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Hindi Poem on Motivation – क्या बात करूँ


क्या बात करूँ मैं लोगो की
सब आप बताये बैठे है
कुछ दर्द छुपाये बैठे है
कुछ ख़्वाब छुपाये बैठे है

कुछ हस्ते है ऊपर ऊपर
कुछ रोते है नकली नकली
कुछ बातें ऐसे करते है
संसार चलाये बैठे है

सच झूठ किसी की बातों का
कुछ पता नहीं चलता अब तो
कुछ के सच भी अब झूठ लगे
कुछ झूठ चलाये बैठे है

ख्वाबों का पर्दा यहाँ पर अब
बंद सा है खुलता ही नहीं
संसार समाज सभी अपने
अधिकार बताये बैठे है

इस दुनिया में अगर कुछ करना है
अपनी मर्ज़ी की करना तू
हो सफल अगर तो बात ही क्या
पर न हो तो मत डरना तू

बस चलता जा तू सही डगर
और पीछे कभी न मुड़ना तू
जब पहुंचेगा तू मज़िल पर
वो बात अलग ही सी होगी

तुझसे मिलने को सब “वोह ” लोग
कतार लगाये बैठे है

-मुसाफ़िर

Kya baat karu mein logo ki,
Sab aap bataye baithe hai.
Kuch dard chupaye baithe hai,
Kuch khawab chupaye baithe hai.

Kuch haste hai upar upar,
Kuch rote hai nakli nakli.
Kuch baatein aesi karte hai,
Sansar chalye baithe hai.

Sach jhooth kisi ki baaton ka,
Kuch pata nhi chalta ab toh.
Kuch ke sach bhi ab jhooth lage,
Kuch jhooth chalye baithe hai.

Khwabon ka parda yaha par ab,
Band sa hai khulta hi nahi.
Sansar samaj sabhi apne,
Adhikar bataye baithe hai.

Is duniya me agar kuch karna hai,
Apni marzi ki karna tu.
Ho safal agar to baat hi kya,
Par na ho to mat darna tu.

Bas chalta ja tu sahi dagar,
Or peeche kabhi na mudna tu.
Jab pahuchega tu manzil par,
Vo baat alag hi si hogi,

Tujhse milne ko sab “voh” log,
Kataar lagaye baithe hai..

-Musafir

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Hindi Poem On Self Improvement – खो कर अपने आप को


खो कर अपने आप को क्या कोई दूर जा पाया है
झूठे नाम के ख़ातिर ख़ुद को भुलाया है
ऐ बन्दे समझ तू अपनी असलियत को
ईस्वर तुझे इस संसार के लिये बनाया है
जो गुज़र गया है उसमे खुद को तूने समझाया है
आने वाली कल की चिंता ने आज को जलाया है
क्यों समझ नहीं आता इन प्यारे बुद्धि जीवियों को
की परमात्मा ने सब इसी पल के लिये बनाया है
बेबस हो रहा है पर खुद को  ना शक्तिशाली बनाया है
हो रही मुश्क़िलों को औरों वजह बताया है
एक काम जो तू वर्षो से टालता आया है
जरा रुक ! और देख ईश्वर ने तुझे एक ख़ासियत से बनाया है

– नवनीत कुमार तिवारी

Khokar apne aap ko Kya Koi door jaa paya hai,
Jhuthe naam ke khatir khud ko bhulaya hai
Ae bande samajh tu apni asaliyat ko,
Eswar ne tujhe iss sansar ke liye banaya hai.
Jo guzar Gaya hai usme khud ko tune samaya hai,
Aane wali Kal ki chinta ne aaj ko jalaya hai,
Kyo samajh nahi aata inn pyare budhhijiviyon ko,
Ki parmaatma ne sab isi pal ke liye banaya hai.
Bebas ho Raha hai par khud kp na shaktishali banaya hai,
Ho Rahi mushkilon ko auron ki wajah bataya hai,
Ek Kam Jo tu varso se talta aaya hai ,
Jara rukk! Aur dekh eswar ne tujhe ek khashiyat se bunaya hai..

-Navneet Kumar Tiwari

Hindi Poems on Life-ज़िन्दगी


ज़िन्दगी कभी हँसाती है कभी रुलाती है
कभी ख़ुशी देती है कभी गम देती है
फिर भी जीना तो हर हाल में पड़ता है
कुछ खो कर,तो कुछ पा कर रहना पड़ता है
बस यही ज़िंदगी है यही सब कुछ है
कुछ भी नहीं पास मेरे
तेरी यादें ही सब कुछ है
सब कुछ खो कर भी
बहुत सारी यादें छोड़ जाती है
ज़िन्दगी कभी हँसाती है कभी रुलाती है
कभी खुशी कभी गम दे जाती है
रोने से क्या होगा हमेशा खुश रहना चाहिए
सबकी खुशी  के लिए हमेशा खुश रहना चाहिए
अपने लिए ना सही अपनों के लिए जीना चाहिए
बस -बस ऐसे ही ज़िन्दगी जीना चाहिये  
ज़िन्दगी हर सुख़ हर सुख में
बहुत कुछ सिखाती है
ज़िन्दगी कभी हँसाती है कभी रुलाती है
कभी खुशी दे जाती है कभी गम दे जाती है
कुछ भी नहीं है मेरे पास ये सोचना छोड़ दो
हर दुःख ,तकलीफो को भूल कर  
ज़िन्दगी जिओ तुम्हारा खुश रहना ही
तुम्हारी ज़िन्दगी है सबको प्यार दो, खुशी दो , 
छोटी ही सही पर ज़िन्दगी यही सिखाती है
कभी हँसाती है कभी रुलाती है
कई यादें दिल में छोड़ जाती है
किसी से कुछ भी उम्मीद मत रखो
सदा आगे बढ़ते रहना चाहिए
ज़िन्दगी कभी हँसाती है कभी रुलाती है
कभी खुशी देती है कभी गम देती है

– नितेश शर्मा

Zindagi kabhi hasati hai, kabhi rulati hai,
Kabhi khushi deti hai, kabhi gam de jaati hai,
Phir bhi jeena to har haal me padta hai,
Kuch khokar, to kuch paakar rehna padta hai,
Bas yahi zindagi hai, yahi sab kuch hai,
Kuch bhi nahi paas mere,
Teri yaade he sab kuch hai,
Sab kuch khokar bhi,
Bohot saari yaade chhod jaati hai.
Zindagi kabhi hasati hai, kabhi rulati hai,
Kabhi khushi deti hai, kabhi gam de jaati hai,
Rone se kya hoga, hamesha khush rehna chahiye,
Sabki khushi ke liye, hamesha khush rehna chahiye,
Apne liye na sahi, apno ke liye jeena chahiye,
Sabko khush rakho, sabko saath lekar chalna chahiye,
Bas bas aise he zindagi jeena chahiye.
Zindagi har sukh, har dukh me
Bohot kuch sikhati hai,
Zindagi kabhi hasati hai, kabhi rulati hai,
Kabhi khushi deti hai, kabhi gam de jaati hai,
Kuch bhi nahi hai mere paas, ye sochna chhod do,
Har dukh, taklifo ko bhool kar
Zindagi jio, tumhara khush rehna he,
Tumhari zindagi hai, sabko pyar do, khushi do,
Chhoti he sahi, but zindagi yahi sikhati hai,
Kabhi hasati hai, kabhi rulati hai,
Kai yaade dil me chhod jaati hai,
Kisi se kuch bhi ummid mat rakho,
Sada aage badhte rehna chahiye,
Zindagi kabhi hasati hai,kabhi rulati hai,
Kabhi khushi deti hai, kabhi gum deti hai,

-Nitesh Sharma

 

Metropolitan Zindagi-Hindi Poem on Busy City Life


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मेट्रोपॉलिटन ज़िन्दगी

दरवाज़े की हुई दस्तक को दरकिनार करना शहरियों की आदत सी हो गयी है
अक्सर किस्मत भी घंटी मार के लौट जाती है परेशान होकर
और कभी खुदा मिलने आया तो उसे भी वापिस जाना पड़ा वक़्त खोकर

सुबह और शाम का मंज़र एक सा लगता है
बहार किसी के होने या न होने से फरक भी क्या पड़ता है
वो क्यों जी रहे हैं दरबों में बंद कबूतरों की तरह
क्या पंख उनके भूल गए हैं उड़ने की कला

दूसरों के काम आने को वो सौदा गलत मान गए
रब ने बनाई दुनिया को “बकवास” और उसके बन्दे को “बेगाना” बता गए
बड़े दिन बाद बहार देखी लेकिन बिना दुआ सलाम के ही फिर मुंह बनाके अंदर चले गए
और लुत्फ़ उठा न सके क्योंकि
दरवाज़े की हुई दस्तक को दरकिनार करना शहरियों की आदत सी हो गयी है

-निवेता