Category Archives: Hindi Poem on Book Reading

Hindi Poem on Book – मैं एक किताब हूँ


तो अम्बर सी ऊंचाई भी है,
एक ख्वाबों की दुनिया है
तो अत्यधिक सच्चाई भी है
इतिहास समेटू चंद पन्नों पर
तो आज का आइना भी दिखलाऊँ मैं,
रहती हूँ खामोश तो अक्सर
मगर भविष्य भी बन जाऊँ मैं
हर विकास की जड़ भी मैं
तो समस्त शिक्षित की नींव हूँ,
किसी के लिए समस्या बनूँ
तो किसी के लिए समाधान भी हूँ
व्यक्त न हो पाएं जज़्बात जो
उनके लिए वक्ता भी हूँ,
हर पीड़ा की दवा हूँ
तो हर धनवान का स्त्रोत भी हूँ
परम मित्र भी बन जाऊँ मैं
सर्वश्रेष्ठ सलाहकार हूँ,
अकेलेपन की साथी भी हूँ
हाँ, ऐसी मैं एक किताब हूँ 

-आकांक्षा भटनागर

To ambar si unchai bhi hai,
Ek khwaabon ki duniya hai
To atyadhik sacchai bhi hai.
Itihaas sametu chand panno par
To aaj ka aaina bhi dikhlau main,
Rehta hun khamosh to aksar
Magar bhavishya bhi ban jau main.
Har vikas ki jad bhi main
To samast sikshit ki neev hun,
Kisi ke liye samasya banu
To kisi ke liye samadhan bhi hun .
Vyakt na hopaye jazbaat jo
Unke liye vaktaa bhi hun,
Har peed ki dava hun
To har dhanban ka strot bhi hun.
Param Mitra bhi banjau main
Sarvshresth salahkar hun,
Akelepan ki sathi bhi hun
Haan , aise main ek kitab hun.

-Akanksha Bhatnagar

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Hindi Poem on Value of Poem – कविता


बात-बात में यूँही कभी पूछा किसी ने,
कि क्या होती है कीमत, कविता की ज़िंदगी मे,
अचानक से पूछे इस प्रश्न पर, मैं कुछ उलझा,
कुछ हँसा, कि नर है ये नादान या निरा मूर्ख है।
शायद नहीं जानता कि कविता ही इसका मूल है,
जब से नर ने जन्म लिया जन्म मरण कई बार हुआ,
किन्तु रूप मिला तुझे कविता का, सदैव नया होगा।
खुद कविता बनता जा रहा नर,
पूछता है कीमत कविता की,
कभी खुद पर भी तो गौर कर,
क्या कीमत है तेरी माटी की सत्ता की।
पल पल गुज़र रहा है तू ,
गुज़र जाएगा एक दिन,
पर कविता फिर भी मिलेगी अनवरत,
तब हैसियत तेरी कीमत चुकाने की न होगी।

-मयंक गुप्ता

Baat baat mein yuhi kabhi phucha kisi ne
Ki kya hai hai kimat,kavita ki zindgai mein
Achanak se phuche es parshaan par mein kuch uljha
Kuch hsa ki nar hai ye nadan ya nira murakh hai
Sayad nahi janta ki kavita hi eska mul hai
Jab se nar ne janam liya janam maran kai bar hua
Kintu roop mila tujhe kavita ka,sdeiv nya hoga
Khud kavita bnta ja rha nar
Phuchta hai kimat kavita ki
Kabhi khud par bhi to gaur kar
Kya kimat hai terimatti ki stah ki
Pal pal gujar rha hai tu
Gujar jayega ek din
Par kavita fir bhi milegi anvrat
Tab hasiyat teri kimat chukane ki na hogi

-Mayank Gupta

Hindi Poem on Books – किताबें पढ़ो आगे बढ़ो


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किताबें पढ़ो आगे बढ़ो
इनमें है ज्ञान आपार
घर-बाहर दिन या रात्रि
ये दोस्त सदाबहार
चाहे दुनिया की सैर करलो
या जासूसी नॉवल पढ़ लो
कभी अपना मनोबल बढ़ा लो
या कोई नया व्यंजन चढ़ा लो
किसी की जीवन गाथा पढ़ लो
या गणित के सवाल जड़ लो
ज्ञान के इस वरदान को
तुम जीवन में सेवन करलो
-अनुष्का सूरी