खुद को टूटने नहीं देती,

आखिर वही तो माँ होती है।

मत कर अभिमान चूर-चूर हो जाएगा,

माँ का अपमान मत कर

तू दुष्ट संतान कहलायेगा।

जिस माँ ने तुम्हें जीवन दिया

उस माँ को क्यों तुम भूलना चाहते हो,

तुम इतने क्यों लाचार बनना चाहते हो।

बार-बार माँ तुमसे यही कहती है कि अपना ले

माँ को वर्धाश्रम मत भेज।

तुम्हारे घर के सामने मुझे

छोटी सी कुटिया मुझे रहने के लिए दे दे ,

मैं उसमें रह लूँगी।

तुम सुख दो या दुःख दो

मुझे कोई फ़र्क नही पड़ता,

बस तुम दिन में एक बार दिख जाओ

इसी बात की मुझे खुशी हो।

फिर माँ वही कहती है अपना ले

माँ को वर्धाश्रम मत भेज।

जय हिंद

जय भारत

जय माँ

जय गौ माता जी

महामाया मोड़ी माताजी।

-कवि रवि पाटीदार

Hindi Poem on Importance of Time-Waqt


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वक़्त
ना जाने वो पल हाथ से कैसे छूट गया
ना जाने कब कैसे कोई अपना रूठ गया
अनजान थी मैं हर एक वो चीज़ से
ना कोई अंदाज़ा रहा और
मेरा ख्वाब यू ही टूट गया
पर अब मुझे समझ आ गया
ख्वाब दूसरा आ जाएगा
वक़्त लेकिन चला जाएगा
वक़्त ऐसी चीज़ है जो
हँसाएगा ओर रुलायेगा |
– नेहा सॉ