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Hindi Poem on Motivation-Manzil


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मंज़िल
जो बढ़ा है ,अपना कदम आगे।
वो रुके ना किसी डर से पीछे।।
हमें हिम्मत से बढ़ना होगा।
नया आयाम फिर से घड़ना होगा।
ये मुश्किल कुछ पल की हट जायेगी।
हमे यकीं है, मंज़िल ज़रूर नज़र आएगी।।
-संजय

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Hindi Poem On Self Improvement – खो कर अपने आप को


खो कर अपने आप को क्या कोई दूर जा पाया है
झूठे नाम के ख़ातिर ख़ुद को भुलाया है
ऐ बन्दे समझ तू अपनी असलियत को
ईस्वर तुझे इस संसार के लिये बनाया है
जो गुज़र गया है उसमे खुद को तूने समझाया है
आने वाली कल की चिंता ने आज को जलाया है
क्यों समझ नहीं आता इन प्यारे बुद्धि जीवियों को
की परमात्मा ने सब इसी पल के लिये बनाया है
बेबस हो रहा है पर खुद को  ना शक्तिशाली बनाया है
हो रही मुश्क़िलों को औरों वजह बताया है
एक काम जो तू वर्षो से टालता आया है
जरा रुक ! और देख ईश्वर ने तुझे एक ख़ासियत से बनाया है

– नवनीत कुमार तिवारी

Khokar apne aap ko Kya Koi door jaa paya hai,
Jhuthe naam ke khatir khud ko bhulaya hai
Ae bande samajh tu apni asaliyat ko,
Eswar ne tujhe iss sansar ke liye banaya hai.
Jo guzar Gaya hai usme khud ko tune samaya hai,
Aane wali Kal ki chinta ne aaj ko jalaya hai,
Kyo samajh nahi aata inn pyare budhhijiviyon ko,
Ki parmaatma ne sab isi pal ke liye banaya hai.
Bebas ho Raha hai par khud kp na shaktishali banaya hai,
Ho Rahi mushkilon ko auron ki wajah bataya hai,
Ek Kam Jo tu varso se talta aaya hai ,
Jara rukk! Aur dekh eswar ne tujhe ek khashiyat se bunaya hai..

-Navneet Kumar Tiwari

Hindi Poem On Confidence – मैं बातें बनाता नहीं


फिसल जाती जुबान, निकल जाते लफ्ज़।
ह्रदय के किसी छोर से।
मैं बातें बनाता नहीं, बस बन जाती है।

मिट्टी से सृजित काया इसी में मिल जाएगी।
तो अहं कैसा,किस बात का।
मैं बातें बनाता नहीं, बस बन जाती है।

ना बड़ा,ना श्रेष्ठ, अभी तो अबोध हूँ।
बालक हूँ,ह्रदय भी बालक तुच्छ-सा,र्निविकार।
मैं बातें बनाता नहीं, बस बन जाती है।

सिध्दांत से अनभिज्ञ हूँ.
अन्तःमन की हर व्यथा व्यक्त कर देता हूँ।
शब्द जरुर कम होँगे, मगर भाव नहीं।
मैं बातें बनाता नहीं, बस बन जाती है।

जीवन ने इम्तिहान लिया,
बदले में अनुभव दिया।
उसी अनुभव के सहारे, चल पडा हूँ।
मैं बातें बनाता नहीं, बस बन जाती है।

-हितेश कुमार गर्ग

Fisal jati hai zubaan, nikal jati hai lafz
Hriday ke kisi chhor se
Main baatein banata nahi, bas ban jati hai

Mitti se sarjit kaya esi mein mil jayegi
To ahan kesa kis baat ka
Main baatein banata nahi, bas ban jati hai

Na bada, na shreshth, abhi to abodh hoon
Balak hoon hriday bhi balak tuchh-sa nirvikaar
Main baatein banata nahi, bas ban jati hai

Sidhant se anbhigy hoon
Anat:man ki har vyatha vyakat kar deta hoon
Shabad jarur kam honge magar bhav nahi
Main baatein banata nahi, bas ban jati hai

Jivan ne imtihaan liya
Badle me anubhav diya
Usi anubhav ke share chal pda hoon
Main baatein banata nahi, bas ban jati hai

-Hitesh Kumar Garg