Category Archives: Hindi Poems on Life

Hindi Poem on Dreams-Jeevan Ka Marg


success-846055__340

जीवन का मार्ग
मैं जिसमें चुन -चुन कर कदम रखती हूँ,
जीवन का वो हर मार्ग मैं खुद ही बनाती हूँ।
एक भूलभूलैया सा नज़र आता है खुद की आँखों में,
मै अपनी नज़रों में ही खो जाती हूँ।
जीवन किसी रेल सा गुजरता है,
मैं किसी पुल की भाँति कंपकंपाती हूँ।
मै जिसमें चुन-चुन कर कदम रखती हूँ,
जीवन का वो मार्ग मैं खुद ही बनाती हूँ।
मैं जब तेरे बारे में सोचती हूँ ,
फिर दुनियाँ भूल जाती हूँ।
मेरे हर गम में साथ तेरा है,
तेरे होने से खुश सवेरा है।
तु जो हँसता है मुझे हँसाने की खातिर,
मैं दर्द में भी हँस देती हूँ।
मैं जिसमें चुन-चुन कर कदम रखती हूँ,
जीवन का वो मार्ग मैं खुद ही बनाती हूँ।
तेरी आँखों में नज़र आता है स्वप्न मेरा,
जो मै हर रात सोते जगते देखती हूँ।
पर जब ओझल तू हो जाता है,
हर स्वप्न बुलबुले की तरह मिट जाता है।
मैं भी अपनी नादानी समझकर फिर गहरी नींद में सो जाती हूँ।
मैं जिसमें चुन-चुन कर कदम रखती हूँ,
जीवन का वो मार्ग मैं खुद ही बनाती हूँ।
-कविता यादव

Advertisements

Hindi Poem on Life-Ye Zindagi


woman-591576__340

ये ज़िन्दगी
जीने की चाह सभी को होती है सदा।
ये ज़िन्दगी नये सपने संजोती है सदा।।
अपने अरमानों को हम सजाएँ।
इन्हें और भी खूबसूरत बनाएँ।।
बन जाये बेहतर आज, कल अपना।
सदा शांति से गुज़रे हर पल अपना।।
अपनी गलती को हम सुधारें।
अच्छी दृष्टि से सबको निहारें।।
-संजय

Ye Zindagi

Jeene ki chah zabhi ko hoti hai sada

Ye zindagi naye sapne sanjoti hai sada

Apne armaano ko ham sajayein

Inhein aur bhi khoobsurat banayein

Ban jaye behatar aj, kal apna

Sada shanti se guzre har pal apna

Apni galati ko ham sudharein

Acchi drishti se sabko niharein

-Sanjay (Poet)

Hindi Poem on Life-Zindagi


india-3365733__340

ज़िन्दगी सांसों की गुलाम क्यों है?
हुकूमतें सहती, सुबह शाम क्यों है?
हर लम्हा बताता है, हम हैं तो तुम हो
कैसे गुमान करें, ज़िन्दगी हैरान क्यों है?

अटकती है, चलती है, रुकती है कभी
भारी ज़िन्दगी पे खुले आम क्यों है?

-अविनाश

Zindagi sanson ki gulaam kyo hai?

Hukumatein sehti, subah-sham kyo hai?

Har lamha batata hai, ham hain to tum ho

Kaise gumaan karein, zindagi hairan kyo hai?

Atakti hai, chalti hai, rukti hai kabhi

Bhaari zindagi pe khule aam kyo hai?

-Avinash (Poet)

Hindi Poem on Hope-Hansi Rang


hand-1917895__340

जीवन तो मौजों की धारा में बहना चाहता है
पर वैसा नहीं होता, जो मन कहना चाहता है।
सामने जो आती मुश्किलें रोकें तो कैसे रोकें?
ये आती है जाने क्यूँ?और नहीं दिल सहना चाहता है
हमें इतनी खबर तो नहीं जो जान सकें कुछ भी
कुछ जान लें चाहे पर मन चैन से रहना चाहता है
न रोक सके कोई आते-जाते मन के विचारों को
रंग भरे सपनों में मन और हँसी रंग भरना चाहता है

-संजय

Hindi Poems on Life-ज़िन्दगी का खेल


ज़िन्दगी का खेल निराला है
दुख सुख का पिटारा है
एक बात समझ में आ गई
पैसों का ही बोलबाला है यहां
खुशी भी पैसों से खरीदी जाती है
ओर गम भी पैसों की कमी से आता है
लड़ लेते हैं लोग अपनो से तब
कोई रिश्ता समझ नहीं आता है
ना जाने कितनो की ज़िन्दगीयो से
खेलेगा ये कागज का टुकड़ा
क्या बदलेगी ये दुनिया या फिर
मुझे बदलना होगा
सोच रही हूँ कब से
अब क्या करना होगा ? ?

-नेहा कुमारी

Zindagi ka khel nirala hai
Dukh sukh ka pitara hai
Ek baat smajh mein aa gayi
Paiso ka bolbala hai yhan
Khushi bhi paiso se kharidi jati hai
Aur gam bhi paiso ki kaam se aata hai
Lad lete hai log apno se tab
Koi rishta smajh nahi aata hai
Na jane kitno ki zindagiyon se
Khelega ye kagaz ka tukda
Kya badlegi ye duniya ya fir
Mujhe badalna hoga
Soch rahi hoon kab se
Ab kya karna hoga

-Neha kumari