Category Archives: Hindi Poems on Positive Attitude

Inspirational Hindi Poem-Sahyog


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सहयोग
करें हम सदा सहयोग सभी का ।
यही मकसद हो अपनी ज़िन्दगी का ।।
ये जिंदगी मिली बड़ी रहमतों से,
इसे हम सँवारे ,इसे हम सजाएँ।
करे खूब कोशिश, मेंहनत के बल पे इसे और बेहतर बनाएँ।।
मुश्किलें हरा दें, जहाँ को दिखा दें अपने दम पर हम ।
ना हारें कभी किसी बात से डटे रहे जीवन भर हम।।
-संजय

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Hindi Poems on Life-ज़िन्दगी का खेल


ज़िन्दगी का खेल निराला है
दुख सुख का पिटारा है
एक बात समझ में आ गई
पैसों का ही बोलबाला है यहां
खुशी भी पैसों से खरीदी जाती है
ओर गम भी पैसों की कमी से आता है
लड़ लेते हैं लोग अपनो से तब
कोई रिश्ता समझ नहीं आता है
ना जाने कितनो की ज़िन्दगीयो से
खेलेगा ये कागज का टुकड़ा
क्या बदलेगी ये दुनिया या फिर
मुझे बदलना होगा
सोच रही हूँ कब से
अब क्या करना होगा ? ?

-नेहा कुमारी

Zindagi ka khel nirala hai
Dukh sukh ka pitara hai
Ek baat smajh mein aa gayi
Paiso ka bolbala hai yhan
Khushi bhi paiso se kharidi jati hai
Aur gam bhi paiso ki kaam se aata hai
Lad lete hai log apno se tab
Koi rishta smajh nahi aata hai
Na jane kitno ki zindagiyon se
Khelega ye kagaz ka tukda
Kya badlegi ye duniya ya fir
Mujhe badalna hoga
Soch rahi hoon kab se
Ab kya karna hoga

-Neha kumari

Hindi Poems on Motivation – नामुमकिन कुछ भी नही


मत सोच ,
तु है कुछ भी नही
बस सोच,
सब कुछ है
सही सही
हो जाए गर असफल ,
होना दुखी नही
समेट अपनी ताकत
रही सही बस
फिर देखना नामुमकिन
कुछ भी नही…

– वंदना सिलोरा 

Mat soch
Tu he kuch bhi nhi
Bas soch
Sab kuch hai
sahi sahi
Ho jaye agar asafal
To hona dukhi nhi
Samet apni takat
Rahi sahi  Bas
Phir dekhna namumkin
Kuchh bhi nhi…

-Vandana silora

Hindi Poem On Confidence – मैं बातें बनाता नहीं


फिसल जाती जुबान, निकल जाते लफ्ज़।
ह्रदय के किसी छोर से।
मैं बातें बनाता नहीं, बस बन जाती है।

मिट्टी से सृजित काया इसी में मिल जाएगी।
तो अहं कैसा,किस बात का।
मैं बातें बनाता नहीं, बस बन जाती है।

ना बड़ा,ना श्रेष्ठ, अभी तो अबोध हूँ।
बालक हूँ,ह्रदय भी बालक तुच्छ-सा,र्निविकार।
मैं बातें बनाता नहीं, बस बन जाती है।

सिध्दांत से अनभिज्ञ हूँ.
अन्तःमन की हर व्यथा व्यक्त कर देता हूँ।
शब्द जरुर कम होँगे, मगर भाव नहीं।
मैं बातें बनाता नहीं, बस बन जाती है।

जीवन ने इम्तिहान लिया,
बदले में अनुभव दिया।
उसी अनुभव के सहारे, चल पडा हूँ।
मैं बातें बनाता नहीं, बस बन जाती है।

-हितेश कुमार गर्ग

Fisal jati hai zubaan, nikal jati hai lafz
Hriday ke kisi chhor se
Main baatein banata nahi, bas ban jati hai

Mitti se sarjit kaya esi mein mil jayegi
To ahan kesa kis baat ka
Main baatein banata nahi, bas ban jati hai

Na bada, na shreshth, abhi to abodh hoon
Balak hoon hriday bhi balak tuchh-sa nirvikaar
Main baatein banata nahi, bas ban jati hai

Sidhant se anbhigy hoon
Anat:man ki har vyatha vyakat kar deta hoon
Shabad jarur kam honge magar bhav nahi
Main baatein banata nahi, bas ban jati hai

Jivan ne imtihaan liya
Badle me anubhav diya
Usi anubhav ke share chal pda hoon
Main baatein banata nahi, bas ban jati hai

-Hitesh Kumar Garg

Hindi Poems on Emotions – मैं मूक नहीं


इन विचारोँ की उधेडबुन मे,
ढूँढ कहाँ से लाऊ दो शब्द
परन्तु ये अहं नहीं ।
मैं मौन,पर मूक नहीं।

देखा है मौन समुद्र मेँ,
लहरोँ को उमडते उतरते
परन्तु ये विनाशक नहीं ।
मैं मौन,पर मूक नहीं।

देखा है स्थिर भूधर को
कंपन के आक्रोश से हिलते
परन्तु ये भीषण नहीं।
मैं मौन,पर मूक नहीं।

देखा है तपते लौह को,
अग्नि के आवेग से
परन्तु ये पश्चाताप नहीं।
मैं मौन,पर मूक नहीं।

देखा है उन विचारोँ को,
दबते शब्दोँ के अभाव से
परन्तु मैं मूक नहीं।
परन्तु मैं  मूक नहीं।

-हितेश कुमार गर्ग

En vicharon ki udhedbun mein
Dhund khan se laun do shabd
Parntu ye ahn nahi
Main maun, par mook nahi

Dekha hai maun smander mein
Lahron ko umdte utrate
Parntu ye vinashak nahi
Main maun, par mook nahi

Dekha hai shithar bhudar ko
Kampan me akrosh se hilte
Parantu ye bhishan nahi
Main maun, par mook nahi

Dekha hai tapte lohe ko
Agani ke aaveg se
Parntu ye pschtap nahi
Main maun, par mook nahi

Dekha hai un vicharon ko
Dabte shbdo ke abhab se
Parntu main mook nahi
Parntu main mook nahi

-Hitesh Kumar Garag