Category Archives: Hindi poem on Earth

Hindi poem on Earth- धरती मां की गोद




हंसी-हंसी से बनी मुस्कान मां कहती
मुझसे धरती भी तेरी मां बनी,
खेल- कूद लपक -झपक तु इस पर ही आएगा
सिंचे इसमें जो खून पसीना वो कहलावे किसान।
हंसी-हंसी से बनी मुस्कान, हंसी-हंसी से बनी मुस्कान।
लोट-पोट हो जाऊं इसमें नींद न आवे तो सो जाऊं इसमें,
प्रकृति कि पूजा भगवान का नाम दूजा
इसका जो करें उच्चार वो कहलावे इंसान।
हंसी-हंसी से बनी मुस्कान, हंसी-हंसी से बनी मुस्कान।

-आशिफ अंसारी

Hansi hansi se bani muskaan maa kahati
Mujhse dharti bhi teri maa bani
Khel-kud lapak-jhpak tu es par hi aayega
Sinchhe esme jo khun pasina wo kahlaave kisaan
Hansi hansi se bani muskaan, hansi hansi se bni muskaan
Hansi hansi se lot-pot ho jaun esme neend na aawe to so jaun esme
Prakarti ki pooja bhgwaan ka naam dooja
Eska jo kare uchchaar wo kahlaave insaan
Hansi hansi se bani muskaan, hansi hansi se bni muskaan

-Asif Ansari

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Hindi poem on earth – धरती माँ


dharti

माटी से ही जन्म हुआ है
माटी में ही मिल जाना है
धरती से ही जीवन अपना
धरती पर ही सजे सब सपना
सब जीव जन्तु धरती पर रहते
गंगा यमुना यही पर बहते
सब्जी फल यहाँ ही उगते
धन फसल यहाँ ही उपजे
धरती माँ की देख रेख कर
हमको फर्ज़ निभाना है

– अनुष्का सूरी

 

Mati se hi janam hua hai
Mati mein hi mil jana hai
Dharti se hi jeevan apna
Dharti par hi saje sab sapna
Sab jeev jantu dhara par rahte
Ganga Yamuna yahi par bahte
Sabji Fal yahan hi ugte
Dhan Fasal yahan hi upje
Dharti ma ki dekh rekh kar
Hamko farz nibhana hai

-Anushka Suri