Hindi poem on Coronavirus

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Hindi Poem on Coronavirus Lockdown-Corona Ko Hi Pel Diya

हमने तो कोरोना ही पेल दिया
माना थोड़ी संकट की घड़ी आयी है ,
कहीं चिंता तो कहीं तन्हाई है
पर हमने तो खेल ऐसा खेल दिया
हमने तो कोरोना को ही पेल दिया |

करते नहीं कुछ काम है
चल रहा अपना आराम है
हाथ धोकर हमने और दूर धकेल दिया
हमने कोरोना को पेल दिया |

हाँ, खाने पे ज़ोर थोड़ा ज्यादा है ,
पर वो काम तो माँ के खाते में आता है
पर बहाने तो माँ के भी तैयार हैं
कहती है घर में तेल का हाहाकार है
और फिर
फिर क्या
माँ को चुपचाप लाके तेल दिया,
और फिर से हमने तो कोरोना को ही पेल दिया ||
-मोहित सिंह चाहर ‘हित’

Hindi Poem on Unity in Times of Coronavirus-Chalo Deepak Jalayein

चलो दीपक जलाएं

कोरोना एक ज़हरीला वायरस है
कृपा इसे हिन्दू मुस्लिम ना कराएं
कोरोना के नाम इंसान को
इंसान से ना लड़ायें

जितना हो सके देश को बचाने में
अपना सहयोग आगे बढ़ाएं
चलो हम सब मिलके
कोरोना को हराएँ

राष्ट्र एकता के नाम चलो हम सब
एक-एक दीपक जलाएं
हर किसी को राष्ट्र एकता का
अहसास कराएं

चलो मिलके हिंदुस्तान को जिताएं
और
कोरोना को हरायें
चलो मिलके राष्ट्र एकता के नाम
दीपक जलाएं
राष्ट्र एकता के नाम दीपक जलाएं
-मंजीत छेत्री