Category Archives: Hindi Poems on Life

Hindi Poem on Life-Zindagi


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ज़िन्दगी सांसों की गुलाम क्यों है?
हुकूमतें सहती, सुबह शाम क्यों है?
हर लम्हा बताता है, हम हैं तो तुम हो
कैसे गुमान करें, ज़िन्दगी हैरान क्यों है?

अटकती है, चलती है, रुकती है कभी
भारी ज़िन्दगी पे खुले आम क्यों है?

-अविनाश

Zindagi sanson ki gulaam kyo hai?

Hukumatein sehti, subah-sham kyo hai?

Har lamha batata hai, ham hain to tum ho

Kaise gumaan karein, zindagi hairan kyo hai?

Atakti hai, chalti hai, rukti hai kabhi

Bhaari zindagi pe khule aam kyo hai?

-Avinash (Poet)

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Hindi Poem on Hope-Hansi Rang


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जीवन तो मौजों की धारा में बहना चाहता है
पर वैसा नहीं होता, जो मन कहना चाहता है।
सामने जो आती मुश्किलें रोकें तो कैसे रोकें?
ये आती है जाने क्यूँ?और नहीं दिल सहना चाहता है
हमें इतनी खबर तो नहीं जो जान सकें कुछ भी
कुछ जान लें चाहे पर मन चैन से रहना चाहता है
न रोक सके कोई आते-जाते मन के विचारों को
रंग भरे सपनों में मन और हँसी रंग भरना चाहता है

-संजय

Hindi Poems on Life-ज़िन्दगी का खेल


ज़िन्दगी का खेल निराला है
दुख सुख का पिटारा है
एक बात समझ में आ गई
पैसों का ही बोलबाला है यहां
खुशी भी पैसों से खरीदी जाती है
ओर गम भी पैसों की कमी से आता है
लड़ लेते हैं लोग अपनो से तब
कोई रिश्ता समझ नहीं आता है
ना जाने कितनो की ज़िन्दगीयो से
खेलेगा ये कागज का टुकड़ा
क्या बदलेगी ये दुनिया या फिर
मुझे बदलना होगा
सोच रही हूँ कब से
अब क्या करना होगा ? ?

-नेहा कुमारी

Zindagi ka khel nirala hai
Dukh sukh ka pitara hai
Ek baat smajh mein aa gayi
Paiso ka bolbala hai yhan
Khushi bhi paiso se kharidi jati hai
Aur gam bhi paiso ki kaam se aata hai
Lad lete hai log apno se tab
Koi rishta smajh nahi aata hai
Na jane kitno ki zindagiyon se
Khelega ye kagaz ka tukda
Kya badlegi ye duniya ya fir
Mujhe badalna hoga
Soch rahi hoon kab se
Ab kya karna hoga

-Neha kumari

Motivational Poems on Life – जीवन एक युद्ध


जीवन है एक अटल युद्ध..
तुझको लड़ना होगा ।
जीना-मरना घायल होना,
अटल सत्य होगा ।।
बढ़ता जा तू पवन-वेग से,
रहना अडिग, सीख ले तरु से,
ज्योतिर्मय कर, निकल जिधर से,
मग छायामय, कर दे मरू के….
राहें रुक भी जाएं,
तबभी तुझको चलना होगा…
जीवन है एक अटल युद्ध,
तुझको लड़ना होगा ||
रण भेरी की तान तरंगित,
घेर खड़े, योद्धागण अगणित,
होगा तू अरिमध्य अकेला,
बदले संबंधों से शंकित,
साथ पराए देंगे,
दुश्मन कोई अपना होगा…
जीवन है, एक अटल युद्ध,
तुझको लड़ना होगा ।।
स्वर्ग लोक बैठा चतुरानन,
तू दिग्भ्रमित, देख जग कानन,
स्वप्न धरे के धरे रहेंगे,
इच्छाओं के महामेरू मन…..
सांसे डोर झुलायेंगी,
सुख-दुख का पलना होगा….
जीवन है एक अटल युद्ध,
तुझको लड़ना होगा ।।
नर सा जीव नहीं कोई उत्तम,
राष्ट्रभक्ति ही भक्ति महत्तम,
मातृभूमि की एक पुकार सुन….
मृत्यु-वरण कर अमर नरोत्तम,
जन छलकेगी जिस दिन,
तेरा गवना होगा…
जीवन है एक अटल युद्ध,
तुझको लड़ना होगा ।।

-डॉ. रविन्द्र उपाध्याय “गुंजन”

Jeevan hai ek atal yudh
Tujhko ladna hoga
Jeena marna ghayal hona
Atal satya hoga
Badta ja tu pawan – beg se
Rehna adig sikh le taru se
Jyotirmaya kar nikal jidhr se
Mag chayamaya kar de maru ke
Rahein ruk kbhi jaye
Tab bhi tujhko chalna hoga
Jeevan hai ek atal yudh
Tujhko ladna hoga
Ran bheri ki taan tarangit
Gher khade yaudhagan aganit
Hoga tu arimadhya akela
Badle sambandho se shankit
Sath paraye denge
Dushman koi apna hoga
Jeevan hai ek atal yudh
Tujhko ladna hoga
Swarg baith chaturanan
Tu digrbhramit dekh jag kanan
Swapn dhare ke dhare rahenge
Ichchao ke mahameru man
Saanshein dor jhulayengi
Such dukh ka palan hoga
Jeevan hai ek atal yudh
Nar sa jeev nahi koi uttam
Rashtrabhakti hee bhakti hi mehttam
Matrbhumi ki ek pukar sun
Mrityu varan kar amar narottam
Jan chhalkegi jis din
Tera gawana hoga
Jeevan hai ek atal yudh
Tujhko ladna hoga

– Dr. Ravinder Upadhayay “Gunjan”

Hindi Poem On Self Improvement – खो कर अपने आप को


खो कर अपने आप को क्या कोई दूर जा पाया है
झूठे नाम के ख़ातिर ख़ुद को भुलाया है
ऐ बन्दे समझ तू अपनी असलियत को
ईस्वर तुझे इस संसार के लिये बनाया है
जो गुज़र गया है उसमे खुद को तूने समझाया है
आने वाली कल की चिंता ने आज को जलाया है
क्यों समझ नहीं आता इन प्यारे बुद्धि जीवियों को
की परमात्मा ने सब इसी पल के लिये बनाया है
बेबस हो रहा है पर खुद को  ना शक्तिशाली बनाया है
हो रही मुश्क़िलों को औरों वजह बताया है
एक काम जो तू वर्षो से टालता आया है
जरा रुक ! और देख ईश्वर ने तुझे एक ख़ासियत से बनाया है

– नवनीत कुमार तिवारी

Khokar apne aap ko Kya Koi door jaa paya hai,
Jhuthe naam ke khatir khud ko bhulaya hai
Ae bande samajh tu apni asaliyat ko,
Eswar ne tujhe iss sansar ke liye banaya hai.
Jo guzar Gaya hai usme khud ko tune samaya hai,
Aane wali Kal ki chinta ne aaj ko jalaya hai,
Kyo samajh nahi aata inn pyare budhhijiviyon ko,
Ki parmaatma ne sab isi pal ke liye banaya hai.
Bebas ho Raha hai par khud kp na shaktishali banaya hai,
Ho Rahi mushkilon ko auron ki wajah bataya hai,
Ek Kam Jo tu varso se talta aaya hai ,
Jara rukk! Aur dekh eswar ne tujhe ek khashiyat se bunaya hai..

-Navneet Kumar Tiwari