Hindi Poem on Bad Donation-Kapati Daan Ki Durgati

कपटी दान की दुर्गति

तुलसी दान जो देत है जल में हाथ उठाई |
प्रतिग्राही जीवै नहीं दाता नरकै जाई |

संत तुलसीदासजी कहते हैं – जो लोग जल में हाथ उठा के दान (चारा) मछलियों को फ़साने की मंशा से देते हैं, उस दान को ग्रहण करने वाली मछली तो जीती नहीं और वह दाता भी नरक में जाता है |

Tulsi daan jo det hai jal mein hath uthai.
Pratigrahi jevai nahin daata narkai jayi.

Saint Tulsidas Ji says- the people who raise their hands to donate food (offer bait) to the fish with the intention of trapping it, the fish feeding on such donation does not live and such a donor also goes to hell.

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Hindi Poem on Identity Crisis-Kaun Hoon Main

कौन हूँ मैं
आग हूँ आगाज़ हूँ खुद की गलती छुपाने वाला राज़ हूँ
झूठा हूँ फ़रेबी हूँ कल से डरने वाला आज हूँ
ज़िंदा हूँ मैं ज़िन्दगी में खुद में ही बेतहशा हूँ
सपना हूँ मैं आगे का आज का ज़िंदा लाश हूँ
लम्हा हूँ में बीते कल का आज का बुरा ख्वाब हूँ
गर्मी की धुप सर्दी की छाँव अपने मंज़िल के विपरीत पाव हूँ मैं
उत्तर हूँ मैं आगे का आज का प्रश्न चिन्ह हूँ
धीमा हूँ ज़िन्दगी मैं कल के धावक के लिए तैयार हूँ
गलती हूँ मैं पीछे का आज का नया इंसान हूँ
आग हूँ आगाज़ हूँ खुद की गलती मिटाने वाला आज हूँ !

-बबलू नाथ