Category Archives: Hindi Poem for Sister

Hindi Poem on Sad Girl – एक लड़की


आँखों को मूँदे
बैठी हैं कोने में  “वो”
कभी आंसू आए
तो कभी मुस्कुराये  “वो”
रिश्तों को निभाए
अपने आप में मस्त
दिल की परतों को खोले
पर राज़ गहरे छुपाएं हैं  “वो”
एकान्त में अकेली नहीं हैं  “वो”
दोस्त हैं गहरे अंधेरे में
जिसे देख न सके कोई
भीड़ में खड़ी
पर अकेली हैं आज भी  “वो”
– सुमिता कँवर

Aankhon ko mundein
Bethi kone mein wo
Kabhi aansu aaye
To kabhi muskuraye wo
Riston ko nibhaye
Apne aap mein mast
Dil ki parton ko khole
Par raaz gahre chupaye hai wo
Ekant me akeli nahi hai wo
Dost hai gahre andhere mein
Jise dekh na sake koi
Bheed mein khadi
Par akeli hai aaj bhi wo
-Sumita Kanwar

Hindi Poem for Woman- नारी


तोड़ के पिंजरा
जाने कब उड़ जाऊँगी मैं
लाख बिछा दो बंदिशे
फिर भी आसमान मैं जगह बनाऊंगी मैं
हाँ गर्व है मुझे मैं नारी हूँ
भले ही रूढ़िवादी जंजीरों सेबांधे है दुनिया ने पैर मेरे
फिर भी इसे तोड़ जाऊँगी
मैं किसी से कम नहीं सारी दुनिया को दिखाऊंगी
जो हालत से हारे ऐसी नहीं मैं लाचारी हूँ
हाँ गर्व है मुझे मैं नारी हूँ

-सोनी कुमारी

Tod ke pinjra
Jane kab ur jaungi mai,
Lakhh bichha do bandise
Phir bhi aasman mai jagah banaungi mai,
Ha garv hai mujhe mai nari hu.
Bhale Hi rudhiwadi janjiro se bandhe hai duniya ne pair mere,
Phir bhi ise tor jaungi
Mai kisi se kam nahi sari duniya ko dikhhaungi,
Jo halat se hare aisi nahi mai lachari hu,
Mai to solo pe bhi chalkar apni rah bana lu mai aisi nari hu.
Mera apna astitva hai nahi mai lachari hu
Ha garv hai mujhe mai nari hu.

-Soni Kumari

Hindi Poem for Women – समानता


अंदर से रोती फिर भी बाहर से हँसती है
बार-बार जूड़े से बिखरे बालों को कसती है
शादी होती है उसकी या वो बिक जाती है
शौक,सहेली,आजादी मायके में छुट जाती है
फटी हुई एड़ियों को साड़ी से ढँकती है
खुद से ज्यादा वो दुसरो का ख्याल रखती है
सब उस पर अधिकार जमाते वो सबसे डरती है
क्योंकि बिकी हुई औरत बगावत नही करती है।

शादी हकोर लड़की जब ससुराल में जाती है
भूलकर वो मायका घर अपना बसाती है
घर आँगन खुशियो से भरते जब वो घर में आती है
सबको खाना खिलाकर फिर खुद खाती है
जो घर संभाले तो सबकी जिंदगी सम्भल जाती है
लड़की शादी के बाद कितनी बदल जाती है।
गले में गुलामी का मंगलसूत्र लटक जाता है
सिर से उसका पल्लू गिरे तो सबको खटक जाता है
अक्सर वो ससुराल की बदहाली में सड़ती है
क्योंकि बिकी हुई औरत बगावत नही करती है।

आखिर क्यों बिक जाती, औरत इस समाज में?
क्यों डर-डर के बोलती, गुलामी की आवाज में?
गुलामी में जागती हैं, गुलामी में सोती हैं
दहेज़ की वजह से हत्याएँ जिनकी होती हैं
जीना उसका चार दीवारो में उसी में वो मरती है
क्योंकि बिकी हुई औरत बगावत नही करती है।

जिस दिन सीख जायेगी वो हक़ की आवाज उठाना
उस दिन मिल जायेगा उसे सपनो का ठिकाना
खुद बदलो समाज बदलेगा वो दिन भी आएगा
जब पूरा ससुराल तुम्हारे साथ बैठकर खाना खायेगा
लेकिन आजादी का मतलब भी तुम भूल मत जाना
आजादी समानता है ना की शासन चलाना
असमानता के चुंगल में नारी जो फँस जाती है
तानाशाही का शासन वो घर में चलाती है
समानता से खाओ समानता से पियो
समानता के रहो समानता से जियो
असमानता वाले घरों की, एक ही पहचान होती है
या तो पुरुष प्रधान होता या महिला प्रधान होती है
रूढ़िवादी घर की नारी आज भी गुलाम है
दिन भर मशीन की तरह पड़ता उन पे काम है
दुःखों के पहाड़ से वो झरने की तरह झरती है
क्योंकि बिकी हुई औरत बगावत नही करती है।

-राहुल रेड

Hindi Poem on Sister – मेरी बहना


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मेरी बहना प्यारी बहना
मेरा तो तू ही गहना
हमेशा तू मुस्काती रहना
तुझसे है बस इतना कहना
राखी मुझको बांधती रहना
तोहफा मुझसे माँगती रहना
मेरी बहना प्यारी बहना
हमेशा मेरे साथ रहना

– अनुष्का सूरी

Meri behna pyari behna
Mera to tu hi gehna
Hamesha tu muskati rehna
Tujhse hai bas itna kehna
Rakhi mujhko bandhti rehna
Tohfa mujhse mangti rehna
Meri behna pyari behna
Hamesha mere sath rehna

– Anushka suri

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