Tag Archives: hindi poems on life struggle

Hindi Poem on Life-Zindagi


india-3365733__340

ज़िन्दगी सांसों की गुलाम क्यों है?
हुकूमतें सहती, सुबह शाम क्यों है?
हर लम्हा बताता है, हम हैं तो तुम हो
कैसे गुमान करें, ज़िन्दगी हैरान क्यों है?

अटकती है, चलती है, रुकती है कभी
भारी ज़िन्दगी पे खुले आम क्यों है?

-अविनाश

Zindagi sanson ki gulaam kyo hai?

Hukumatein sehti, subah-sham kyo hai?

Har lamha batata hai, ham hain to tum ho

Kaise gumaan karein, zindagi hairan kyo hai?

Atakti hai, chalti hai, rukti hai kabhi

Bhaari zindagi pe khule aam kyo hai?

-Avinash (Poet)

Advertisements

Never Quit Poem in Hindi-Kayi Baar Shuruwat Ki Hai


woman-591576__340

कई बार शुरुवात की है

कई बार शुरुवात की है,
कई बार नाकाम हुआ हूँ
नहीं है आसान, कोशिश कर लो
यूं ही नहीं बदनाम हुआ हूँ

आसानी से कहते हैं सब
ऐसी क्या बड़ी बात है वहां
सबसे अनुरोध करूंगा मैं
आकर देखो मेरे साथ यहाँ

आकर देखो कैसे मैं
हर रोज़ ही खुद से लड़ता हूँ
एक जीत की आस में खुद से मैं
हर रोज़ ही हारता रहता हूँ

करता हूँ कोशिश छोड़ सकूं
आलस्य और अवरोधों को
पढ़ता हूँ इसी उम्मीद में
माँ के दिए उन श्लोकों को

करता हूँ कोशिश कहीं मुझे
मिल जाए कोई राह नई
अपने इस विचलित मन को मैं
कर सकूँ नियंत्रित काश कभी

सुनता हूँ लोगों को मैं
जो चले कभी थे राह यही
थे जीते वे इस शत्रु से
और पाया था परिणाम सही

हर रात को सोने से पहले
कहता हूँ कल बेहतर होगा
करता हूँ आशा रोज़ यही
शायद नया कोई अवसर होगा

सुना है समय लगता है,
मन को नियंत्रित करने में
बनना मनुष्य आसान नहीं
आसान है ये सब कहने में

शायद समझा हूँ कुछ हद तक
क्या अर्जुन को समझाया था
शत्रु प्रबल तो वहां भी था
पर अर्जुन पर श्री कृष्ण का साया था

पर छोड़ के आशा का दामन
होने वाला कुछ काम नहीं
चलो चलता हूँ फिर लड़ता हूँ
शायद अभी आराम नहीं

करता हूँ एक शुरुवात नई
एक और मैं कोशिश करता हूँ
हो शायद सच जो सुना था मैंने
कोशिश करने वालों की हार नहीं

-मुसाफिर 

Hindi Poem on Motivation-Chalta Chal


wanderer-455338__340 (1)

चलता चल

ग़म छूपा हँसता चल
खुद को ही छलता चल ।

कदमों में है मंजिल
बस उम्मीदें करता चल ।

राहें तो हैं मुश्किल
हिम्मत कर बढ़ता चल ।

रो मत कायर बनकर
आँसू पी लड़ता चल ।

रौशन कर दिल की लौ
अन्दर से जलता चल ।
-अजय प्रसाद

टी जी टी इंग्लिश
डीऐवी पीएस पीजीसी बिहारशरीफ़
नालंदा, बिहार-८०३२१६

Hindi Poem on Motivation – क्या बात करूँ


क्या बात करूँ मैं लोगो की
सब आप बताये बैठे है
कुछ दर्द छुपाये बैठे है
कुछ ख़्वाब छुपाये बैठे है

कुछ हस्ते है ऊपर ऊपर
कुछ रोते है नकली नकली
कुछ बातें ऐसे करते है
संसार चलाये बैठे है

सच झूठ किसी की बातों का
कुछ पता नहीं चलता अब तो
कुछ के सच भी अब झूठ लगे
कुछ झूठ चलाये बैठे है

ख्वाबों का पर्दा यहाँ पर अब
बंद सा है खुलता ही नहीं
संसार समाज सभी अपने
अधिकार बताये बैठे है

इस दुनिया में अगर कुछ करना है
अपनी मर्ज़ी की करना तू
हो सफल अगर तो बात ही क्या
पर न हो तो मत डरना तू

बस चलता जा तू सही डगर
और पीछे कभी न मुड़ना तू
जब पहुंचेगा तू मज़िल पर
वो बात अलग ही सी होगी

तुझसे मिलने को सब “वोह ” लोग
कतार लगाये बैठे है

-मुसाफ़िर

Kya baat karu mein logo ki,
Sab aap bataye baithe hai.
Kuch dard chupaye baithe hai,
Kuch khawab chupaye baithe hai.

Kuch haste hai upar upar,
Kuch rote hai nakli nakli.
Kuch baatein aesi karte hai,
Sansar chalye baithe hai.

Sach jhooth kisi ki baaton ka,
Kuch pata nhi chalta ab toh.
Kuch ke sach bhi ab jhooth lage,
Kuch jhooth chalye baithe hai.

Khwabon ka parda yaha par ab,
Band sa hai khulta hi nahi.
Sansar samaj sabhi apne,
Adhikar bataye baithe hai.

Is duniya me agar kuch karna hai,
Apni marzi ki karna tu.
Ho safal agar to baat hi kya,
Par na ho to mat darna tu.

Bas chalta ja tu sahi dagar,
Or peeche kabhi na mudna tu.
Jab pahuchega tu manzil par,
Vo baat alag hi si hogi,

Tujhse milne ko sab “voh” log,
Kataar lagaye baithe hai..

-Musafir

Hindi Poem On Self Improvement – खो कर अपने आप को


खो कर अपने आप को क्या कोई दूर जा पाया है
झूठे नाम के ख़ातिर ख़ुद को भुलाया है
ऐ बन्दे समझ तू अपनी असलियत को
ईस्वर तुझे इस संसार के लिये बनाया है
जो गुज़र गया है उसमे खुद को तूने समझाया है
आने वाली कल की चिंता ने आज को जलाया है
क्यों समझ नहीं आता इन प्यारे बुद्धि जीवियों को
की परमात्मा ने सब इसी पल के लिये बनाया है
बेबस हो रहा है पर खुद को  ना शक्तिशाली बनाया है
हो रही मुश्क़िलों को औरों वजह बताया है
एक काम जो तू वर्षो से टालता आया है
जरा रुक ! और देख ईश्वर ने तुझे एक ख़ासियत से बनाया है

– नवनीत कुमार तिवारी

Khokar apne aap ko Kya Koi door jaa paya hai,
Jhuthe naam ke khatir khud ko bhulaya hai
Ae bande samajh tu apni asaliyat ko,
Eswar ne tujhe iss sansar ke liye banaya hai.
Jo guzar Gaya hai usme khud ko tune samaya hai,
Aane wali Kal ki chinta ne aaj ko jalaya hai,
Kyo samajh nahi aata inn pyare budhhijiviyon ko,
Ki parmaatma ne sab isi pal ke liye banaya hai.
Bebas ho Raha hai par khud kp na shaktishali banaya hai,
Ho Rahi mushkilon ko auron ki wajah bataya hai,
Ek Kam Jo tu varso se talta aaya hai ,
Jara rukk! Aur dekh eswar ne tujhe ek khashiyat se bunaya hai..

-Navneet Kumar Tiwari