Category Archives: Hindi Poems on Emotions

Hindi Poem on Grief -Pattey

पत्ते

टूट के बिखरी मैं भी हूँ
जैसे बिखरते है पत्ते शाखों से टूट कर।
रोज़ ज़माना मसल कर चला जाता है उन पत्तों को,
उन हज़ार पत्तों में एक पत्ता में भी तो हूँ।

इंतज़ार रहता है उस हवा के झोंके का
जो,कहीं दूर ले चले मुझे उसके साथ
अब मुझे यह रुसवाई चुभने लगी है।

-स्रेष्ठा

Tut ke bikhri mein bhi hoon
Jaise bikhar te hain patte sakho se tut kar.
Roz zamana masalkar chala jata hain un patto ko,
Un hazar patto mein ek patta mein bhi to hu

Intezar raheta hain us hawa ke jhooke ka
Jo, kahi dur le chale mujhe uske sath
Ab mujhe yeh ruswaa-e chubhne lagi hain.

Sreshtha

Hindi Poem on Identity Crisis-Kaun Hoon Main

कौन हूँ मैं
आग हूँ आगाज़ हूँ खुद की गलती छुपाने वाला राज़ हूँ
झूठा हूँ फ़रेबी हूँ कल से डरने वाला आज हूँ
ज़िंदा हूँ मैं ज़िन्दगी में खुद में ही बेतहशा हूँ
सपना हूँ मैं आगे का आज का ज़िंदा लाश हूँ
लम्हा हूँ में बीते कल का आज का बुरा ख्वाब हूँ
गर्मी की धुप सर्दी की छाँव अपने मंज़िल के विपरीत पाव हूँ मैं
उत्तर हूँ मैं आगे का आज का प्रश्न चिन्ह हूँ
धीमा हूँ ज़िन्दगी मैं कल के धावक के लिए तैयार हूँ
गलती हूँ मैं पीछे का आज का नया इंसान हूँ
आग हूँ आगाज़ हूँ खुद की गलती मिटाने वाला आज हूँ !

-बबलू नाथ