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hindi Poem on Plight of a Woman – Tum Kaun Ho


तुम कौन हो (कविता का शीर्षक )

तुम चांद की चंचल चांदनी,
या नवल पात पतझड़ की हो,
तुम ओस बूंद की मोती,
या आंखों की सबकी ज्योति हो,
हर लेती सब कष्ट पल में,
क्या शमशान की भभूती हो,!
तुम सरयू का किनारा ,
या गंगा की अमृत धारा हो,
गज़ब के गीत हो तुम गाती,
क्या राग तुम्ही मल्हार हो..!!
तुम भानु की पहली किरण,
या मुनियों का तुम कुंड हवन,
बड़े मधुर हैं बोल तेरे,
क्या छप्पन भोग मिष्ठान की हो..!
तुम उत्साह वीर जवानों का,
या खलिहान कृषि किसानों की..,
तुम जग की पालनहार,
गुणियों के आचार- विचार,
तुम कृष्ण का प्यार हो,
या राणा की तलवार हो..
बात तेरे खुद दर्शन हैं,
क्या तुम कोई अवतार हो..!!!
सूखा की तुम बदली हो,
या गर्मी की शीतल छाया हो,
रिमझिम की काली रातों का ,
क्या चंदा की कोई साया हो…
तुम जाड़े की प्यारी धूप हो
या कौम की कोई भूप हो..
सब सहके सितम तुम मौन हो..
हे स्त्री,!…
आखिर तुम कौन हो…………????
© “हैपी जौनपुरी” (रचनाकार )

English Translations for the benefit of our international and non-Hindi readers:

Tum Kaun Ho (Kavita Ka Sheershak)

Who are you? (Title of the Poem)

Tum chand ki chanchal chandni

You are the ever moving moonlight of the moon

Ya naval paat patjhad ki ho

Or are you a newly shed leaf of the patshad ritu (senescence)

Tum os boond ki moti

Are you a pearl of the dew

Ya akho ki sabki jyoti ho

Or are you the light of everyone’s eye?

Har leti sab kasht pal mei

You ease all the pain in a matter of seconds

Kya shamshan ki bhabhooti ho?

Are you the powder of the graveyard?

Tum saryu ka kinara

Are you the bank of the river Saryu?

Ya Ganga ki amrit dhara ho?

Or are you a water stream of the pure and sacred Ganges

Gazab ke geet ho tum gati

You sing very spectacular songs

Kya rag tumhi malhar ho?

Are you the raga Malhar (in classical music)?

Tum bhanu ki pehli kiran

Are you the first ray of the sun?

Ya muniyo ki tum kund hawan

Or are you the hawan kund (a vessel to perform yajya) of the Munis (personalities who have control over their mind)

Bade madhur hain bol tere

Your words are very sweet

Kya chappan bhog mishthan ki ho

Are you the 56 sweet dishes (chappan bhoga)

Tum utsah veer jawano ka

Are you the enthusiasm of brave soldiers?

Ya khalihan krishi kisano ka

Or the field of agricultural farmers

Tum jag ki palalhar

Are you the caretaker of the entire world?

Guniyon ki achar-vichar

Are you the conduct of good people (with a strong character)

Tum Krishn ka pyar ho

Are you the love of Lord Krishn?

Ya Rana ki talwar ho

Or are you the sword of King Rana?

Baat tere khud darshan hain

Your glimpse is an event in itself

Kya tum koi avtaar ho?

Are you any special incarnation?

Sukha ki tum badli ho

You are the rain for drought affected areas

Ya garmi ki sheetal chaya ho

Or are you the pleasant shade in scorching summers

Rimjhim ki kaali raato ka

Are you the dark night with twinkling stars?

Kya chanda ki koi saya ho

Are you the shadow of the moon?

Tum jaade ki pyari dhoop ho

Are you the warm sunshine of the winters?

Ya kaum ki koi bhoop ho

Or are you the representative of any race of humans

Sab sehke sitam tum maun ho

After suffering from all kinds of tortures, you are silent

He stree

Oh woman

Akhir tum kaun ho

Afterall, who are you?

Happy Jaunpuri (Poet)

Hindi Poem on Save Daughter-Beti Hai To Jahaan Hai, Beti Ek Vardaan Hai


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बेटी है तो जहान है, बेटी एक वरदान है ! 

आज देश के हर कोने में, संकट सा मंडराया है !

प्रलय काल दे रहा निमंत्रण, खतरा सिर पर आया है !!

क्यों असुरक्षित हुई बेटियाँ, हिंदुस्तान की धरती पर ?

जिसने नहीं पालकी देखी, सो चढ़ जाती अर्थी पर !!

खून बह रहा कन्याओं का, देख रहे तुम खड़े हुए !

राखी का सम्मान कहाँ है, किस लज्जा में पड़े हुए ?

नहीं बचा सकते बहनों को, ऐ भैया धिक्कार तुम्हें !

इस धरती पर जीवित रहने का, नहीं है अधिकार तुम्हें !!

कहां सो रहे धर्मवान, तुम सत्ता के गलियारे में !

कैसे देश महान रहेगा, कर्म-धर्म अंधियारे में !!

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, तुमने दिया था नारा !

होगी सुरक्षा बेटी की, अब कहाँ अभिमान तुम्हारा !!

शर्म करो ऐ नेताओं, या कुर्सी कर दो खाली !

करो काम ऐसा मंत्री जी, देश में हो खुशहाली !!

कुछ को कोख में मार दिया, नहीं माता-पिता लज्जाते !

बिना पढ़ाऐ भार समझ कर, जल्दी ब्याह कराते !!

फिर भी क्यों दहेज के कारण, आग लगाई जाती !

या तो बेटियाँ स्वयं तंग हो, फांसी पर चढ़ जाती !!

आती नहीं शर्म नामर्दों, इनकी चिता सजाते हुए !

बाहर जाकर निज कर्मों का, फिर गुणगान सुनाते हुए !

डूब मरो ऐ दुनिया वालों, तुम्हें शर्म नहीं आती है ?

क्या सुकून मिलता तुमको, अर्थी बिटिया की जाती है !!

याद रहे जो बेटी को, इस तरह सताया जाएगा !

होगी कयामत दुनिया में, कोई जीव नहीं बच पाएगा !!

ऐ भैया ये विनय हमारी, बेटी की रक्षा करना !

बहन जान कर हर लड़की के, सारे कष्टों को हरना !!

जब बेटी हो जाए सुरक्षितबेटे, बेटे समान अधिकार हो !

निश्चय डूब रही नैया और, देश का बेड़ा पार हो !!

बनकर कृष्ण दु:शासन से, द्रौपदी की लाज बचाना है!

कहे पुष्पेंद्र सिंह यादव, अपना कर्तव्य निभाना है !!
नवयुग की चाह रखने वाले क्रांति कवि -पुष्पेंद्र सिंह यादव