Category Archives: Hindi Poems on Father

Hindi Poem by Daughter to her Father on her Marriage-Beti Ka Dard


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बेटी का दर्द
पापा मुझे यूँ ओझल न कर अपनी नज़रों से…
पापा मुझे यूँ ओझल न कर अपनी नज़रों से…
माना दुनिया की रीत है ..
माना दुनिया की रीत है..
फिर भी
पापा मुझे यूँ ओझल न कर अपनी नज़रों से…
पापा मेरे तुम कहते थे मैं तुम्हारी बेटी नहीं बेटा हूं
तो क्या कोई बेटे को विदा करता है ..
पापा मुझे यूँ ओझल न कर अपनी नज़रों से..
पापा मुझे यूँ ओझल न कर अपनी नज़रों से..
-मयूरी श्रीवास्तव

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Hindi Poem for Father- मेरे पापा


मेरे पापा कह ना सका जो कभी
आपसे सुनाना चहता हूँ वो पापा
काश की सुन पाते आप मेरी ये गुजारिश पापा,
क्यूँ नही दिया मुझे वो मौका पापा,
चहता था सहारा आपका बनूँगा पापा,
चहता था साथ आपके रहूँगा पापा,
पर क्यूँ छोड़ दिया साथ मेरा पापा,
जब नही होता रस्ता कोई सोचता हुँ काश साथ होते पापा,
बिगड़ते हुए देखा है लोगो को देखा है चिल्लाते हुए पिता को,
क्यूँ नही दिया वो मौका पापा
काश की सुन पाते आप मेरी ये गुजारिश पापा ।
चले तो गये आप पापा सोचा भी नही क्या होगा मेरा पापा,
चले तो गये आप पापा पर अपने जाने का गम दे गये पापा,
अजीब सा डर है बिन आपके पापा साथ होते तो मै भी खुश होता पापा,
अच्छा लगता जाते हम भी कही मै भी लेता सेल्फी आपके साथ पापा ।
याद है वो रात जब चले गए थे पापा
बताया तो होता जा रहा हुँ मै,
एक बार तो बोला होता ध्यान रखना अपना
तरस चुका हुँ बेटा सुने पापा,
चहता था साथ आपके रहूँगा पापा,
पर क्यूँ छोड़ दिया साथ मेरा पापा ।
जब चोट लगती है तो माँ की याद आती है
पर जब मुश्किल बढ़ती है
तो आपकी ही याद आती है,
कट रही है जिन्दगी आपके बिना
भी चल रही है सांसे आपके बिना भी,
पर आप भी होते तो क्या बात होती पापा
ख्याल तो बहुत रखते है मेरा
पर आप भी रखते तो क्या बात होती पापा,
चहता था साथ आपके रहूँगा पापा,
पर क्यूँ छोड़ दिया साथ मेरा पापा,

-शोभित श्रीवास्तव

Mere papa kah na saka jo
aappse sunna chahta hoon wo papa
Kash ki sun pate aap meri ye gujarish papa
Kyu nahi diya muje wo mauka papa
Chahta tha sahara aapka banu papa
Chahta tha sath aapke rahuga papa
Par kyun chor diya sath mera papa
Jab nahi hota rasta koi sochta hoon
Kash sath hote papa
Bigadte hue dekha hai logo ko
Dekha hai chilate hue papa ko
Kyun nahi diya wo mauka papa
Kash ki sun pate aap meri ye gujarish papa
Chale to gye aap papa
Socha bhi nahi kya hoga mera papa
Chale to gye aap papa
Par apne jane ka gam de gye papa
Ajiv sa dar hai bina aapke papa
Sath hote to mein bhi khush hota papa
Acha lagta jate hum bhi kahi
Me bhi leta selfie aapke sath papa
Yaad hai wo raat jab chle gye they papa
Btaya to hota ja raha hoon
Main ek bar to bola hota dhyan rakhna apna
Tarsh chuka hoon beta sune papa
Jab chot lagti hai to maa ki yaad aati hai
Par jab mushkil badti hai to aapki yaad aati hai
Kat rahi hai zindagi aapke bina bhi
Chal rahi hai sanse aapke bina bhi
Par aap bhi hote to kya baat hoti papa
Khyaal to bhut rakhte hai mera par
Aap bhi rakhte to kya baat hoti papa
Chahta tha sath aapke rahuga papa
Par kyu chor diya sath mera papa

-Shobhit Srivastava

Hindi Poems on Father’s Day-भगवान के जैसा धरती पर


भगवान के जैसा
धरती पर ही
मिलता है जो वो
कहलाता है पिता

थाम के उंगली जब पहली बारी
उसके जिगर का टुकड़ा चला
एहसास ये उसके जीवन में जैसे
ख़ुशियों का मेला सजाता चला
जिस प्यार का कोई मोल नहीं
उस प्यार को है निभाता पिता

अपने दुखों को भूल ही जाता
देख के सारे दुःख को मेरे
मेरी हंसी के लिये खुद ही देखो
बन जाता है वो खिलौना मेरा
एक ओर चाहे दुनिया कहे कुछ भी
हमेशा तेरे संग चलता पिता

भगवान के जैसा
धरती पर ही
मिलता है जो वो
कहलाता है पिता

-शुभाशीष उपाध्याय

Bhagwaan ke jaisa
Dharti par hi
Milta hai jo wo
Kehlaata Pita

Thaam ke ungli jab pehli baari
Uske Jigar ka tukdaa chalaa
Ehsaans yeh uske jeevan mein jaise
Khushiyon ka mela sajaata Chalaa
Jis pyaar ka koi mol nahin
Us pyaar ko hai nibhaata Pita..

Apne dukho ko bhul hi jaata
Dekh ke saare dukh ko mere
Meri hansi ke liye khud hi dekho
Ban jaata hai wo khilaunaa mera
Ek aur chahe duniya kahe Kuch bhi
Hamesha tere Sangh chalta Pita

Bhagwaan ke jaisa
Dharti par hi
Milta hai jo wo
Kehlaata Pita

-Shubhashish Upadhyay

Hindi Poem for Dad – पिता जी


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मेरे पूज्य पिता जी
है सबसे बहादूर
वो सबसे बलवान
उनकी सूझ बुझ के आगे
कहाँ टिक सके कोई शैतान
वो मुझको अच्छी बातें सिखाते
मुशीबत से डट क लड़ना बताते
बाबा कहते है संघर्ष करो
मुश्किल से न तुम डरो
खूब मेहनत सच्चाई क साथ
जीत होगी तुम्हारे हाथ |
– अनुष्का सूरी 

Mere Pujya Pitaji 
Hain sabse bahadur
Wo sabse balwaan 
Unki sujh bujh ke aage 
Kahan tik sakein koi shaitan 
Wo mujhko acchi batein sikhate
Musibat se dat ke ladna batate 
Baba kehte hain sangharsh karo
Mushkil se na tum daro
Khub mehnat sachai ke sath 
Jeet hogi tumhare hath 

– Anushka Suri

Hindi Poem on Father-मेरे पिताजी


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सबसे ठोस सबसे निडर
मैने किससे बनना सीखा जी?
हाँ उनसे ही
जो हैं मेरे प्यारे पिताजी
दफ्तर से जब भी आते हर बार
मेरे लिये लाते कुछ उपहार
सत्य, प्रेम और निष्ठा की राह पर चलना
मुझे है अपने पिताजी जैसा बनना
है मेरे गुरू, है मेरी शान
मेरे लिये हैं मेरे पिताजी महान
-अनुष्का सूरी