Category Archives: Hindi Poem on Makar sakranti

A collection of Hindi poems on the holy festival of Makar Sakranti.

Hindi Poem on Makar Sakranti-Bezubaan Parinda


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मकर संक्रांति:::: बेज़ुबान परिन्दा

बौराया हुआ शहर अपनी कटी पतंगे ढूंढ रहा है,
खामोश मांजा सर सर हाथ से निकल रहा है,
आसमान में जलती लालटेनें, रोशन सा सकरात मन रहा है,
एक बच्चा हाथ में कटी पतंगे का ढेर लिए घर लौट रहा है,
कल लाल परसों पीली दिन भर का उत्सव नहीं,
साल भर की उम्मीदें जगा रहा है,
बेखौफ जमीं की दूरी को नगें पांव खगालते,
नजरें ऊपर आसमान की रोशनियों को ढूंढते,
सामने बेसुध पडा परिन्दा, मांजे के जख्म में तर बतर सांसे गिन रहा है,
एक रोशनी होले से नीचे आयी,
आह! गाड़ियों की सरसराहट खून में तब्दील, हर शख्मुस मुआयना कर रहा है,
बेसुध परिन्दा मानो चीखे जा रहा है,
कोई मसीहा इधर भी देखे,
शहर की बेपरवाही से कोई बेजान कट रहा है,
तो कोई गिरती रोशनियों से जल रहा है,
फिर कौन कहता है कि मेरा शहर संवर रहा है,
झुठी चमक से रोशन और सच से सब कुछ दहक रहा है,
तीन से फुटपाथ पर बैठा गोलू दुबका हुआ है,
रंगीन पतंग से बहक रहा है, मांजे से कट रहा है,
और पता नहीं किस बेरहम बेपरवाही से सुकून जल रहा है,
बौराया हुआ शहर अपनी कटी पतंग को ढूंढ रहा है!!!!!!!!
डाॅ. अवन्तिका

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Hindi Poem on Makar Sakranti-मकर सक्रांति का शुभ दिन


मकर सक्रांति का शुभ दिन है आज
सूर्य देव को करेगा नमन मानव समाज
चहुँ ओर नन्हे बच्चों की टोली चलेगी
कहीं मिठाई तो कहीं हलवा पूरी तलेगी
गंगा तट पर कुम्भ मेला सजेगा
श्रद्धा युक्त दिव्य प्रेम बढ़ेगा
आकाश में पतंगों की होगी होड़
दान कर्म होगा सब मृग तृष्णा छोड़
आओ हम भी करें आज यह प्रण
करेंगे प्रभु को निश्छल समर्पण
-अनुष्का सूरी

How to read:

Makar Sakranti ka shubh din hai aj

Surya Dev ko karega naman manav samaj

Chahu or nanhe baccho ki toli chalegi

Kahin mithai to kahin halwa puri talegi

Ganga tat par Kumbh Mela sajega

Shradha yukt divya prem badhega

Akash mein patango ki hogi hod

Dan -karm hoga sab mrig trishna chod

Ao ham bhi karein aj yah pran

Karenge Prabhu ko nishchal samarpan

-Anushka Suri

English Translation:

It is the auspicious day of Makar Sakranti today

The entire human fraternity will worship Lord Sun today

Groups of young kids will wander on streets

Some places will serve sweets, while others will prepare halwa -poori (pooris are fried in oil or ghee)

Kumb Fair will be organized on the banks of River Ganges

Divine love based in strong faith will grow

Kite flying contests will flood the sky

People will engage in charity while leaving greed for materialistic objects such as wealth and property

Let us take a pledge today

We will surrender selflessly to the Supreme Lord

 

 

 

Hindi Poem on Makar sakranti


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आज का दिन है अति पावन
मकर संक्रांति का है दिन
आज उड़ेगी आकाश में पतंग
होंगे लाल पिले सब रंग
गंगा में डुबकी लगाओ
करो शीतल तन और मन
दान करो चीनी चावल धान
कमाओ पुण्या बनाओ परमार्थ
जोड़ो हाथ ईशवर से वर माँगो
सब जन जीवन का हो कल्याण

-अनुष्का सूरी

Aaj ka din hai ati pavan
Makar sakranti ka hai din
Aj udegi akash mein patang
Honge laal peele sab rang
Ganga mein dubki lagao
Karo sheetal tan aur man
Daan karo cheeni chawal dhan
Kamao punya banao parmarth
Jodo hath ishwar se war mango
Sab jan jeevan ka ho kalyan

-Anushka Suri