Category Archives: Hindi Poems on Issues and Concerns

Hindi Poem on Crime Against Women – Choti Si Gudiya


छोटी सी गुड़िया
माँ और बाबुल की
खुशियों की पुड़िया

नाज़ों से उसको था पाला
ज़माने की बुरी नज़र से
सदा उसको संभाला

लेकिन विधाता को
था कुछ और ही मंज़ूर
दरिंदों राक्षसों के हाथों
हुई वो चकना चूर

न हैवानियत की कोई हद्द है
और अगर कोई थी भी
तो वो सब अब रद्द है

आज तो समाज में
क्रूरता और छल का
है नंगा नाच

दूसरे का सर कुचल दो
पर खुद की हवस
पर न आये आंच

ये कैसा भारत है
मैं देख कर हूँ हैरान
क्या ये वही भूमि है जहाँ
सीता राम की है अभिमान

कुछ करो देशवासियों
भगवन से ज़रा तो डरो
ऐसे भयंकर पाप
करने से पहले तुम डरो

अगर नहीं माना तुमने
और फिर भी किया मन-माना
तो फिर नरक में रह कर होगा
कल्पों तक बस पछताना

  • अनुष्का सूरी

Hindi Poem on Income Tax – Aykar


आयकर

देश प्रगति पर लाना है ।
आयकर समय पर चुकाना है।।

कर्तव्य निभाते विशेष कार्याधिकारी ।
भारी सब पे आयकर की छापेमारी ।।

सुनो नहीं है हम बेईमान ।
आयकर जमा कर बढ़ाए मान ।।

कालाधन ना बचने पाए ।
कहीं मुजरिम ना हम बन जाए ।।

कर्तव्य प्रधान से बढ़े समाज ।
जिम्मेदारी से करे कामकाज ।।

नहीं लुटेरी है सरकार ।
आयकर; विकास की दरकार।।

रीत रितिका दांगी
मध्यप्रदेश

Hindi Poem on Bad Donation-Kapati Daan Ki Durgati


कपटी दान की दुर्गति

तुलसी दान जो देत है जल में हाथ उठाई |
प्रतिग्राही जीवै नहीं दाता नरकै जाई |

संत तुलसीदासजी कहते हैं – जो लोग जल में हाथ उठा के दान (चारा) मछलियों को फ़साने की मंशा से देते हैं, उस दान को ग्रहण करने वाली मछली तो जीती नहीं और वह दाता भी नरक में जाता है |

Tulsi daan jo det hai jal mein hath uthai.
Pratigrahi jevai nahin daata narkai jayi.

Saint Tulsidas Ji says- the people who raise their hands to donate food (offer bait) to the fish with the intention of trapping it, the fish feeding on such donation does not live and such a donor also goes to hell.

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Hindi Poem on Changing Education System-Guruji


माना कि समय बहुत बदल गया है,
गूगल नॉलेज में अहम चल गया है,
हम भाग-दौड़ की जिन्दगियों में मशगूल है,
दिल का कोना मंजिलों की निगाह पर सिकुड़ गया है,
कौन देता है तवज्जो अब उन्हें भी,
जिनके वास्ते मुकाम लिखा गया है,
गुरुजी!!!!!! यूं तो पुराने ज़माने का अहसास होगा,
गुरु की समझाईश से हर मुश्किल का सरल आभास होगा,
जिनकी निगाहों में सख्ती और दिल में नरमी,
गुरु बिन ज्ञान नहीं, कालान्तर में गर्व गुरु से प्रकाश उजास होगा ,
ना जाने हम सोने को छोडकर लोहा क्यों चुनते हैं,
गुरु -शिष्य परम्परा है अनोखी, परन्तु
ऑनलाइन स्टडी मैटेरियल ढूंढने का प्रयास होगा
शिक्षा किताबी मौजू को हल करना नहीं है साहेब,
गुरु के चरणों में सीखा सर्वस्व ज्ञान ही जीवन आधार होगा,
न बांधो पाश्चात्य की दिखावी बेड़ियों से खुद को,
न रहेंगे मूल्य सुरक्षित, विकास तो होगा
पर गुरु बिन अर्जुन एकलव्य सा इतिहास नहीं होगा!!!!!!!!!!!!!!
डॉ .अवन्तिका शेखावत

Hindi Poem on Politics-Rajneeti Ki Vyatha


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राजनीति की व्यथा

क्यों मार डाला तुमने राजनीति को,
क्यों नहीं अपनाते हो अच्छी नीति को।
क्यों कलंकित कर डाला तुमने राजनीति को,
क्यों नही छोड़ते हो गन्दी नीति को।
क्या बिगाड़ा था तुम्हारा राजनीति ने,
क्यों विध्वंस कर दिया तुमने राजनीति को।
भ्रष्टाचारियों को देखकर पैसो का उतर गया रंग,
दगाबाजी नेताओं को देखकर यह गए सब दंग।
फरेब नेताओं को तुमने राजनीति में उतार दिया,
जिन्हे आती थी करना अच्छी राजनीति,
उन्हें घर में ही क्यों बिठा दिया।

-कवि रवि पाटीदार