Tag Archives: hindi poems on life struggle

Hindi Poem on Storytellers-Kahani


कहानी
चलो आज एक कहानी और लिखी जाये
जिस पर दो-तीन बातें खुल कर बोली जायें
चाहे किसी को पसंद आये चाहे न आये
मेरा तो काम है कि हम बस यूं ही लिखते जायें
कई लोग हमें हर बार बस सौ-सौ ताने सुनायें
मगर ये कलम भी किसी से कुछ कम नहीं
ये हमारा हर परिस्थिति में खूब साथ निभाए
ये कलम कहीं अकेली न रह जाये इसलिए,
दिल और दिमाग ने भी खूब पेंच लड़ाए
ये सोच भी कहीं हमारी पीछे न रह जाये
इसलिए हम अब इसे बाहर की और ले आये
छोटे- छोटे से शब्द में हम यूं डूबते जायें
अब इस कहानी के समंदर में लहरें भी मौज उड़ाएँ
कहानियों में हम इस तरह घूमते जायें
ये वक्त कब गुज़रे पता भी न चल पाये
कब दिन चढ़ जाये और रात ढल जाये
मेरे दिल को बस ये यूं ही भाते जाए
इन कागज़ों पर अनोखा संसार नज़र आये
कलम की नाव में सवार होकर मन हिचकोले खाये
और ये सोच भी मांझी का किरदार निभाए
ज़िन्दगी के नए-पुराने किस्से उभरते हुए आये
जो हमें हमारे ही किरदार की कहानी दिखाएं
इन पलों को हम एक बार फिर से जीते जायें
मेरा मन बस यही एक बोल कहता जाये
चलो एक कहानी और फिर से लिखी जाये
-अंजलि सुवासिया (रचनाकार )

Hindi Poem on Life Struggle-Safar


सफ़र

सफ़र पर निकल पड़ो मन में संकल्प लेकर
चाहे अमावस की रात हो या पूनम का चांद
चाहे आये तुफान या तनी हों बन्दूकें
ना डरना है ना गिरना है ना भागना है
डरना क्यों आत्मविश्वास जब बलवान है
मुस्कुराके आगे बढ़ते रहो हिम्मत न हारो
असफलता एक चूनौती है, स्वीकार करो
नीद चैन को संघर्ष पथ पर, बलिहार करो
लगे रहो जब तक न सफलता साथ हो
हमेशा हर समय बस लक्ष्य की ही बात हो

-दीपान्जली
दीपा रामदास शिंपी नवसारी गुजरात
3/12/2019


Hindi Poem on Life-Zindagi


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ज़िन्दगी सांसों की गुलाम क्यों है?
हुकूमतें सहती, सुबह शाम क्यों है?
हर लम्हा बताता है, हम हैं तो तुम हो
कैसे गुमान करें, ज़िन्दगी हैरान क्यों है?

अटकती है, चलती है, रुकती है कभी
भारी ज़िन्दगी पे खुले आम क्यों है?

-अविनाश

Zindagi sanson ki gulaam kyo hai?

Hukumatein sehti, subah-sham kyo hai?

Har lamha batata hai, ham hain to tum ho

Kaise gumaan karein, zindagi hairan kyo hai?

Atakti hai, chalti hai, rukti hai kabhi

Bhaari zindagi pe khule aam kyo hai?

-Avinash (Poet)

Never Quit Poem in Hindi-Kayi Baar Shuruwat Ki Hai


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कई बार शुरुवात की है

कई बार शुरुवात की है,
कई बार नाकाम हुआ हूँ
नहीं है आसान, कोशिश कर लो
यूं ही नहीं बदनाम हुआ हूँ

आसानी से कहते हैं सब
ऐसी क्या बड़ी बात है वहां
सबसे अनुरोध करूंगा मैं
आकर देखो मेरे साथ यहाँ

आकर देखो कैसे मैं
हर रोज़ ही खुद से लड़ता हूँ
एक जीत की आस में खुद से मैं
हर रोज़ ही हारता रहता हूँ

करता हूँ कोशिश छोड़ सकूं
आलस्य और अवरोधों को
पढ़ता हूँ इसी उम्मीद में
माँ के दिए उन श्लोकों को

करता हूँ कोशिश कहीं मुझे
मिल जाए कोई राह नई
अपने इस विचलित मन को मैं
कर सकूँ नियंत्रित काश कभी

सुनता हूँ लोगों को मैं
जो चले कभी थे राह यही
थे जीते वे इस शत्रु से
और पाया था परिणाम सही

हर रात को सोने से पहले
कहता हूँ कल बेहतर होगा
करता हूँ आशा रोज़ यही
शायद नया कोई अवसर होगा

सुना है समय लगता है,
मन को नियंत्रित करने में
बनना मनुष्य आसान नहीं
आसान है ये सब कहने में

शायद समझा हूँ कुछ हद तक
क्या अर्जुन को समझाया था
शत्रु प्रबल तो वहां भी था
पर अर्जुन पर श्री कृष्ण का साया था

पर छोड़ के आशा का दामन
होने वाला कुछ काम नहीं
चलो चलता हूँ फिर लड़ता हूँ
शायद अभी आराम नहीं

करता हूँ एक शुरुवात नई
एक और मैं कोशिश करता हूँ
हो शायद सच जो सुना था मैंने
कोशिश करने वालों की हार नहीं

-मुसाफिर 

Hindi Poem on Motivation-Chalta Chal


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चलता चल

ग़म छूपा हँसता चल
खुद को ही छलता चल ।

कदमों में है मंजिल
बस उम्मीदें करता चल ।

राहें तो हैं मुश्किल
हिम्मत कर बढ़ता चल ।

रो मत कायर बनकर
आँसू पी लड़ता चल ।

रौशन कर दिल की लौ
अन्दर से जलता चल ।
-अजय प्रसाद

टी जी टी इंग्लिश
डीऐवी पीएस पीजीसी बिहारशरीफ़
नालंदा, बिहार-८०३२१६