Category Archives: Hindi Poems for Relations

Hindi Poem on Friendship-Dosti


दोस्ती

सब लोग साथ छोड दें तो,
तुम मे रा हाथ थाम लेना।

अगर मैं खुश हूँ तो ,
मेरे खुशी में शामील हो लेना।

अगर मैं उदास हूँ तो,
चुटकुले सुना कर हंसा देना।

अगर मैं गलत हूँ तो, डांट देना।

मन ने ठान ली है तुमसे मरते दम तक दोस्ती निभाने की
बस साथ कभी छोड़ मत देना।

मुझे प्यार जताना नहीं आता
तो मेरे गाली को ही मेरा प्यार समझ लेना।

-मानसी (रचनाकार)

Dosti

Sab log sath chod de to,
Tum mere hath tham lena.

Agar mai khush hu toh,
Mere khushi me shamil ho lena.

Agar mai udas hu toh,
Chutkule suna kar hasa dena.

Agar mai galat hu toh, dat dena.

Man ne than li hai tumse marte dum tak sath nibhane ki,

Bas sath kabhi chod mat dena.

Mujhe pyar jatana nahi ata,

toh mere gaali ko hi mera pyar samajh lena.

-Mansi (Rachnakar)

Punjabi Poem on Friendship in Hindi – Yaara


यारा

मेरे सोह्णेया यारा वे
जान तो वी पियारे दिलदारा वे
मेरे लई पैंदी धुप च छाँ वी तू
मेरे हर गम च सुख दा ना वी तू
मेरी ज़िन्दगी च फुलां दी बहार वी तू
मेरे लई रब दी थां तू
मापया तो बाद दूजा नां तू
मेरे हर रिश्ते दी बुनियाद तू
दिल मेरे दी धड़कन वी तू
जिस्म मेरे दी रूह वी तू
मेरे हर साह विच बसेया प्रीत तू
मेरे सोह्णेया यारा वे
जान तो वी पियारे दिलदारा वे

राहुल कुमार

Yaara

Mere sohnya yaara ve
Jaan to vi piyaare dildaara ve
Mere lye paindi dhoop ch chaa vi tu
Mere har gum ch sukh da naa vi tu
Meri zindgi ch phoolan Di bhaar vi tu
Mere lye rabb they thah tu
Maapya to baad duja naa tu
Mere har rishte di buniyad tu
Dil mere di dhadkan vi tu
Jism mere di rooh vi tu
Mere har saah vich bsya preet tu
Mere sohnya yaara ve
Jaan to vi piyaare dildaara ve

-Rahul Kumar

Hindi Poem on Greatness of Mother-Ma Ki Mamta


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माँ की ममता

माँ तो माँ होती हैं,

माँ की ममता बड़ी निराली होती है,

सुख-दुःख में जो खुद को टूटने नहीं देती,

आखिर वही तो माँ होती है।

मत कर अभिमान चूर-चूर हो जाएगा,

माँ का अपमान मत कर

तू दुष्ट संतान कहलायेगा।

जिस माँ ने तुम्हें जीवन दिया

उस माँ को क्यों तुम भूलना चाहते हो,

तुम इतने क्यों लाचार बनना चाहते हो।

बार-बार माँ तुमसे यही कहती है कि अपना ले

माँ को वर्धाश्रम मत भेज।

तुम्हारे घर के सामने मुझे

छोटी सी कुटिया मुझे रहने के लिए दे दे ,

मैं उसमें रह लूँगी।

तुम सुख दो या दुःख दो

मुझे कोई फ़र्क नही पड़ता,

बस तुम दिन में एक बार दिख जाओ

इसी बात की मुझे खुशी हो।

फिर माँ वही कहती है अपना ले

माँ को वर्धाश्रम मत भेज।

जय हिंद

जय भारत

जय माँ

जय गौ माता जी

महामाया मोड़ी माताजी।

-कवि रवि पाटीदार

Hindi Poem by Daughter to her Father on her Marriage-Beti Ka Dard


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बेटी का दर्द
पापा मुझे यूँ ओझल न कर अपनी नज़रों से…
पापा मुझे यूँ ओझल न कर अपनी नज़रों से…
माना दुनिया की रीत है ..
माना दुनिया की रीत है..
फिर भी
पापा मुझे यूँ ओझल न कर अपनी नज़रों से…
पापा मेरे तुम कहते थे मैं तुम्हारी बेटी नहीं बेटा हूं
तो क्या कोई बेटे को विदा करता है ..
पापा मुझे यूँ ओझल न कर अपनी नज़रों से..
पापा मुझे यूँ ओझल न कर अपनी नज़रों से..
-मयूरी श्रीवास्तव

Hindi Poem on Greatness of Mother-Aisi Kyo Hai Tu Maa


people-3065370_960_720आखिर ऐसी क्यों है तू माँ..

घर से बाहर जाते वक़्त
तेरी आँखों से न ओझल हो जाऊँ मैं
उस हलक तक मुझे निहारती रहती है तू
आखिर ऐसी क्यों है तू माँ…।

तेरे टूट जाने में ही मेरा बनना तय था
फिर भी बेशर्म-सा उग रहा था मैं
और ख़ुशी-ख़ुशी ढ़ल रही थी तू
आखिर ऐसी क्यों है तू माँ…।

याद है वो दिन मुझे जब घर में
खाने वाले पांच और रोटी के टुकड़े थे चार
तब ‘मुझे भूख नहीं है’ ऐसा कहने वाली थी तू
आखिर ऐसी क्यों है तू माँ…।

आज सबकुछ बदला-बदला नज़र आता है
फिर भी इस कैल्कुलेटरमूलक दुनिया में
न बदलने वाली सिर्फ एक ही शख़्स है तू
आखिर ऐसी क्यों है तू माँ…।

कुदरत के उस सरल करिश्में को सलाम
जिसका अक्स मैं खुद में पाता हूँ
अपना सबकुछ त्याग कर भी मुझे अपनी
प्रतिकृति होने का आभास कराती है तू
आखिर ऐसी क्यों है तू माँ…।

हमेशा शिकवा रहेगा मुझे तुझसे यह कि
क्यों तू हमेशा लुटाती रही और मैं रहा लूटता
फिर भी शिकन तक नहीं तेरे माथे पर किंचित
आखिर ऐसी क्यों है तू माँ…।

  • © मीना रोहित (आयकर अधिकारी , दिल्ली)