Hindi poem on Earth- धरती मां की गोद

हंसी-हंसी से बनी मुस्कान मां कहती मुझसे धरती भी तेरी मां बनी, खेल- कूद लपक -झपक तु इस पर ही आएगा सिंचे इसमें जो खून पसीना वो कहलावे किसान। हंसी-हंसी से बनी मुस्कान, हंसी-हंसी से बनी मुस्कान। लोट-पोट हो जाऊं इसमें नींद न आवे तो सो जाऊं इसमें, प्रकृति कि पूजा भगवान का नाम दूजा […]

Hindi poem on earth – धरती माँ

माटी से ही जन्म हुआ है माटी में ही मिल जाना है धरती से ही जीवन अपना धरती पर ही सजे सब सपना सब जीव जन्तु धरती पर रहते गंगा यमुना यही पर बहते सब्जी फल यहाँ ही उगते धन फसल यहाँ ही उपजे धरती माँ की देख रेख कर हमको फर्ज़ निभाना है – […]

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