Category Archives: Hindi Poems on Issues and Concerns

Hindi Poem on Bad Donation-Kapati Daan Ki Durgati


कपटी दान की दुर्गति

तुलसी दान जो देत है जल में हाथ उठाई |
प्रतिग्राही जीवै नहीं दाता नरकै जाई |

संत तुलसीदासजी कहते हैं – जो लोग जल में हाथ उठा के दान (चारा) मछलियों को फ़साने की मंशा से देते हैं, उस दान को ग्रहण करने वाली मछली तो जीती नहीं और वह दाता भी नरक में जाता है |

Tulsi daan jo det hai jal mein hath uthai.
Pratigrahi jevai nahin daata narkai jayi.

Saint Tulsidas Ji says- the people who raise their hands to donate food (offer bait) to the fish with the intention of trapping it, the fish feeding on such donation does not live and such a donor also goes to hell.

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Hindi Poem on Changing Education System-Guruji


माना कि समय बहुत बदल गया है,
गूगल नॉलेज में अहम चल गया है,
हम भाग-दौड़ की जिन्दगियों में मशगूल है,
दिल का कोना मंजिलों की निगाह पर सिकुड़ गया है,
कौन देता है तवज्जो अब उन्हें भी,
जिनके वास्ते मुकाम लिखा गया है,
गुरुजी!!!!!! यूं तो पुराने ज़माने का अहसास होगा,
गुरु की समझाईश से हर मुश्किल का सरल आभास होगा,
जिनकी निगाहों में सख्ती और दिल में नरमी,
गुरु बिन ज्ञान नहीं, कालान्तर में गर्व गुरु से प्रकाश उजास होगा ,
ना जाने हम सोने को छोडकर लोहा क्यों चुनते हैं,
गुरु -शिष्य परम्परा है अनोखी, परन्तु
ऑनलाइन स्टडी मैटेरियल ढूंढने का प्रयास होगा
शिक्षा किताबी मौजू को हल करना नहीं है साहेब,
गुरु के चरणों में सीखा सर्वस्व ज्ञान ही जीवन आधार होगा,
न बांधो पाश्चात्य की दिखावी बेड़ियों से खुद को,
न रहेंगे मूल्य सुरक्षित, विकास तो होगा
पर गुरु बिन अर्जुन एकलव्य सा इतिहास नहीं होगा!!!!!!!!!!!!!!
डॉ .अवन्तिका शेखावत

Hindi Poem on Politics-Rajneeti Ki Vyatha


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राजनीति की व्यथा

क्यों मार डाला तुमने राजनीति को,
क्यों नहीं अपनाते हो अच्छी नीति को।
क्यों कलंकित कर डाला तुमने राजनीति को,
क्यों नही छोड़ते हो गन्दी नीति को।
क्या बिगाड़ा था तुम्हारा राजनीति ने,
क्यों विध्वंस कर दिया तुमने राजनीति को।
भ्रष्टाचारियों को देखकर पैसो का उतर गया रंग,
दगाबाजी नेताओं को देखकर यह गए सब दंग।
फरेब नेताओं को तुमने राजनीति में उतार दिया,
जिन्हे आती थी करना अच्छी राजनीति,
उन्हें घर में ही क्यों बिठा दिया।

-कवि रवि पाटीदार

Hindi Poem on Women Empowerment-Jeene Ki Adhikari Naari


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जीने की अधिकारी नारी

ये पुरूषत्व का मोहपाश,
कर नारी का अपमान,
रचता मानव अपना ही विनाश।
जीने की अधिकारी नारी जितना है पुरूष अधिकारी।
सज्जन मानव दुर्जन मानव समाज एक ही में रहते।
सज्जनता उन्नति की द्योतक,
दुर्जन पतन को लाते है।
आती है कयामत जब अपमानित होती नारी।
जीने की अधिकारी नारी,जितना है पुरूष अधिकारी।
नारी तुम हो अपनी सहाय,
दुर्गा काली बन उभरो जग में।
क्रूर दानव रूपी मनुष्य को,
खुद पे हावी मत होने दो।
जिसने तुझसे वजूद छीना,
उसे जीने का अधिकार नही।
काट ड़ालो उन क्रूर हाथों को,
जो उठे नारी तेरे अपमान में।
तुम ही हो मनु की श्रद्धा,
तुम शिव की गौरी।
महाशक्ति,जन्मदात्री तुम ब्रह्माणी,रूद्राणी।
उठो बहुत सहा अपमान
अपनी रक्षा को स्वयं प्रवृत होवो,
अपने सम्मान को लज्जित ना होने दो।
बन नई पीढ़ी की नई लहर उभरो।
सज्जन मानव का सम्मान करो,
दुर्जन को हावी ना होने दो।
अपना अधिकार ग्रहण करो,
जिसकी तुम अधिकारी हो।
जीने की अधिकारी नारी,
जितना है पुरूष अधिकारी।

-कविता यादव

Hindi Poem on Save Daughter-Beti Hai To Jahaan Hai, Beti Ek Vardaan Hai


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बेटी है तो जहान है, बेटी एक वरदान है ! 

आज देश के हर कोने में, संकट सा मंडराया है !

प्रलय काल दे रहा निमंत्रण, खतरा सिर पर आया है !!

क्यों असुरक्षित हुई बेटियाँ, हिंदुस्तान की धरती पर ?

जिसने नहीं पालकी देखी, सो चढ़ जाती अर्थी पर !!

खून बह रहा कन्याओं का, देख रहे तुम खड़े हुए !

राखी का सम्मान कहाँ है, किस लज्जा में पड़े हुए ?

नहीं बचा सकते बहनों को, ऐ भैया धिक्कार तुम्हें !

इस धरती पर जीवित रहने का, नहीं है अधिकार तुम्हें !!

कहां सो रहे धर्मवान, तुम सत्ता के गलियारे में !

कैसे देश महान रहेगा, कर्म-धर्म अंधियारे में !!

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, तुमने दिया था नारा !

होगी सुरक्षा बेटी की, अब कहाँ अभिमान तुम्हारा !!

शर्म करो ऐ नेताओं, या कुर्सी कर दो खाली !

करो काम ऐसा मंत्री जी, देश में हो खुशहाली !!

कुछ को कोख में मार दिया, नहीं माता-पिता लज्जाते !

बिना पढ़ाऐ भार समझ कर, जल्दी ब्याह कराते !!

फिर भी क्यों दहेज के कारण, आग लगाई जाती !

या तो बेटियाँ स्वयं तंग हो, फांसी पर चढ़ जाती !!

आती नहीं शर्म नामर्दों, इनकी चिता सजाते हुए !

बाहर जाकर निज कर्मों का, फिर गुणगान सुनाते हुए !

डूब मरो ऐ दुनिया वालों, तुम्हें शर्म नहीं आती है ?

क्या सुकून मिलता तुमको, अर्थी बिटिया की जाती है !!

याद रहे जो बेटी को, इस तरह सताया जाएगा !

होगी कयामत दुनिया में, कोई जीव नहीं बच पाएगा !!

ऐ भैया ये विनय हमारी, बेटी की रक्षा करना !

बहन जान कर हर लड़की के, सारे कष्टों को हरना !!

जब बेटी हो जाए सुरक्षितबेटे, बेटे समान अधिकार हो !

निश्चय डूब रही नैया और, देश का बेड़ा पार हो !!

बनकर कृष्ण दु:शासन से, द्रौपदी की लाज बचाना है!

कहे पुष्पेंद्र सिंह यादव, अपना कर्तव्य निभाना है !!
नवयुग की चाह रखने वाले क्रांति कवि -पुष्पेंद्र सिंह यादव